{"_id":"58c56a374f1c1b7926dc4307","slug":"elephant-incurred-damage-to-crops-panic","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथी ने फसलों को पहुंचाई क्षति, दहशत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथी ने फसलों को पहुंचाई क्षति, दहशत
ब्यूरो, अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Sun, 12 Mar 2017 09:03 PM IST
विज्ञापन
खेतों में पहंुचा हाथी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाके में जंगली हाथी इन दिनों आतंक का पर्याय बन गया है। एक बार क्षेत्र में दोबारा आए हाथी ने रविवार को परनी गांव में फसलों को जमकर नुकसान पहुंचाया। इससे ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में उसे भगाने का प्रयास किया, लेकिन वह जंगल की ओर जाने की बजाय परनी बांध पर जाकर बैठ गया।
म्योरपुर वन रेंज के परनी गांव में रविवार को हाथी ने राम मनोज, कुलदीप, रामनारायण, उदय प्रकाश, रामजनम एवं महेंद्र की फसलों को रौंद दिया। गेहूं की खड़ी फसल को उसने अपनी सूंड़ से उखाड़कर फेका। ग्रामीण उसे भगाने का लगातार प्रयास करते रहे, लेकिन वह नहीं माना। उसने जमकर उत्पात मचाया और फसलों को क्षति पहुंचाई।
ग्रामीण इस दौरान वन विभाग के अधिकारियों को फोन करते रह गए, लेकिन वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची। लगातार प्रयास के बावजूद हाथी गांव में नुकसान पहुंचाते हुए परनी बांध पर जा पहुंचा। परनी बांध पर पहुंचकर उसने बांध में छलांग लगा दी और दिन भर वही जमा रहा। ग्रामीण भी उसकी निगहबानी करते रहे कि कहीं वह गांव की ओर वापस न हो जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
म्योरपुर वन रेंज के परनी गांव में रविवार को हाथी ने राम मनोज, कुलदीप, रामनारायण, उदय प्रकाश, रामजनम एवं महेंद्र की फसलों को रौंद दिया। गेहूं की खड़ी फसल को उसने अपनी सूंड़ से उखाड़कर फेका। ग्रामीण उसे भगाने का लगातार प्रयास करते रहे, लेकिन वह नहीं माना। उसने जमकर उत्पात मचाया और फसलों को क्षति पहुंचाई।
विज्ञापन
ग्रामीण इस दौरान वन विभाग के अधिकारियों को फोन करते रह गए, लेकिन वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची। लगातार प्रयास के बावजूद हाथी गांव में नुकसान पहुंचाते हुए परनी बांध पर जा पहुंचा। परनी बांध पर पहुंचकर उसने बांध में छलांग लगा दी और दिन भर वही जमा रहा। ग्रामीण भी उसकी निगहबानी करते रहे कि कहीं वह गांव की ओर वापस न हो जाए।
विज्ञापन