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डिजिटल अरेस्ट : स्क्रीन पर पुलिस की वर्दी में धौंस देख लुट रहे लोग
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जिले में डिजिटल अरेस्ट के मामले बढ़ते जा रहे हैं। जागरूकता के अभाव में मोबाइल फोन के स्क्रीन पर पुलिस की वर्दी और वैसा ही रौब देखकर पढ़े-लिखे लोग भी झांसे में आ जा रहे हैं।
जालसाज अचानक फोन कर पहले घर और फिर बैंक की सारी जानकारी बताते हैं। इसके बाद एक वीडियाे कॉल आता है। सामने वर्दी पहनकर बैठा व्यक्ति दिखाई देता है। इसके पीछे बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा पुलिस का मोनोग्राम लगा रहता है।
इसके बाद सामने वाला जो भी कहता है, उसे मानना मजबूरी हो जाता है। ये बातें डिजिटल अरेस्ट हो चुके पीड़ितों ने बताईं। इससे बचने के लिए लोगों को सावधान होना होगा वरना एक फोन पर आप भी घर में लॉक हो जाएंगे और जेब अलग कट जाएगी।
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जिले में अक्सर इस तरह के मामले सामने आते हैं। चोपन निवासी एक व्यक्ति को भी ठगों ने जाल में फंसाकर लाखों रुपये ऐंठ लिए।
चुर्क निवासी एक व्यक्ति का लड़का राजस्थान में नौकरी करता था। कुछ दिनों पूर्व पिता को एक फर्जी फोन कॉल मिली। इसमें सामने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए बेटे के रेप केस में फंसे होने का हवाला दिया। बैक ग्रांउड में बेटे के चीखने की आवाज भी सुनाई गई। उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर करीब 50 हजार की ठगी हो गई।
सदर कोतवाली के ब्रह्मनगर निवासी एक व्यक्ति को खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए साइबर ठग ने कॉल किया, जहां केस दर्ज होने और सात साल तक की सजा होने का डर दिखाया। वहां फर्जी एफआईआर की कॉपी भेजी। जहां कई बार में एक लाख 11 हजार ठग लिए।
दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के रन्नो गांव निवासी एक व्यक्ति को ठग ने फर्जी पुलिस अधिकरी बन कॉल किया। कहा कि पोर्न वीडियो देखते हो, केस दर्ज है। घर आ रहे हैं, तुम्हें गिरफ्तार करने। उसने केस खत्म करने का भरोसा देकर 1.40 लाख खाते में ट्रांसफर करा लिए।
ओबरा निवासी एक युवक को साइबर क्राइम महाराष्ट्र बताते हुए कुछ दिनों पूर्व एक फोन कॉल मिली। जहां फर्जी पुलिस अधिकारी बन केस होने का डर दिखाकर 32 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।
डरे तो हो जाओगे ठगी के शिकार
साइबर क्राइम के जानकारों की मानें तो ठग ऐसे मामलों में खुद अफसर बताते हुए कई बार कहते हैं कि आप के नाम से कूरियर है, उसमें मादक पदार्थ या फर्जी पासपोर्ट पकड़ा गया है। इसमें आपके संबंधी फंस गए हैं। कुछ देर बाद बचाने के नाम पर रुपये की मांग की जाती है। ऐसे मामलों में डरे नहीं फोन को काट दें। परेशान करने पर पुलिस को सूचना दें।
सावधानियां जरूरी
टेलीग्राम, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम के माध्यम से टास्क पूरा कर पैसे कमाएं, जैसी लुभावनी अफवाहों से बचें। क्रिप्टो करेंसी, बिटकॉइन में पैसे निवेश करने पर तीन गुना कमाने वाली बातों में आकर जाल में न फंसें।
ऐसे करते हैं डिजिटल अरेस्ट
साइबर ठग अमीर और प्रतिष्ठित लोगों को कॉल कर उन्हें बताते हैं कि आपके नाम से पार्सल भेजा गया है। इसमें मादक पदार्थ, ड्रग्स या नकली पासपोर्ट मिला है। गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें कमरे से बाहर निकलने से मना किया जाता है और वाइस कॉल या वीडियो कॉल के जरिए जमानत देने या छोड़ने के बदले रुपये ट्रांसफर करा लिए जाते हैं। कई मामलों में ठग उनके संबंधियों को दुष्कर्म जैसे मामले में गिरफ्तार करने की फर्जी सूचना देते हैं और छोड़ने के बदले रुपये मांगते हैं तो दूसरी ओर मोबाइल नंबर के गलत इस्तेमाल या फिर पोर्न देखने जैसे आरोप लगाते हुए डराते हैं। तो कई बार गलत वीडियो लीक होने का डर दिखाते हैं। इससे लोग डर कर पैसा दे देते हैं, जबकि ये फर्जी कॉल और फर्जी पुलिस होती है।
डरें नहीं, मौका देखकर कॉल काटें, इंटरनेट बंद करें
एएसपी कालू सिंह ने कहा कि पुलिस कभी भी इस तरह की कॉल नहीं करती। ऐसी कॉल आए तो ठगों की बातों में फंसने की बजाय उसे काट दें। मौका देखकर मोबाइल फोन या लैपटॉप का इंटरनेट कनेक्शन बाधित कर सकते हैं। इससे आपका ठगों से सीधा कनेक्शन खत्म हो जाएगा। सामान्य कॉल पर वह रुपये देने का दबाव उतना प्रभावी तरीके से नहीं बना सकेंगे। ऐसी स्थिति में तत्काल पुलिस को भी सूचना दें। ठगी या ठगी कोशिश होते ही टोल फ्री नंबर 1930 पर कॉल करें।
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जालसाज अचानक फोन कर पहले घर और फिर बैंक की सारी जानकारी बताते हैं। इसके बाद एक वीडियाे कॉल आता है। सामने वर्दी पहनकर बैठा व्यक्ति दिखाई देता है। इसके पीछे बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा पुलिस का मोनोग्राम लगा रहता है।
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इसके बाद सामने वाला जो भी कहता है, उसे मानना मजबूरी हो जाता है। ये बातें डिजिटल अरेस्ट हो चुके पीड़ितों ने बताईं। इससे बचने के लिए लोगों को सावधान होना होगा वरना एक फोन पर आप भी घर में लॉक हो जाएंगे और जेब अलग कट जाएगी।
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जिले में अक्सर इस तरह के मामले सामने आते हैं। चोपन निवासी एक व्यक्ति को भी ठगों ने जाल में फंसाकर लाखों रुपये ऐंठ लिए।
चुर्क निवासी एक व्यक्ति का लड़का राजस्थान में नौकरी करता था। कुछ दिनों पूर्व पिता को एक फर्जी फोन कॉल मिली। इसमें सामने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए बेटे के रेप केस में फंसे होने का हवाला दिया। बैक ग्रांउड में बेटे के चीखने की आवाज भी सुनाई गई। उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर करीब 50 हजार की ठगी हो गई।
सदर कोतवाली के ब्रह्मनगर निवासी एक व्यक्ति को खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए साइबर ठग ने कॉल किया, जहां केस दर्ज होने और सात साल तक की सजा होने का डर दिखाया। वहां फर्जी एफआईआर की कॉपी भेजी। जहां कई बार में एक लाख 11 हजार ठग लिए।
दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के रन्नो गांव निवासी एक व्यक्ति को ठग ने फर्जी पुलिस अधिकरी बन कॉल किया। कहा कि पोर्न वीडियो देखते हो, केस दर्ज है। घर आ रहे हैं, तुम्हें गिरफ्तार करने। उसने केस खत्म करने का भरोसा देकर 1.40 लाख खाते में ट्रांसफर करा लिए।
ओबरा निवासी एक युवक को साइबर क्राइम महाराष्ट्र बताते हुए कुछ दिनों पूर्व एक फोन कॉल मिली। जहां फर्जी पुलिस अधिकारी बन केस होने का डर दिखाकर 32 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।
डरे तो हो जाओगे ठगी के शिकार
साइबर क्राइम के जानकारों की मानें तो ठग ऐसे मामलों में खुद अफसर बताते हुए कई बार कहते हैं कि आप के नाम से कूरियर है, उसमें मादक पदार्थ या फर्जी पासपोर्ट पकड़ा गया है। इसमें आपके संबंधी फंस गए हैं। कुछ देर बाद बचाने के नाम पर रुपये की मांग की जाती है। ऐसे मामलों में डरे नहीं फोन को काट दें। परेशान करने पर पुलिस को सूचना दें।
सावधानियां जरूरी
टेलीग्राम, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम के माध्यम से टास्क पूरा कर पैसे कमाएं, जैसी लुभावनी अफवाहों से बचें। क्रिप्टो करेंसी, बिटकॉइन में पैसे निवेश करने पर तीन गुना कमाने वाली बातों में आकर जाल में न फंसें।
ऐसे करते हैं डिजिटल अरेस्ट
साइबर ठग अमीर और प्रतिष्ठित लोगों को कॉल कर उन्हें बताते हैं कि आपके नाम से पार्सल भेजा गया है। इसमें मादक पदार्थ, ड्रग्स या नकली पासपोर्ट मिला है। गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें कमरे से बाहर निकलने से मना किया जाता है और वाइस कॉल या वीडियो कॉल के जरिए जमानत देने या छोड़ने के बदले रुपये ट्रांसफर करा लिए जाते हैं। कई मामलों में ठग उनके संबंधियों को दुष्कर्म जैसे मामले में गिरफ्तार करने की फर्जी सूचना देते हैं और छोड़ने के बदले रुपये मांगते हैं तो दूसरी ओर मोबाइल नंबर के गलत इस्तेमाल या फिर पोर्न देखने जैसे आरोप लगाते हुए डराते हैं। तो कई बार गलत वीडियो लीक होने का डर दिखाते हैं। इससे लोग डर कर पैसा दे देते हैं, जबकि ये फर्जी कॉल और फर्जी पुलिस होती है।
डरें नहीं, मौका देखकर कॉल काटें, इंटरनेट बंद करें
एएसपी कालू सिंह ने कहा कि पुलिस कभी भी इस तरह की कॉल नहीं करती। ऐसी कॉल आए तो ठगों की बातों में फंसने की बजाय उसे काट दें। मौका देखकर मोबाइल फोन या लैपटॉप का इंटरनेट कनेक्शन बाधित कर सकते हैं। इससे आपका ठगों से सीधा कनेक्शन खत्म हो जाएगा। सामान्य कॉल पर वह रुपये देने का दबाव उतना प्रभावी तरीके से नहीं बना सकेंगे। ऐसी स्थिति में तत्काल पुलिस को भी सूचना दें। ठगी या ठगी कोशिश होते ही टोल फ्री नंबर 1930 पर कॉल करें।