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Sonebhadra News: मुआवजा मिला न मालिकाना हक, कब्जा हटाने के नोटिस ने बढ़ाई बेचैनी
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नगर में एनसीएल परियोजना की ओर से व्यापारियों को दिए गए नोटिस के बाद खलबली मची हुई है। नगर में तीन हजार से अधिक मकान ऐसे हैं, जिनकी भूमि पर परियोजना ही नाम अंकित है।
इन जमीनों को परियोजनाओं ने अधिग्रहित तो किया, मगर मुआवजा नहीं दिया। बाद में इसे मूल स्वामी को लौटा दिया गया, लेकिन कागजात में अब भी परियोजना का ही नाम है। अब अतिक्रमण बताकर कब्जा हटाने के नोटिस ने भवन स्वामियों की बेचैनी बढ़ा दी है।
वर्ष 1981 में परासी, औड़ी और ककरी ग्राम सभा की 412 एकड़ जमीन एनसीएल की ओर से अधिग्रहित किया गया था। एनसीएल ने सभी भूमि पर अपना नाम तो दर्ज करा लिया, लेकिन मूल काश्तकारों को न तो मुआवजा मिला और न ही नौकरी मिली।
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इसे लेकर काश्तकारों ने एनसीएल सहित अन्य उच्चाधिकारियों से लगातार गुहार लगाई। वर्ष 2002 में काश्तकारों ने मुआवजे की मांग को लेकर हाईकोर्ट में अपील दायर की। जवाब में एनसीएल ने डिनोटिफिकेशन का पत्र जारी कर कहा कि जमीन की आवश्यकता नहीं है।
मूल काश्तकार जमीन को अपने हिसाब से इस्तेमाल कर सकता है। इस पत्र के बाद पैसों की आवश्यकता पड़ने पर काश्तकारों ने अपनी जमीनों को स्टांप पेपर बेच दिया। अब इन जमीनों पर बड़े-बड़े मकान बन गए।
करीब 412 एकड़ में नगर के 6 वार्डों में करीब 3 हजार से अधिक मकान बने हैं। काश्तकारों का कहना है कि सरकार ने जमीन तो एनसीएल के नाम दर्ज करवा दी, मगर न जमीन का मुआवजा मिला और न ही मालिकाना हक। अब उसे खाली करने की नोटिस से उनकी चिंता बढ़ी हुई है।
स्टांप पर बेची गई हैं जमीनें, नहीं पास होता नक्शा
अनपरा तापीय परियोजनाओं और एनसीएल के नाम दर्ज भूमि पर लोगों ने दुकान और मकान तो बना लिए। इन जमीनों पर बसे लोगों के पास जमीन का मालिकाना हक ही नहीं है। लोगों ने काश्तकारों से स्टांप पेपर पर जमीन खरीद लिया है। काश्तकार भी अपने ही जमीनों पर कब्जाधारी ही कहलाता है। यह क्षेत्र साडा यानी शक्तिनगर विशेष प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत आता है, लेकिन परियोजनाओं की जमीन पर बसे इन लोगों का दुकान मकान बनाने के लिए साडा नक्शा नहीं दे सकता। जब जमीन पर निर्माण होता है तो कार्रवाई नहीं होती और जब कोई शिकायत करता है तो साडा उसे अवैध बताता है। ऐसे में लोगों में भय का माहौल है।
व्यापारियों ने कहा- पूरा विवरण नहीं
अनपरा के नगर पंचायत बनने और गजट जारी होने के बाद अब नगर में दुकान व मकान बनाने के लिए नक्शा नगर पंचायत ही जारी करेगा। नगर पंचायत भी स्टांप की जमीन पर नक्शा नहीं पास कर सकता है। लोगों की यह समस्या बनी हुई है। नगर के जिन व्यापारियों को मकान के ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस जारी हुआ था। दुकानदारों ने वकील के माध्यम से एनसीएल को जवाब भी दे दिया है। अपने जवाब में दुकानदारों ने कहा है कि नोटिस में जमीन का खाता संख्या और क्षेत्रफल नहीं दर्ज है। व्यापारियों के नाम से कई जगहों पर दुकान व मकान है। साथ ही परासी की ज्यादातर भूमि डिनोटिफिकेशन में है। ऐसे में सीधा ध्वस्तीकरण का नोटिस देना न्यायसंगत नहीं है।
फिलहाल अनपरा बाजार के चार लोगाें से साडा ने भूमि का वैध कागज और नक्शा मंगाया था, लेकिन कोई भी वैध कागज एवं नक्शा उपलब्ध नहीं करा जा सका। वह भूमि एनसीएल ककरी परियोजना के नाम पर दर्ज है। उसी आधार पर उन्हें नोटिस देकर कब्जा हटाने को कहा गया है। आगे की प्रक्रिया नियमों के तहत की जाएगी। -रामविजय सिंह, पीआरओ एनसीएल मुख्यालय।
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इन जमीनों को परियोजनाओं ने अधिग्रहित तो किया, मगर मुआवजा नहीं दिया। बाद में इसे मूल स्वामी को लौटा दिया गया, लेकिन कागजात में अब भी परियोजना का ही नाम है। अब अतिक्रमण बताकर कब्जा हटाने के नोटिस ने भवन स्वामियों की बेचैनी बढ़ा दी है।
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वर्ष 1981 में परासी, औड़ी और ककरी ग्राम सभा की 412 एकड़ जमीन एनसीएल की ओर से अधिग्रहित किया गया था। एनसीएल ने सभी भूमि पर अपना नाम तो दर्ज करा लिया, लेकिन मूल काश्तकारों को न तो मुआवजा मिला और न ही नौकरी मिली।
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इसे लेकर काश्तकारों ने एनसीएल सहित अन्य उच्चाधिकारियों से लगातार गुहार लगाई। वर्ष 2002 में काश्तकारों ने मुआवजे की मांग को लेकर हाईकोर्ट में अपील दायर की। जवाब में एनसीएल ने डिनोटिफिकेशन का पत्र जारी कर कहा कि जमीन की आवश्यकता नहीं है।
मूल काश्तकार जमीन को अपने हिसाब से इस्तेमाल कर सकता है। इस पत्र के बाद पैसों की आवश्यकता पड़ने पर काश्तकारों ने अपनी जमीनों को स्टांप पेपर बेच दिया। अब इन जमीनों पर बड़े-बड़े मकान बन गए।
करीब 412 एकड़ में नगर के 6 वार्डों में करीब 3 हजार से अधिक मकान बने हैं। काश्तकारों का कहना है कि सरकार ने जमीन तो एनसीएल के नाम दर्ज करवा दी, मगर न जमीन का मुआवजा मिला और न ही मालिकाना हक। अब उसे खाली करने की नोटिस से उनकी चिंता बढ़ी हुई है।
स्टांप पर बेची गई हैं जमीनें, नहीं पास होता नक्शा
अनपरा तापीय परियोजनाओं और एनसीएल के नाम दर्ज भूमि पर लोगों ने दुकान और मकान तो बना लिए। इन जमीनों पर बसे लोगों के पास जमीन का मालिकाना हक ही नहीं है। लोगों ने काश्तकारों से स्टांप पेपर पर जमीन खरीद लिया है। काश्तकार भी अपने ही जमीनों पर कब्जाधारी ही कहलाता है। यह क्षेत्र साडा यानी शक्तिनगर विशेष प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत आता है, लेकिन परियोजनाओं की जमीन पर बसे इन लोगों का दुकान मकान बनाने के लिए साडा नक्शा नहीं दे सकता। जब जमीन पर निर्माण होता है तो कार्रवाई नहीं होती और जब कोई शिकायत करता है तो साडा उसे अवैध बताता है। ऐसे में लोगों में भय का माहौल है।
व्यापारियों ने कहा- पूरा विवरण नहीं
अनपरा के नगर पंचायत बनने और गजट जारी होने के बाद अब नगर में दुकान व मकान बनाने के लिए नक्शा नगर पंचायत ही जारी करेगा। नगर पंचायत भी स्टांप की जमीन पर नक्शा नहीं पास कर सकता है। लोगों की यह समस्या बनी हुई है। नगर के जिन व्यापारियों को मकान के ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस जारी हुआ था। दुकानदारों ने वकील के माध्यम से एनसीएल को जवाब भी दे दिया है। अपने जवाब में दुकानदारों ने कहा है कि नोटिस में जमीन का खाता संख्या और क्षेत्रफल नहीं दर्ज है। व्यापारियों के नाम से कई जगहों पर दुकान व मकान है। साथ ही परासी की ज्यादातर भूमि डिनोटिफिकेशन में है। ऐसे में सीधा ध्वस्तीकरण का नोटिस देना न्यायसंगत नहीं है।
फिलहाल अनपरा बाजार के चार लोगाें से साडा ने भूमि का वैध कागज और नक्शा मंगाया था, लेकिन कोई भी वैध कागज एवं नक्शा उपलब्ध नहीं करा जा सका। वह भूमि एनसीएल ककरी परियोजना के नाम पर दर्ज है। उसी आधार पर उन्हें नोटिस देकर कब्जा हटाने को कहा गया है। आगे की प्रक्रिया नियमों के तहत की जाएगी। -रामविजय सिंह, पीआरओ एनसीएल मुख्यालय।