सोनभद्र। हादसे वाली खदान के संचालकों का सियासत और नौकरशाह दोनों से बड़ा कनेक्शन सामने आया है। मई 2016 में जब मेसर्स श्री कृष्णा माइनिंग वर्क्स को खदान संचालन की अनुमति मिली थी, तब प्रदेश में सपा की सरकार थी। कहा जाता था कि उस समय खदान की स्वीकृति में पंचम तल से जुड़े एक बड़े नौकरशाह ने अहम भूमिका निभाई थी। कथित नौकरशाह के भतीजे को लंबे समय तक इस खदान का अघोषित पार्टनर होने की चर्चाएं बनी रहीं। यह जुड़ाव अभी भी बना हाेने का भी दावा है।
वर्ष 2017 में यूपी में भाजपा की सरकार आ गई, इसके बावजूद इस खदान से जुड़े लोगों का वर्चस्व बना रहा। 2022 में दूसरी बार भाजपा की सरकार बनने पर इस खदान के संचालन को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए। पहले स्थानीय स्तर पर शिकायत की गई। कोई फर्क नहीं पड़ा तो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई। चर्चाओं पर यकीन करें तो याचिकाओं काे देखते हुए प्रशासन की तरफ सें कुछ समय के लिए यहां खनन कार्य बंद करा दिया गया। बाद में सत्ता पक्ष से जुड़े एक प्रभावशाली नेता का सहयोग लेकर धड़ल्ले से खदान का संचालन शुरू कर दिया गया। शनिवार को हादसे के बाद तस्वीरों में एक शव दिखने के बावजूद घंटों किसी के भी मौत की पुष्टि से परहेज किया जाता रहा। इसको देखते हुए भी खदान संचालन को एक चर्चित और प्रभावशाली नेता के संरक्षण की चर्चाएं बनी रहीं।