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कोयला संकट अब छंटने लगा
ब्यूरो, अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Mon, 03 Oct 2016 11:33 PM IST
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उत्पादन लागत में कमी आई
- फोटो : Getty
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अनपरा परियोजना में गहराया कोयला संकट अब छंटने लगा है, बारिश का सिलसिला थमने के बाद आपूर्ति में सुधार आने लगा है। कोयले की रैक आपूर्ति कंपनियों ने बढ़ा दी है। राज्य सेक्टर की सबसे बड़ी अनपरा परियोजना में कोयला संकट का स्थायी निदान निकालने के लिए राज्य उत्पादन निगम के एमडी एपी मिश्रा दूसरे दिन सोमवार को डटे रहे। सुबह अभियंताओं के साथ मुलाकात कर स्थिति जानी।
दोपहर में प्रशासनिक भवन स्थित सीजीएम दफ्तर में सीजीएम त्रिभुवन तिवारी, निदेशक परियोजना आरके त्रिवेदी, निदेशक तकनीकी वीएस तिवारी आदि के साथ राज्य उत्पादन निगम के एमडी एपी मिश्रा ने बैठक कर बिजली उत्पादन और कोयले की उपलब्धता की समीक्षा की। बताया कि मौजूदा समय में अनपरा परियोजना को रोजाना 35 हजार एमटी कोयले की जरूरत है। एनसीएल से बीस हजार टन ही कोयला मिल पा रहा था। बारिश थमने और कोयला उपलब्धता को लेकर हुए प्रयास के बाद रविवार को यह आंकड़ा 28 हजार टन पहुंचा गया है।
उधर, केंद्रीय कोयला सचिव के हस्तक्षेप के बाद सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड रांची और साउथ इस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड से दो-दो रैक (प्रत्येक से करीब चार हजार एमटी) कोयले की आपूर्ति शुरू हो गई है। यह क्रम 31 अक्तूबर तक बना रहेगा। एनसीएल की कृष्णशिला कोल खदान से सड़क मार्ग से चार हजार एमटी कोयला रोजाना मिलने लगा है। इससे कोयला संकट खत्म होने के साथ ही दीवाली तक परियोजना में कोयले का बफर स्टाक बन जाएगा।
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कोयला ढुलाई/लदान में कोई दिक्कत न आने पाए, इसके लिए धनबाद में एक्सईएन प्रियरंजन को रेलवे रैक की उपलब्धता बनाए रखने के लिए तैनात किया गया है। वहीं कोल लदान समय से होती रहे, इसके लिए रांची में एक्सईएन रंजीत कुमार पाल और विलासपुर में आकांक्ष सिंह को तैनाती दी गई है। वहीं तकनीकी निदेशक वीएस तिवारी रेलवे मुख्यालय पर तैनात अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए रखेंगे। ढुलाई-लदान के लिए तैनात किए गए तीनों अभियंताओं से भी हर घंटे स्थिति की जानकारी लेकर उन्हें अपडेट करते रहेंगे।
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दोपहर में प्रशासनिक भवन स्थित सीजीएम दफ्तर में सीजीएम त्रिभुवन तिवारी, निदेशक परियोजना आरके त्रिवेदी, निदेशक तकनीकी वीएस तिवारी आदि के साथ राज्य उत्पादन निगम के एमडी एपी मिश्रा ने बैठक कर बिजली उत्पादन और कोयले की उपलब्धता की समीक्षा की। बताया कि मौजूदा समय में अनपरा परियोजना को रोजाना 35 हजार एमटी कोयले की जरूरत है। एनसीएल से बीस हजार टन ही कोयला मिल पा रहा था। बारिश थमने और कोयला उपलब्धता को लेकर हुए प्रयास के बाद रविवार को यह आंकड़ा 28 हजार टन पहुंचा गया है।
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उधर, केंद्रीय कोयला सचिव के हस्तक्षेप के बाद सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड रांची और साउथ इस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड से दो-दो रैक (प्रत्येक से करीब चार हजार एमटी) कोयले की आपूर्ति शुरू हो गई है। यह क्रम 31 अक्तूबर तक बना रहेगा। एनसीएल की कृष्णशिला कोल खदान से सड़क मार्ग से चार हजार एमटी कोयला रोजाना मिलने लगा है। इससे कोयला संकट खत्म होने के साथ ही दीवाली तक परियोजना में कोयले का बफर स्टाक बन जाएगा।
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कोयला ढुलाई/लदान में कोई दिक्कत न आने पाए, इसके लिए धनबाद में एक्सईएन प्रियरंजन को रेलवे रैक की उपलब्धता बनाए रखने के लिए तैनात किया गया है। वहीं कोल लदान समय से होती रहे, इसके लिए रांची में एक्सईएन रंजीत कुमार पाल और विलासपुर में आकांक्ष सिंह को तैनाती दी गई है। वहीं तकनीकी निदेशक वीएस तिवारी रेलवे मुख्यालय पर तैनात अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए रखेंगे। ढुलाई-लदान के लिए तैनात किए गए तीनों अभियंताओं से भी हर घंटे स्थिति की जानकारी लेकर उन्हें अपडेट करते रहेंगे।