फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   Challenge for BJP in Sonbhadra: BJP not won in three nikay bodies ruling party always lost in fourth

सोनभद्र में भाजपा के लिए चुनौती: तीन निकायों में आज तक नहीं खिला कमल, चौथे में सत्ताधारी दल की हमेशा हुई हार

Fri, 12 May 2023 11:26 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र Published by: किरन रौतेला Updated Fri, 12 May 2023 11:26 AM IST
सार

नवसृजित अनपरा और डाला बाजार नगर पंचायत बनने से पहले जिले में कुल आठ निकाय थे। इसमें सोनभद्र नगर पालिका के अलावा ओबरा, पिपरी, रेणुकूट, चोपन, चुर्क, घोरावल और दुद्धी नगर पंचायत हैं। इन निकायों के अतीत पर गौर करें तो औद्योगिक नगरी रेणुकूट, पिपरी और दुद्धी में अब तक हुए किसी भी चुनाव में भाजपा को जीत नहीं मिली है। अलबत्ता कई चुनावों में तो भाजपा प्रत्याशियों ने जमानत भी गंवा दी है।

विज्ञापन
Challenge for BJP in Sonbhadra: BJP not won in three nikay bodies ruling party always lost in fourth
निकाय चुनाव। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

केंद्र और प्रदेश की सत्ता में पूर्ण बहुमत से काबिज भाजपा के लिए जिले की चार निकायों में जीत प्रतिष्ठा का सबब बन चुकी है। इन निकायों में ट्रिपल इंजन की सरकार बनाने का ख्वाब पूरा करना पार्टी के लिए चुनौती बनी है। वजह भी बेहद दिलचस्प है। यह वह निकाय हैं, जहां आज तक सत्ता का जादू नहीं चल पाया है। इनमें से तीन निकायों में तो भाजपा को कभी जीत ही नसीब नहीं हुई। चौथे में पार्टी जीती भी तो तब, जब वह सत्ता में नहीं रही। लोकसभा चुनाव का रिहर्सल माने जा रहे इस चुनाव में इन निकायों का इतिहास बदलने के लिए भाजपा ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया है। अब नतीजों पर सबकी निगाह है।

विज्ञापन

यह भी पढ़ें- CBSE Board 12th Result Out: सीबीएसई ने 12वीं बोर्ड के नतीजे जारी किए, ऐसे करें चेक
विज्ञापन

नवसृजित अनपरा और डाला बाजार नगर पंचायत बनने से पहले जिले में कुल आठ निकाय थे। इसमें सोनभद्र नगर पालिका के अलावा ओबरा, पिपरी, रेणुकूट, चोपन, चुर्क, घोरावल और दुद्धी नगर पंचायत हैं। इन निकायों के अतीत पर गौर करें तो औद्योगिक नगरी रेणुकूट, पिपरी और दुद्धी में अब तक हुए किसी भी चुनाव में भाजपा को जीत नहीं मिली है। अलबत्ता कई चुनावों में तो भाजपा प्रत्याशियों ने जमानत भी गंवा दी है। सिर्फ भाजपा ही नहीं सपा और बसपा जैसे दल भी यहां जीत हासिल करने में नाकाम रहे हैं। वर्ष 1995 में हुए रेणुकूट नगर पंचायत के पहले चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी को जीत मिली थी। इसके बाद से यहां निर्दलीयों ने ही विजय पताका फहराया है। कमोवेश ऐसी ही स्थिति दुद्धी और पिपरी नगर पंचायत की भी है। निर्दलीय हमेशा से दलीय उम्मीदवारों पर भारी रहे हैं। विधानसभा चुनाव में मिथक तोड़कर दुद्धी सीट पर पहली बार कमल खिलाने में कामयाब हुई भाजपा इस बार पूरे जोश में है। विश्व की सबसे बड़ी पार्टी और केंद्र व प्रदेश की सत्ता में होने के कारण कार्यकर्ताओं ने इन निकायों में भाजपा का झंडा बुलंद करने के लिए पूरा दमखम लगाया है। स्थानीय मुद्दों को भुनाने के साथ ही जातिगत समीकरणों को साधने की हरसंभव कोशिश हुई है। इतिहास बदलने की चुनौती से जूझती भाजपा को कितनी सफलता मिलती है, इसके लिए अब मतपेटी खुलने का इंतजार है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

Challenge for BJP in Sonbhadra: BJP not won in three nikay bodies ruling party always lost in fourth
Prayagraj News : निकाय चुनाव। - फोटो : अमर उजाला।
घोरावल में सत्ताधारी दल की हमेशा हुई हार
रेणुकूट, पिपरी और दुद्धी से दिलचस्प इतिहास घोरावल नगर पंचायत का है। जिले की सबसे पुरानी और मतदाताओं के लिहाज से सबसे छोटी इस निकाय के मतदाता हमेशा सत्ता के खिलाफ वोट करते आए हैं। अब तक हुए चुनावों में कभी भी उस पार्टी के प्रत्याशी को जीत नहीं मिली, जिसकी सूबे में सत्ता रही है। भाजपा ने यहां से तीन बार चुनाव जीता है। पहली बार 1995 में बसपा की सरकार थी और दो बार 2006 व 2012 में सूबे की सत्ता सपा के हाथों में थी। यही हाल अन्य दलों का भी रहा है। वर्ष 2017 में प्रचंड बहुमत से सूबे में भाजपा की सरकार बनने के छह माह बाद हुए निकाय चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को करारी शिकस्त खानी पड़ी थी। यहां निर्दल प्रत्याशी को जीत मिली थी।

जीत के लिए नया दांव, विजेता पर ही जताया भरोसा

वर्ष 2017 के चुनाव में पिपरी नगर पंचायत से निर्दल प्रत्याशी दिग्विजय प्रताप सिंह ने बड़ी जीत दर्ज की थी। इसी तरह रेणुकूट से निर्दल प्रताप शिव प्रताप सिंह उर्फ बबलू को कांटे के मुकाबले में जीत मिली थी। उनकी हत्या के बाद हुए उपचुनाव में भी बबलू सिंह की पत्नी निशा सिंह ने निर्दल उम्मीदवार की हैसियत से ही जीत हासिल की। घोरावल में भी निर्दल प्रत्याशी राजेश कुमार ने भाजपा उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की थी। इस बार भाजपा ने नया दांव चलते हुए तीनों ही निवर्तमान चेयरमैन को टिकट थमाया है। उनका यह पैतरा कितना सफल होगा, यह 13 को मतगणना के बाद पता चलेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed