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रोजगार की मांग को लेकर विस्थापितों ने किया जाम
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अनपरा/शक्तिनगर। एनसीएल बीना परियोजना में रोजगार की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को भू-विस्थापित श्रमिक संगठन के बैनर तले विस्थापितों ने ओबी कंपनी के हाल रोड को जाम कर विरोध-प्रदर्शन किया। जानकारी होने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस की मौजूदगी में प्रबंधन और श्रमिकों के बीच वार्ता चल रही है।
भू-विस्थापितों का कहना था कि कंपनी और एनसीएल प्रबंधन बीते चार महीने से रोजगार के लिए विस्थापितों को दौड़ा रहा है। इससे आजिज आकर उन्हें आंदोलन की राह पर चलना पड़ रहा है। कहा कि बीजीआर कंपनी एवं एनसीएल प्रबंधन के देखरेख में बीते 27 जनवरी व फरवरी को दो चरणों में कुल 38 विस्थापितों का साक्षात्कार लेने के बाद सिर्फ 12 विस्थापितों को रोजगार दिया गया। शेष 254 विस्थापित को रोजगार नहीं दिया गया। घरसडी, चंदुआर, बरवानी, जमशीला, बांसी पांच गांव के 266 विस्थापित परिवार को 31 जनवरी तक रोजगार देने के लिए जिला प्रशासन, एनसीएल और कंपनी प्रबंधन के मौजूदगी में लिखित आश्वासन दिया गया था लेकिन सिर्फ खानापूर्ति की गई। जबकि दूसरे प्रांत के लोगों को कंपनी में समायोजित किया जा रहा है। आलम यह है कि मूल विस्थापित रोजगार के लिए भटक रहे हैं। कहा कि जब तक रोजगार नही मिल जाता तब तक रोड जाम रहेगा। विस्थापितों के हाल रोड में बैठकर विरोध प्रदर्शन के वजह से दोनों तरफ वाहनों का लंबा जाम लग गया। द्वितीय पाली वाले श्रमिकों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उधर हाल रोड जाम होने से अधिकारियों, कंपनी प्रबंधन सुरक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। इस दौरान मुख्य रूप से संतोष कुमार दुबे, अजेंन दुबे, मनोज शर्मा, लाल साहब दुबे, अनिल दुबे, राज नारायण दुबे, उपेंद्र दुबे, अरुण सहित दर्जनों विस्थापित परिवार मौजूद रहे। इस संबंध में बीना चौकी प्रभारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों को प्रबंधन की शिकायत पर हिरासत में ले लिया गया। प्रबंधन और आंदोलन कर रहे लोगों में वार्ता की जा रही है। वार्ता के बाद कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
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भू-विस्थापितों का कहना था कि कंपनी और एनसीएल प्रबंधन बीते चार महीने से रोजगार के लिए विस्थापितों को दौड़ा रहा है। इससे आजिज आकर उन्हें आंदोलन की राह पर चलना पड़ रहा है। कहा कि बीजीआर कंपनी एवं एनसीएल प्रबंधन के देखरेख में बीते 27 जनवरी व फरवरी को दो चरणों में कुल 38 विस्थापितों का साक्षात्कार लेने के बाद सिर्फ 12 विस्थापितों को रोजगार दिया गया। शेष 254 विस्थापित को रोजगार नहीं दिया गया। घरसडी, चंदुआर, बरवानी, जमशीला, बांसी पांच गांव के 266 विस्थापित परिवार को 31 जनवरी तक रोजगार देने के लिए जिला प्रशासन, एनसीएल और कंपनी प्रबंधन के मौजूदगी में लिखित आश्वासन दिया गया था लेकिन सिर्फ खानापूर्ति की गई। जबकि दूसरे प्रांत के लोगों को कंपनी में समायोजित किया जा रहा है। आलम यह है कि मूल विस्थापित रोजगार के लिए भटक रहे हैं। कहा कि जब तक रोजगार नही मिल जाता तब तक रोड जाम रहेगा। विस्थापितों के हाल रोड में बैठकर विरोध प्रदर्शन के वजह से दोनों तरफ वाहनों का लंबा जाम लग गया। द्वितीय पाली वाले श्रमिकों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उधर हाल रोड जाम होने से अधिकारियों, कंपनी प्रबंधन सुरक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। इस दौरान मुख्य रूप से संतोष कुमार दुबे, अजेंन दुबे, मनोज शर्मा, लाल साहब दुबे, अनिल दुबे, राज नारायण दुबे, उपेंद्र दुबे, अरुण सहित दर्जनों विस्थापित परिवार मौजूद रहे। इस संबंध में बीना चौकी प्रभारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों को प्रबंधन की शिकायत पर हिरासत में ले लिया गया। प्रबंधन और आंदोलन कर रहे लोगों में वार्ता की जा रही है। वार्ता के बाद कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
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