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खनन क्षेत्र में मौत की मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश

Mon, 27 May 2019 11:11 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 27 May 2019 11:11 PM IST
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खनन क्षेत्र में मौत की मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश

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सोनभद्र। जिला मजिस्ट्रेट अंकित कुमार अग्रवाल ने तीन दिन पहर्ले सदर तहसील के बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र में हुई दुर्घटना में दो व्यक्तियों के मौत को गंभीरता से लिया है। उन्होंने मामले की मजिस्ट्रीयल जांच के लिए एसडीएम सदर को नामित किया है। एसडीएम को एक सप्ताह के अंदर जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
डीएम ने बताया कि 24 मई को तहसील राबर्ट्सगंज के बिल्ली-मारकुंडी इलाके में संतोष कुमार सिंह एवं विजय कुमार सिंह के खनन पट्टा क्षेत्र में दुर्घटना हुई थी। खान अधिकारी के रिपोर्ट के मुताबिक खनन दुर्घटना में रामसेवक पुत्र जगतदेव निवासी पतगढ़ी चोपन व शिव कुमारी पत्नी महेंद्र लोहार निवासी चुराटीडाड़ी चोपन की मौत हो गई। अन्य कई घायल हो गए हैं। मामले की गंभीरता व जनहित से जुड़ा हुआ देखते हुए इस प्रकरण की मजिस्ट्रीयल जॉच के आदेश दिए गए हैं। उप जिलाधिकारी राबर्ट्सगंज को मजिस्ट्रीयल जॉच की जिम्मेदारी देते हुए डीएम ने आदेशित किया है। इसके अलावा बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र में मजदूरों की विगत अवधि में यानी पहले हुई अप्राकृतिक हुई मौतक के संबंध में एक सप्ताह के अंदर जॉच आख्या उपलब्ध कराएंगें। एसडीएम ने इस प्रकरण के संबंध मेें जानकारी रखने वाले लोगों से अपेक्षा की है कि वे एक सप्ताह के अंदर किसी भी कार्यालय दिवस में उप जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय राबर्ट्सगंज में उपस्थित होकर अपना लिखित, मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं।
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अफसरों की अनदेखी से खदानें बन गई मौत की खाई
सोनभद्र। खान विभाग, राजस्व और पुलिस की अनदेखी के चलते खदानें मौत की खाई बनती जा रही है। दिन तो दिन रात के अंधेरे में इन खदानों में काम चलता है। रोक के बावजूद पोकलेन मशीनों से घंटे के हिसाब से देर रात तक काम होता है। खनिज सर्वेयर, खान अधिकारी, राजस्वकर्मी और पुलिस विभाग के संबंधित थाने इस खदान संचालकों की मनमानी पर रोक लगा पाने में असमर्थ हैं। वजह, यह है कि इन मनमानी को खान विभाग और पुलिस की मौन स्वीकृति होती है। एक पखवारे के भीतर खनन क्षेत्र में यह दूसरा हादसा है। बर्दिया में एक खदान में रात में एक मजदूर की मौत हो गई थी। मामले में शिकायत होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। खान विभाग और राजस्व विभाग भी मौत पर कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति करते आया है। इसका नतीजा है कि चंद लोगों की जरूरतों को पूरा करते हुए लीज संचालक खदानों की मौत की खाई बनाते जा रहे हैं और मजदूर काल की गाल में समाते जा रहे हैं।
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