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हत्या के दोषी को उम्रकैद, 30 हजार रुपये अर्थदंड
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सोनभद्र। सत्र न्यायाधीश रजत सिंह जैन की अदालत ने मंगलवार को बीरबल हत्याकांड के मामले में दोषी बाबूराम अगरिया को उम्रकैद एवं 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं तीन आरोपियों दिनेश, सुरेश एवं सुबबेलाल अगरिया को दोषमुक्त करार दिया।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक बीजपुर थाने में दी तहरीर में गोपाल साह ने आरोप लगाया था कि उसका लड़का बीरबल जब दिनांक 26 अप्रैल 2018 को घर पर सो रहा था तभी दोपहर करीब 12 बजे बीजपुर थाना क्षेत्र के अंजानी निवासी सुरेश, दिनेश एवं छत्तीसगढ़ के गुडुर निवासी सुबबेलाल घर पर आकर बेटे को ताश खेलने के लिए जगा कर जंगल की ओर लेकर चले गए। कुछ देर बाद करीब एक बजे जब लकड़ी लेने जंगल की ओर रामू के साथ जाने लगा तो देखा कि हाथ में कुल्हाड़ी लेकर बाबूराम अगरिया जहां गूलर के पेड़ के नीचे सभी ताश खेल रहे थे पहुंचा और मौके पर मौजूद बेटा बीरबल के गर्दन के ऊपर ताबड़तोड़ प्रहार करने लगा। जब तक मौके पर लोग पहुंचते तब तक वह जंगल की ओर भाग गया।
इस तहरीर पर बीजपुर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना किया और पर्याप्त सबूत मिलने पर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्क सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर बाबूराम अगरिया को उम्रकैद एवं 30 हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई। वहीं सुरेश, दिनेश एवं सुबबेलाल को दोषमुक्त करार दिया। अभियोजन की ओर से प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता सी शशांक शेखर कात्यायन ने बहस की।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक बीजपुर थाने में दी तहरीर में गोपाल साह ने आरोप लगाया था कि उसका लड़का बीरबल जब दिनांक 26 अप्रैल 2018 को घर पर सो रहा था तभी दोपहर करीब 12 बजे बीजपुर थाना क्षेत्र के अंजानी निवासी सुरेश, दिनेश एवं छत्तीसगढ़ के गुडुर निवासी सुबबेलाल घर पर आकर बेटे को ताश खेलने के लिए जगा कर जंगल की ओर लेकर चले गए। कुछ देर बाद करीब एक बजे जब लकड़ी लेने जंगल की ओर रामू के साथ जाने लगा तो देखा कि हाथ में कुल्हाड़ी लेकर बाबूराम अगरिया जहां गूलर के पेड़ के नीचे सभी ताश खेल रहे थे पहुंचा और मौके पर मौजूद बेटा बीरबल के गर्दन के ऊपर ताबड़तोड़ प्रहार करने लगा। जब तक मौके पर लोग पहुंचते तब तक वह जंगल की ओर भाग गया।
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इस तहरीर पर बीजपुर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना किया और पर्याप्त सबूत मिलने पर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्क सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर बाबूराम अगरिया को उम्रकैद एवं 30 हजार रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई। वहीं सुरेश, दिनेश एवं सुबबेलाल को दोषमुक्त करार दिया। अभियोजन की ओर से प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता सी शशांक शेखर कात्यायन ने बहस की।
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