फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   decide on naming Shivling brought from Pakistan Sindhi community makes request in nagar nigam varanasi

यूपी: पाकिस्तान से आए शिवलिंग के नामकरण पर काशी में लगेगी मुहर, सिंधी समाज ने की मांग; जानें पूरा प्रस्ताव

Sat, 03 Oct 2026 06:11 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sat, 03 Oct 2026 06:11 AM IST
सार

वाराणसी में पाकिस्तान से लाकर स्थापित किए गए शिवलिंग के नामकरण का प्रस्ताव नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में रखा जाएगा। प्रस्ताव लाने के लिए सिंधी समाज के लोगों ने कार्यकारिणी सदस्य से संपर्क किया है। स्थानीय लोगों ने मंदिर के बाहर इसका नाम ‘प्राचीन श्री सिंधु गंगेश्वर महादेव मंदिर’ लिख दिया है। कार्यकारिणी की मंजूरी के बाद नाम तय होगा।

विज्ञापन
decide on naming Shivling brought from Pakistan Sindhi community makes request in nagar nigam varanasi
नगर निगम की कार्यकारिणी समिति की बैठक में विचार होगा। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

बंटवारे के समय पाकिस्तान से लाकर काशी में स्थापित किए शिवलिंग के नामकरण पर 8 अक्टूबर को नगर निगम की कार्यकारिणी समिति की बैठक में विचार होगा। इसकी स्थापना सिंधी समाज के पूर्वजों ने राजमंदिर वार्ड के ललिता घाट के समीप छोटी शीतला घाट के मंदिर में की थी। 

विज्ञापन


इस मंदिर का नाम प्राचीन श्री सिंधु गंगेश्वर महादेव करने की मांग सिंधी समाज ने की है। नामकरण का प्रस्ताव कार्यकारिणी में लाने के लिए सिंधी समाज के लोगों ने सपा के कार्यकारिणी सदस्य राजकपूर चौधरी अजय से संपर्क किया है। उम्मीद जताई जा रही है कि कार्यकारिणी की बैठक में इस पर चर्चा कर मुहर लगेगी। फिलहाल स्थानीय लोगों ने मंदिर के बाहर प्राचीन श्री सिंधु गंगेश्वर महादेव मंदिर नाम लिख दिया है।

विज्ञापन

decide on naming Shivling brought from Pakistan Sindhi community makes request in nagar nigam varanasi
सिंधी समाज ने की मांग। - फोटो : संवाद

सिंधी समाज से जुड़े पूर्व पार्षद शंकर विश्नानी ने बताया कि इस शिवलिंग से भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौर की स्मृतियां जुड़ी हैं। कहा कि बंटवारे के समय उनके पूर्वज सीताराम मोटवानी ने इस शिवलिंग को पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भारत लेकर आए थे। उस समय सिंधी समाज के लोगों की स्थिति बेहद कठिन थी। वे अपनी जमीन, व्यापार और दूसरी संपत्तियां छोड़कर खाली हाथ भारत आए थे। 

मुश्किल हालात में पूर्वजों के सामने यह सवाल था कि शिवलिंग की पूजा और सेवा किस तरह जारी रखी जाए। एक समय शिवलिंग को गंगा में प्रवाहित करने का विचार भी आया। इसी दौरान काशी के विद्वानों ने सिंधी समाज से आग्रह किया कि शिवलिंग को गंगा किनारे मंदिर में स्थापित कर दिया जाए। स्थानीय लोगों के आग्रह पर सिंधी समाज ने शिवलिंग उन्हें सौंप दिया। 

विज्ञापन

इसके बाद काशीवासियों ने गंगा किनारे निर्धारित स्थान पर शिवलिंग की स्थापना कराई। तभी से यहां विधि-विधान के साथ शिवलिंग की पूजा-अर्चना लगातार होती आ रही है और यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। पिछले दिनों यहां पर पाकिस्तानेश्वर महादेव के नाम का फ्लेक्स लगाया गया था। जिसे हटवाने और कार्रवाई के लिए सिंधी समाज के लोगों ने नगर निगम में अपर नगर आयुक्त विनोद कुमार गुप्ता को ज्ञापन दिया था।

आठ अक्तूबर को होने वाली कार्यकारिणी बैठक में वे इस मंदिर का नाम सिंधु गंगेश्वर महादेव करने के संबंध में प्रस्ताव देंगे। नगर निगम अधिनियम के अनुसार कार्यकारिणी की बैठक से 48 घंटे पूर्व प्रस्ताव देना अनिवार्य है। चूंकि दो अक्तूबर को नगर निगम बंद है इस नाते कल प्रस्ताव देंगे। - राजकपूर चौधरी अजय, सपा कार्यकारिणी सदस्य, नगर निगम

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed