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कोलकर्मियों की हड़ताल का एनसीएल में असर, उत्पादन प्रभावित

Thu, 02 Jul 2020 09:24 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2020 09:24 PM IST
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Coal workers' strike affects NCL, production affected
शक्तिनगर। कोयला क्षेत्र में ट्रेड यूनियनों की तरफ से बृहस्पतिवार से शुरू की गई तीन दिवसीय हड़ताल के पहले दिन व्यापक स्तर पर असर दिखा। एनसीएल में कोयला उत्पादन व प्रेषण बुरी तरह प्रभावित हुआ। संयुक्त मोर्चा ने हड़ताल को अभूतपूर्व बताते हुए दावा किया कि हड़ताल का व्यापक असर पड़ा है।
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बृहस्पतिवार सुबह पहली पाली के शुरू होने से पहले संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी एनसीएल के विभिन्न कोयला क्षेत्रों व इकाइयों के मुख्य द्वार पर पहुंच गए। इसके बाद काफी संख्या में कोयला मजदूर पहुंचे और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ झंडे बैनर के साथ नारेबाजी शुरू कर दिए। कोयला श्रमिकों ने हड़ताल के समर्थन में एकजुटता दिखाई। इस वजह से अधिकांश मजदूर कार्य स्थलों पर नहीं गए। एनसीएल जयंत क्षेत्र के कोल हैंडलिंग प्लांट से कोयले की रैक भेजे जाने की सूचना पर मजदूर एकत्र हो गए। इसके बाद कोयला प्रेषण रोक दिया गया। इसी तरह निगाही कोयला क्षेत्र में हड़ताली कर्मचारियों व कार्य स्थल पर जाने वाले कर्मचारियों के बीच हल्की झड़प हुई लेकिन मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने पुलिस की मदद से स्थिति संभाल लिया। हड़ताल का असर एनसीएल के खड़िया, दुद्धीचुआ, निगाही व जयंत में भी पड़ा। इसी तरह अन्य कोयला क्षेत्र ककरी, बीना, कृष्णशिला, झिंगुरदा, ब्लॉक बी व अमलोरी कोयला प्रोजेक्टों में कोयला श्रमिकों ने हड़ताल के समर्थन में एकता दिखाई। एनसीएल के नेहरू शताब्दी चिकित्सालय व केंद्रीय चिकित्सालय के कर्मी भी हड़ताल में शामिल हुए। इमरजेंसी सेवा जारी रखी गई लेकिन उपस्थिति नहीं दर्ज की गई। हड़ताल की वजह से जलापूर्ति संस्थान (आईडब्ल्यूएसएस) से एनसीएल की पूरी जलापूर्ति ठप रही। सुबह पांच बजे से बंद जलापूर्ति को शुरू कराने का प्रयास किया गया लेकिन कर्मचारियों के विरोध के चलते सफल नहीं हो पाया। माना जा रहा है कि जलापूर्ति नहीं शुरू हुई तो शुक्रवार से एनसीएल की कोयला परियोजनाओं व आवासीय क्षेत्रों में पेयजल का संकट और गहरा जाएगा।
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एनसीएल ने माना उत्पादन व प्रेषण पर असर
सिंगरौली। संयुक्त मोर्चा के बैनर तले विभिन्न ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाई गई कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान एनसीएल का कोयला उत्पादन व प्रेषण प्रभावित रहा है।एनसीएल के प्रवक्ता राम विजय सिंह के मुताबिक बृहस्पतिवार की प्रथम पाली में एनसीएल ने लगभग 18500 टन कोयला उत्पादन किया। इस दौरान कंपनी द्वारा किए जाने वाले कोयला प्रेषण (डिस्पैच) भी आंशिक रूप से प्रभावित रहा । गुरुवार को प्रथम पाली में एनसीएल ने लगभग 60600 टन कोयला डिया । हड़ताल जनित परिस्थितियों के बावजूद कल की प्रथम पाली की तुलना में लगभग 295000 क्यूबिक मीटर (लगभग 80 प्रतिशत) अधिभार हटाव किया गया। प्रथम पाली एवं सामान्य पाली मिलाकर लगभग 80 प्रतिशत कर्मी अनुपस्थित रहे। हालांकि बहुत सारे कर्मी काम पर आना चाह रहे थे जिन्हें प्रदर्शन में लगे लोगों द्वारा आने नहीं दिया गया। हड़ताल के दौरान कंपनी में बिजली, पानी तथा मेडिकल सेवाओं सहित आवश्यक सेवाएं जारी रहीं।
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कोयला खनन का निजीकरण राष्ट्र विरोधी
अनपरा। देश में कोयला क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ लाखों कोयला मजदूर हड़ताल पर है। इसमें वामपंथी संगठनों के अलावा आरएसएस से जुड़ी बीएमएस भी शामिल है। मजदूरों के अंदर आक्रोश है कि कोयला के निजी हाथों में जाने से जिस त्रासदीपूर्ण जीवन को उनके पूर्वजों ने झेला और असुरक्षित जीवन में काम किया है उसे मोदी सरकार फिर से वापस लाने पर आमादा है।

उक्त बातें वर्कर्स फ्रंट के अध्यक्ष दिनकर कपूर ने एक वार्ता के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि खनिज कानून संशोधन अधिनियम 2020 पारित होने से कोल इंडिया लिमिटेड का कोयला खनन क्षेत्र में चला आ रहा एकाधिकार खत्म हो जायेगा और सौ प्रतिशत एफडीआई समेत कारपोरेट कंपनियों को खुले बाजार में कोयले की खरीद फरोख्त की छूट मिल जाएगी। भारत में ऊर्जा के अन्य स्त्रोतों से बिजली उत्पादन अभी भी सीमित हैं। ऐसे में इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन के खनन और खरीद फरोख्त में देशी विदेशी कंपनियों का वर्चस्व राष्ट्रीय हितों के लिए कतई अच्छा नहीं है और इसके दूरगामी विनाशकारी परिणाम होंगे।
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