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Sonebhadra News: नहीं बना डेंगू वार्ड, जान पर भारी न पड़ जाए अव्यवस्था का डंक
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बारिश के बाद मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है। डेंगू का संक्रमण रोकने के लिए विशेष निर्देश जारी हैं, बावजूद स्वास्थ्य महकमा गंभीर नहीं है। हाल यह है कि अब तक डेंगू वार्ड भी सक्रिय नहीं हो पाए हैं।
जिला अस्पताल के जिस वार्ड में डेंगू के मरीजों को रखा जाता है, वहां अन्य बीमारियों के मरीज भर्ती हो रहे हैं। इसे अभी भी हीट स्ट्रोक व लू वार्ड के रूप में ही आरक्षित किया गया है। ग्रामीण सीएचसी-पीएचसी का हाल भी कुछ ऐसा ही है।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग के दावों में सारी तैयारी पूरी है। अब तक एक भी मरीज न मिलने की दलील देते हुए जिम्मेदारी सब ठीक बता रहे हैं। मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से जिला अति संवेदनशील है।
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खासतौर से म्योरपुर, बभनी, दुद्धी व चोपन ब्लॉक में डेंगू के मरीज अधिक मिलते हैं। म्योरपुर का रेणुकूट, पिपरी, अनपरा व उसके आसपास का क्षेत्र सबसे ज्यादा डेंगू से प्रभावित होता है। यहां हर साल मरीज बड़ी संख्या में मिलते हैं। पिछले साल भी 50 से अधिक डेंगू मरीज मिले थे। हाल यह था कि नजदीकी अस्पतालों में उन्हें भर्ती करने के लिए जगह नहीं थी।
म्योरपुर सीएचसी में आरक्षित पांच बेडों पर कई दिन एक साथ दो-दो मरीजों को भी रखना पड़ा था। इस बार भी बारिश के बाद मच्छरों का प्रकोप तेज हो गया है। बुखार और वायरल बीमारियों के मरीज से अस्पताल पटे पड़े हैं। बावजूद डेंगू को लेकर जिम्मेदार संजीदा नहीं है।
यह हाल तब है, जबकि पिछले माह दो संदिग्ध भी मिल चुके हैं। अस्पतालों में डेंगू के लिए न अलग से वार्ड बन पाए हैं और न ही अन्य सुविधाएं ही की गई है। संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत एंटी लार्वा का छिड़काव कराने की दलील दी जा रही है, मगर यह भी पर्याप्त नहीं है।
मरीजों की भीड़ से जिला अस्पताल के वार्ड फुल
मौसम में उतार-चढ़ाव से मौसमी बीमारियां भी तेजी से पांव पसार रही हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ लग रही है। मंगलवार को ओपीडी में 900 से अधिक मरीज पहुंचे थे। रजिस्ट्रेशन और दवा काउंटर पर मरीजों की लंबी कतार लगी रही। ज्यादातर मरीज बुखार, पेट दर्द, बदन दर्द, उल्टी-दस्त से जुड़े हुए हैं। सीएमएस डॉ. बी. सागर ने बताया कि मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ी है।
जरूरत के अनुसार मरीजों को भर्ती कर दवा दी जा रही है। खानपान में सावधानी बरतने के लिए भी कहा जा रहा है। बताया कि डेंगू से बचाव के लिए वार्ड बनाया गया है। किट से जांच में कोई पॉजीटिव केस नहीं आया है।
सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार ने बताया कि डेंगू से बचाव के लिए विभाग तैयार है। मच्छररोधी दवाओं का छिड़काव निरंतर किया जा रहा है। सीएचसी-पीएचसी पर बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। अभी तक कोई पॉजीटिव केस नहीं आया है। स्थितियाें पर निगाह रखी जा रही है। आशा और एएनएम घर-घर जाकर लोगों को आसपास पानी जमा न होने देने, पूरी बांह के कपड़े पहनने के लिए जागरूक कर रही हैं।
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जिला अस्पताल के जिस वार्ड में डेंगू के मरीजों को रखा जाता है, वहां अन्य बीमारियों के मरीज भर्ती हो रहे हैं। इसे अभी भी हीट स्ट्रोक व लू वार्ड के रूप में ही आरक्षित किया गया है। ग्रामीण सीएचसी-पीएचसी का हाल भी कुछ ऐसा ही है।
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हालांकि स्वास्थ्य विभाग के दावों में सारी तैयारी पूरी है। अब तक एक भी मरीज न मिलने की दलील देते हुए जिम्मेदारी सब ठीक बता रहे हैं। मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से जिला अति संवेदनशील है।
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खासतौर से म्योरपुर, बभनी, दुद्धी व चोपन ब्लॉक में डेंगू के मरीज अधिक मिलते हैं। म्योरपुर का रेणुकूट, पिपरी, अनपरा व उसके आसपास का क्षेत्र सबसे ज्यादा डेंगू से प्रभावित होता है। यहां हर साल मरीज बड़ी संख्या में मिलते हैं। पिछले साल भी 50 से अधिक डेंगू मरीज मिले थे। हाल यह था कि नजदीकी अस्पतालों में उन्हें भर्ती करने के लिए जगह नहीं थी।
म्योरपुर सीएचसी में आरक्षित पांच बेडों पर कई दिन एक साथ दो-दो मरीजों को भी रखना पड़ा था। इस बार भी बारिश के बाद मच्छरों का प्रकोप तेज हो गया है। बुखार और वायरल बीमारियों के मरीज से अस्पताल पटे पड़े हैं। बावजूद डेंगू को लेकर जिम्मेदार संजीदा नहीं है।
यह हाल तब है, जबकि पिछले माह दो संदिग्ध भी मिल चुके हैं। अस्पतालों में डेंगू के लिए न अलग से वार्ड बन पाए हैं और न ही अन्य सुविधाएं ही की गई है। संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत एंटी लार्वा का छिड़काव कराने की दलील दी जा रही है, मगर यह भी पर्याप्त नहीं है।
मरीजों की भीड़ से जिला अस्पताल के वार्ड फुल
मौसम में उतार-चढ़ाव से मौसमी बीमारियां भी तेजी से पांव पसार रही हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ लग रही है। मंगलवार को ओपीडी में 900 से अधिक मरीज पहुंचे थे। रजिस्ट्रेशन और दवा काउंटर पर मरीजों की लंबी कतार लगी रही। ज्यादातर मरीज बुखार, पेट दर्द, बदन दर्द, उल्टी-दस्त से जुड़े हुए हैं। सीएमएस डॉ. बी. सागर ने बताया कि मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ी है।
जरूरत के अनुसार मरीजों को भर्ती कर दवा दी जा रही है। खानपान में सावधानी बरतने के लिए भी कहा जा रहा है। बताया कि डेंगू से बचाव के लिए वार्ड बनाया गया है। किट से जांच में कोई पॉजीटिव केस नहीं आया है।
सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार ने बताया कि डेंगू से बचाव के लिए विभाग तैयार है। मच्छररोधी दवाओं का छिड़काव निरंतर किया जा रहा है। सीएचसी-पीएचसी पर बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। अभी तक कोई पॉजीटिव केस नहीं आया है। स्थितियाें पर निगाह रखी जा रही है। आशा और एएनएम घर-घर जाकर लोगों को आसपास पानी जमा न होने देने, पूरी बांह के कपड़े पहनने के लिए जागरूक कर रही हैं।