बाल विवाह: सोनभद्र में मासूम दुल्हनें...इस साल रोकी गईं 30 शादियां, मातृत्व बन रहा माैत का सबब; जानें खास
Child Marriage: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में बाल विवाह की ढकोसलावादी परंपरा आज भी जारी है। चोपन ब्लाक के ग्राम पंचायत जुगैल में परंपरा के नाम पर मासूम लड़के-लड़कियों की शादी के कई मामले हैं। कुछ मामले दर्ज भी हुए हैं। पढ़ें अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट...
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Sonbhadra News: ग्राम पंचायत जुगैल...। सोनभद्र में चोपन ब्लाॅक की इस ग्राम पंचायत की आबादी करीब 40 हजार है। यहां ज्यादातर आबादी गरीब, अशिक्षित और बेरोजगार है। लालच और परंपरा की आड़ में लोग अपने मासूम बेटे-बेटियों का बाल विवाह कर देते हैं। इस साल अब तक सोनभद्र में 30 बाल विवाह रोके जा चुके हैं।
मामले थाने तक पहुंचे हैं। मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं। कम उम्र में शादी का नतीजा है कि डुंडीढाड़ टोले के 22 वर्षीय राजेंद्र के चार बच्चे हैं। पांच साल पहले शादी हुई थी। पूरे गांव में इसी तरह शादियां होती हैं।
बाल विवाह का खामियाजा बेटियों को भुगतना पड़ता है। कम उम्र में गर्भवती होने पर उनको कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई बार इलाज के अभाव में उनकी माैत हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, देश और उत्तर प्रदेश की मातृ मृत्यु दर से सोनभद्र की मातृ मृत्यु दर बहुत ज्यादा है।
सोनभद्र में प्रति एक लाख महिलाओं पर मातृ मृत्यु दर 218 है, जबकि देश की 167 और उत्तर प्रदेश की 157 है। यहां अभी भी लोग बाल विवाह को कुप्रथा नहीं मानते हैं। वे कहते हैं, कम उम्र में बच्चों की शादी करने की परंपरा है। इस बात की भी चिंता रहती है कि बेटी कहीं गलत कदम न उठा ले।
सिर्फ जुगैल की नहीं है, बल्कि सोनभद्र जिले के चोपन, दुद्धी, म्योरपुर, बभनी, घोरावल और चतरा ब्लाॅक के गांवों की भी यही स्थिति है। सबसे ज्यादा बाल विवाह शहर से सटे चतरा ब्लाॅक में रोके जाते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा बाल विवाह जुगैल ग्राम पंचायत से जुड़े 75 टोलों में होते हैं। यहां वैंगा, खरवार, गोंड आदि जनजातियां हैं।
जिले की बात करें तो यहां पर 2022 में 15, 2023 में 38 और 2024 में 57 और इस साल जनवरी से जून तक 30 बाल विवाह रुकवाए गए हैं। ये शादियां सूचनाओं के आधार पर रोकी गईं, जबकि बड़ी संख्या में शादियां हो रही हैं। ज्यादातर की सूचनाएं पुलिस-प्रशासन के पास नहीं पहुंच पाती हैं।
जुगैल ग्राम पंचायत के भड़ाही टोले के राम निहोर बताते हैं, शुक्रवार को ही मेरे साढ़ू के इकलौते 14 वर्षीय बेटे की शादी हुई है। लड़की भी 12-13 साल की थी। शादी में पूरा परिवार शामिल हुआ था। राम निहोर बताते हैं, जैसे ही बेटा 14-15 साल का हो जाता है, वह पिता के साथ कमाने लगता है तो परिवार और रिश्तेदारों को लगता है कि बेटा अब शादी योग्य हो गया है।
भड़ाही टोले के ही 26 वर्षीय धर्मपाल की शादी भी 18 साल की उम्र हो गई थी। वह तीन बच्चों के पिता हैं। शादी के समय पत्नी नाबालिग थी। 40 साल की उम्र में अमृतपाल के सात बेटे-बेटियां हैं। इनमें से छह की शादी हो चुकी है। एक बेटी की शादी और होनी है। अमृतपाल की शादी 17 साल में हो गई थी। उनकी पत्नी की उम्र भी कम थी।
सोनभद्र विकास समिति के राजेश चौबे बताते हैं कि नगवां, चोपन, म्योरपुर, रॉबर्ट्सगंज, घोरावल क्षेत्र के एससी-एसटी परिवारों में बाल विवाह का चलन ज्यादा है।
प्रदेश में 45 दिन में 126 बाल विवाह रोके गए
आदिवासी क्षेत्रों में अक्षय तृतीया पर बाल विवाह का प्रचलन है। इसी लिहाज से प्रमुख सचिव महिला कल्याण, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर एक अप्रैल से 15 मई 2025 तक प्रदेश में अभियान चलाया गया।
करीब 45 दिन के अभियान में 126 शादियां रुकवाई गईं। इनमें सबसे अधिक 12 शादियां सोनभद्र में, बदायूं में 10, पीलीभीत व जौनपुर में 6-6, आगरा, कुशीनगर और मेरठ में पांच-पांच शादियां रुकवाई गईं। मुकदमे भी दर्ज कराए गए।
बाल विवाह रोकने के लिए हर ब्लाॅक में समिति गठित की गई है। ये समितियां गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं। बाल विवाह रोक रही हैं। हेल्पलाइन नंबर भी बताए जा रहे हैं, जिस पर कोई भी व्यक्ति बाल विवाह की सूचना दे सकता है। इस साल अब तक 30 बाल विवाह रोके गए हैं। - पुनीत टंडन, जिला प्रोबेशन अधिकारी, सोनभद्र।