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जलसंकट पर सतर्क हुआ विभाग, टैंकर को दुरुस्त कराने के निर्देश
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गर्मी आते ही जिले के कई इलाकों में पेयजल संकट गहराने लगता है। इसके मद्देनजर जिले के 629 ग्राम पंचायतों में से करीब पांच सौ में पानी के टैंकर खरीदे गए है। गर्मी की दस्तक के साथ सीडीओ ने सभी ग्राम पंचायतों में टैंकर की मरम्मत कराकर दुरुस्त करा लेने का निर्देश दिया है जिससे जलसंकट की दशा में तत्काल आपूर्ति की जा सके।
पहाड़ और जंगलों से आच्छादित जिले में पानी का संकट शुरू से रहा है। खनन क्षेत्रों में पानी के अंधाधुंध दोहन के चलते गर्मी की दस्तक के साथ ही यहां पानी का संकट गहराने लगता है। अप्रैल और मई की भीषण गर्मी होने से पहाड़ी इलाकों में पेयजल की समस्या मुंह बाएं खड़ी हो जाती है। पहाड़ी इलाकों के अधिकांश हैंडपंप जवाब देते हैं, इस नाते लोगों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ता है। रेणुका पार इलाके के रहवासियों का चुआड़ या नदी का पानी पीकर प्यास बुझानी पड़ती है। दूषित जल का सेवन करने से लोगों को पेट में दर्द समेत अन्य बीमारी होती है। हालांकि इससे निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने दो वर्ष पूर्व ग्राम पंचायतों को टैंकरों को क्रय करने का निर्देश दिया था ताकि गर्मी के दिनों में लोगों को जरूरत के अनुसार पानी उपलब्ध कराया जा सके।
इस निर्देश के क्रम में राबर्ट्सगंज, घोरावल, चतरा, करमा, नगवां, दुद्धी, बभनी, कोन, म्योरपुर और कोन ब्लॉक के 629 ग्राम पंचायतों में से लगभग 500 ग्राम पंचायतों ने टैंकरों को क्रय किया है। हालांकि वर्तमान में कई टैंकरों का टायर आदि खराब है। उधर गर्मीको देखते हुए सीडीओ डॉ. अमित पाल शर्मा ने सभी पंचायत सचिवों को टैंकरों की मरम्मत कराकर चालू हालत में रखने का निर्देश दिया है ताकि जिन इलाकों में पानी की समस्या हो, वहां पर पेयजलापूर्ति कराई जा सके। उक्त निर्देश के क्रम में कई ग्राम पंचायतों द्वारा टैंकरों के मरम्मत का कार्य शुरू करा दिया गया है।
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गर्मी के दिनों में जलसंकट के मद्देनजर ग्राम पंचायतों में पूर्व से खरीदे गए टैंकर को दुरुस्त कराने का निर्देश सभी प्रधान और पंचायत सचिवों को दिया गया है। विशेष परिस्थिति होने पर प्रभावित क्षेत्र में टैंकर से पानी की आपूर्ति कराई जाएगी। - डॉ. अमित पाल शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी, सोनभद्र।
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पहाड़ और जंगलों से आच्छादित जिले में पानी का संकट शुरू से रहा है। खनन क्षेत्रों में पानी के अंधाधुंध दोहन के चलते गर्मी की दस्तक के साथ ही यहां पानी का संकट गहराने लगता है। अप्रैल और मई की भीषण गर्मी होने से पहाड़ी इलाकों में पेयजल की समस्या मुंह बाएं खड़ी हो जाती है। पहाड़ी इलाकों के अधिकांश हैंडपंप जवाब देते हैं, इस नाते लोगों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ता है। रेणुका पार इलाके के रहवासियों का चुआड़ या नदी का पानी पीकर प्यास बुझानी पड़ती है। दूषित जल का सेवन करने से लोगों को पेट में दर्द समेत अन्य बीमारी होती है। हालांकि इससे निजात दिलाने के लिए प्रशासन ने दो वर्ष पूर्व ग्राम पंचायतों को टैंकरों को क्रय करने का निर्देश दिया था ताकि गर्मी के दिनों में लोगों को जरूरत के अनुसार पानी उपलब्ध कराया जा सके।
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इस निर्देश के क्रम में राबर्ट्सगंज, घोरावल, चतरा, करमा, नगवां, दुद्धी, बभनी, कोन, म्योरपुर और कोन ब्लॉक के 629 ग्राम पंचायतों में से लगभग 500 ग्राम पंचायतों ने टैंकरों को क्रय किया है। हालांकि वर्तमान में कई टैंकरों का टायर आदि खराब है। उधर गर्मीको देखते हुए सीडीओ डॉ. अमित पाल शर्मा ने सभी पंचायत सचिवों को टैंकरों की मरम्मत कराकर चालू हालत में रखने का निर्देश दिया है ताकि जिन इलाकों में पानी की समस्या हो, वहां पर पेयजलापूर्ति कराई जा सके। उक्त निर्देश के क्रम में कई ग्राम पंचायतों द्वारा टैंकरों के मरम्मत का कार्य शुरू करा दिया गया है।
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गर्मी के दिनों में जलसंकट के मद्देनजर ग्राम पंचायतों में पूर्व से खरीदे गए टैंकर को दुरुस्त कराने का निर्देश सभी प्रधान और पंचायत सचिवों को दिया गया है। विशेष परिस्थिति होने पर प्रभावित क्षेत्र में टैंकर से पानी की आपूर्ति कराई जाएगी। - डॉ. अमित पाल शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी, सोनभद्र।