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Sonebhadra News: अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या के नहीं थम रहे मामले
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शासन के तमाम दावों के बावजूद जिले में कई अल्ट्रासाउंड सेंटर पर लिंग परीक्षण जारी है। इसके आधार पर भ्रूण हत्या भी हो रही है। इसमें संलिप्त लोगों को चिह्नित करने की पहल जोर नहीं पकड़ रही है। अनपरा थाना क्षेत्र का ताजा मामला इसका उदाहरण है। इससे पहले भी केकराही, दुद्धी व जिले के अन्य क्षेत्रों में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।
जिले में मानकों को दरकिनार कर अल्ट्रासाउंड सेंटरों का संचालन किया जा रहा है। करीब 58 अल्ट्रासाउंड सेंटरों का पंजीकरण किया गया है। इसमें से कुछ को छोड़ दें तो अधिकांश केंद्रों पर टेक्नीशियन ही जांच करते हैं।
दो वर्ष पूर्व चोपन में मामला आने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इसके बाद दुद्धी और फिर कुछ माह पहले ही केकराही क्षेत्र में एक निजी केंद्र में लिंग परीक्षण के बाद महिला का गर्भपात कराने की घटना हुई थी। इन घटनाओं से विभाग के सबक न लेने का असर है कि मनमाने ढंग से अवैध कार्य जारी है।
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ताजा मामला अनपरा का है। खड़िया काॅलोनी शक्तिनगर निवासी अनिता उर्फ पिंकी की शादी फरवरी 2022 में अनपरा के रेहटा में रहने वाले ओमप्रकाश से हुई थी। वर्ष 2023 में अनिता को बेटी पैदा हुई। अब वह दोबारा गर्भवती थी।
आरोप है कि ससुराल वालों ने क्षेत्र के किसी सेंटर पर लिंग परीक्षण कराया था, जिसमें बेटी होने की बात सामने आने पर करीब 13 दिनों पूर्व उसका गर्भपात करा दिया। स्थिति गंभीर होने के बाद उसे वाराणसी रेफर किया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने मामले में गर्भपात से मौत और प्रताड़ना को लेकर केस दर्ज किया है। हालांकि घटना के पांच दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार मौन साधे हैं। विभाग ने यह जांच करने की जहमत नहीं उठाई कि किस अल्ट्रासाउंड सेंटर पर विवाहिता के भ्रूण का लिंग परीक्षण कराया गया और कहां गर्भपात कराया गया।
स्टिंग ऑपरेशन के लिए नहीं मिल रहे मुखबिर
आठ सालों से लागू शासन की ‘मुखबिर योजना’ जिले में परवान नहीं चढ़ पा रही है। इस योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग को लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या करने वालों की जानकारी जुटाने के लिए मुखबिरों की जरूरत है। इस तरह के लोगों को पकड़वाने के लिए किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन पर शासन करीब तीन लाख रुपये तक खर्च करेगा। इनमें भ्रूण जांच या गर्भपात कराने वाले सेंटर को ढूंढने वाले व्यक्ति, जो महिला सेंटर में जाएगी, उसे और जो महिला के साथ सहयोगी बनकर जाएगा या जाएगी उसे रुपये दिए जाने का नियम हैं। हालांकि इस योजना को अमली जामा पहनाने की कवायद नहीं की गई, मुखबिर न मिलने के कारण यह योजना ठंडे बस्ते में ही पड़ी है।
जिले के सभी अल्ट्रासाउंड केंद्र के संचालकों को सख्त आदेश दिए गए हैं कि किसी भी दशा में लिंग परीक्षण न की जाय। इसका उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अनपरा के मामले का संज्ञान लेते हुए जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होगी।
-डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।
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जिले में मानकों को दरकिनार कर अल्ट्रासाउंड सेंटरों का संचालन किया जा रहा है। करीब 58 अल्ट्रासाउंड सेंटरों का पंजीकरण किया गया है। इसमें से कुछ को छोड़ दें तो अधिकांश केंद्रों पर टेक्नीशियन ही जांच करते हैं।
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दो वर्ष पूर्व चोपन में मामला आने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इसके बाद दुद्धी और फिर कुछ माह पहले ही केकराही क्षेत्र में एक निजी केंद्र में लिंग परीक्षण के बाद महिला का गर्भपात कराने की घटना हुई थी। इन घटनाओं से विभाग के सबक न लेने का असर है कि मनमाने ढंग से अवैध कार्य जारी है।
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ताजा मामला अनपरा का है। खड़िया काॅलोनी शक्तिनगर निवासी अनिता उर्फ पिंकी की शादी फरवरी 2022 में अनपरा के रेहटा में रहने वाले ओमप्रकाश से हुई थी। वर्ष 2023 में अनिता को बेटी पैदा हुई। अब वह दोबारा गर्भवती थी।
आरोप है कि ससुराल वालों ने क्षेत्र के किसी सेंटर पर लिंग परीक्षण कराया था, जिसमें बेटी होने की बात सामने आने पर करीब 13 दिनों पूर्व उसका गर्भपात करा दिया। स्थिति गंभीर होने के बाद उसे वाराणसी रेफर किया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने मामले में गर्भपात से मौत और प्रताड़ना को लेकर केस दर्ज किया है। हालांकि घटना के पांच दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार मौन साधे हैं। विभाग ने यह जांच करने की जहमत नहीं उठाई कि किस अल्ट्रासाउंड सेंटर पर विवाहिता के भ्रूण का लिंग परीक्षण कराया गया और कहां गर्भपात कराया गया।
स्टिंग ऑपरेशन के लिए नहीं मिल रहे मुखबिर
आठ सालों से लागू शासन की ‘मुखबिर योजना’ जिले में परवान नहीं चढ़ पा रही है। इस योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग को लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या करने वालों की जानकारी जुटाने के लिए मुखबिरों की जरूरत है। इस तरह के लोगों को पकड़वाने के लिए किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन पर शासन करीब तीन लाख रुपये तक खर्च करेगा। इनमें भ्रूण जांच या गर्भपात कराने वाले सेंटर को ढूंढने वाले व्यक्ति, जो महिला सेंटर में जाएगी, उसे और जो महिला के साथ सहयोगी बनकर जाएगा या जाएगी उसे रुपये दिए जाने का नियम हैं। हालांकि इस योजना को अमली जामा पहनाने की कवायद नहीं की गई, मुखबिर न मिलने के कारण यह योजना ठंडे बस्ते में ही पड़ी है।
जिले के सभी अल्ट्रासाउंड केंद्र के संचालकों को सख्त आदेश दिए गए हैं कि किसी भी दशा में लिंग परीक्षण न की जाय। इसका उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अनपरा के मामले का संज्ञान लेते हुए जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होगी।
-डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।