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नहीं मिली मदद तो खुद बुझाई आग
ब्यूरो/अमर उजाला,सोनभद्र
Updated Wed, 20 Apr 2016 11:32 PM IST
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अाग
- फोटो : अमर उजाला
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43 से 44 डिग्री पारे के बीच धधकते जंगल की आग बस्ती की तरफ पहुंचने लगी है। बुधवार की दोपहर दो बजे के करीब जंगल की आग अनपरा-सिंगरौली (रीवा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग) से सटे दो पेट्रोल पंपों और आसपास की बस्ती के नजदीक पहुंचने से अफरातफरी मच गई। लोगों ने वन विभाग की हेल्प लाइन, नजदीकी परियोजनाओं के कंट्रोल रूम को भी सूचना दी लेकिन कहीं से मदद नहीं मिली। तब रहवासियों ने खुद कमान संभाली और लगभग डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आग को काबू कर लिया।
पेट्रोल पंप संचालक मिथिलेश सिंह, राजेश कुमार आदि के मुताबिक दो बजे के करीब जंगल की तरफ से तेजी से आग की लपटें झाड़ियों को जलाते हुए सड़क से सटे बस्ती की तरफ बढ़ी। स्थिति को देखते हुए लोगों ने रेंजर, डीएफओ रेणुकूट कार्यालय में हेल्पलाइन नंबर 05446-252020 पर सूचना दी। कुछ ने निजी परियोजना के कंट्रोल रूम को सूचित किया लेकिन आधे घंटे बाद भी कहीं से मदद नहीं पहुंची। तब तक आग पेट्रोल पंप के पास पहुंच गई। महज दस से 15 फीट और पंपों के टैंक पेट्रोल-डीजल से भरे होने के नाते वहां मौजूद हर शख्स के हाथ-पांव फूलने लगे।
लोगों ने खुद बाल्टी-डब्बा उठाया और पंप संचालकों ने पानी मोटर चलाकर आग बुझाना शुरू किया। ऐन वक्त पर हवा का रुख बदलने और करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। बता दें कि अनपरा से रेणुकूट और अनपरा से भाठ क्षेत्र होते हुए ओबरा तक की ज्यादातर आबादी-गांव जंगल से घिरे हैं। आबादी बिखरी हुई है, इस कारण बस्ती राख होने से बच जाती है लेकिन समय से मदद न मिलने पर जद में आने वाला आशियाना आग की भेंट चढ़ जाता है।
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पेट्रोल पंप संचालक मिथिलेश सिंह, राजेश कुमार आदि के मुताबिक दो बजे के करीब जंगल की तरफ से तेजी से आग की लपटें झाड़ियों को जलाते हुए सड़क से सटे बस्ती की तरफ बढ़ी। स्थिति को देखते हुए लोगों ने रेंजर, डीएफओ रेणुकूट कार्यालय में हेल्पलाइन नंबर 05446-252020 पर सूचना दी। कुछ ने निजी परियोजना के कंट्रोल रूम को सूचित किया लेकिन आधे घंटे बाद भी कहीं से मदद नहीं पहुंची। तब तक आग पेट्रोल पंप के पास पहुंच गई। महज दस से 15 फीट और पंपों के टैंक पेट्रोल-डीजल से भरे होने के नाते वहां मौजूद हर शख्स के हाथ-पांव फूलने लगे।
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लोगों ने खुद बाल्टी-डब्बा उठाया और पंप संचालकों ने पानी मोटर चलाकर आग बुझाना शुरू किया। ऐन वक्त पर हवा का रुख बदलने और करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। बता दें कि अनपरा से रेणुकूट और अनपरा से भाठ क्षेत्र होते हुए ओबरा तक की ज्यादातर आबादी-गांव जंगल से घिरे हैं। आबादी बिखरी हुई है, इस कारण बस्ती राख होने से बच जाती है लेकिन समय से मदद न मिलने पर जद में आने वाला आशियाना आग की भेंट चढ़ जाता है।
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