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उपकेंद्रों पर मोमबत्ती की रोशनी में प्रसव
sonbhadra
Updated Sun, 05 Feb 2017 11:16 PM IST
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प्रसव
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नक्सल एवं दुरुह क्षेत्रों में करीब 60 एएनएम सेंटरों पर बिजली न होने के कारण रात में मोमबत्ती की रोशनी में प्रसव कराया जा रहा है। अधिकांश सेंटरों पर रात में एएनएम मौजूद नहीं रहती है, जबकि इन्हें 24 घंटें मौजूद रहने का निर्देश है। वहीं सेंटरों पर प्रसूताओं को भोजन की व्यवस्था तक नहीं है।
गौरतलब हो कि नक्सल प्रभावित सोनभद्र में मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात बरतना शुरू किया है। सीएमओ के निर्देश पर 183 एएनएम सेंटर है। लेकिन प्राधिकृत 90 उपकेंद्रों, छह सीएचसी, दो पीएचसी, जिला अस्पताल, राबर्ट्सगंज में स्थित प्रसवोत्तर केंद्र व संयुक्त चिकित्सालय अनपरा में सुरक्षित प्रसव होता हैै। उपकेंद्रों पर सेंटरों सुविधाएं न मिलने के कारण गर्भवती महिलाएं नाममात्र की जा रही है। स्वास्थ विभाग से मिली जानकारी के अनुसार नक्सल क्षेत्र के शिवपुर, नरखोरिया, बागेसोती, कजियारी, नेवारी, नाको, सौली, भवानीगांव बाकी, निगाई, पिपरखाड़, बाराड़ाड़, खोड़ैला, सूअरसोत, व्यवहार, करइल, समेत करीब 60 उपकेंद्रों पर बिजली की व्यवस्था नहीं है। ऐसे उपकेंद्रों पर मोमबत्ती या लालटेन की रोशनी में एएनएम प्रसव करा रही है। सेेंटरों पर जच्चा-बच्चा को भर्ती करने की व्यवस्था नहीं है।
जबकि शासन का निर्देश है कि अस्पताल से प्रसव के 48 घंटे बाद ही जच्चा-बच्चा को छूुट्टी दी जाए। एक वर्ष में उपकेंद्रों पर करीब 12 हजार प्रसव होता है। नक्सल एवं पहाड़ी इलाकों के अधिकांश सेंटर पर शाम पांच बजे के बाद ताला लटक जाता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को क्षेत्रीय झोलाछाप की शरण में जाना पड़ता है।
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इस संबंध में सीएमओ डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह ने कहा कि जिन सेंटरों पर बिजली नहीं है वहां रोशनी करने वाली लैंप आदि की व्यवस्था कराई गई है। सीएचसी, पीएचसी और संयुक्त चिकित्सालय में प्रसूता को भोजन देने की व्यवस्था है।
प्रसव के लिए प्राधिकृत सभी सेंटरों पर दवाइयां समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध है। उपकेंद्र से नदारद रहने वाली एएनएम की शिनाख्त कर उनके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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गौरतलब हो कि नक्सल प्रभावित सोनभद्र में मातृ-शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एहतियात बरतना शुरू किया है। सीएमओ के निर्देश पर 183 एएनएम सेंटर है। लेकिन प्राधिकृत 90 उपकेंद्रों, छह सीएचसी, दो पीएचसी, जिला अस्पताल, राबर्ट्सगंज में स्थित प्रसवोत्तर केंद्र व संयुक्त चिकित्सालय अनपरा में सुरक्षित प्रसव होता हैै। उपकेंद्रों पर सेंटरों सुविधाएं न मिलने के कारण गर्भवती महिलाएं नाममात्र की जा रही है। स्वास्थ विभाग से मिली जानकारी के अनुसार नक्सल क्षेत्र के शिवपुर, नरखोरिया, बागेसोती, कजियारी, नेवारी, नाको, सौली, भवानीगांव बाकी, निगाई, पिपरखाड़, बाराड़ाड़, खोड़ैला, सूअरसोत, व्यवहार, करइल, समेत करीब 60 उपकेंद्रों पर बिजली की व्यवस्था नहीं है। ऐसे उपकेंद्रों पर मोमबत्ती या लालटेन की रोशनी में एएनएम प्रसव करा रही है। सेेंटरों पर जच्चा-बच्चा को भर्ती करने की व्यवस्था नहीं है।
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जबकि शासन का निर्देश है कि अस्पताल से प्रसव के 48 घंटे बाद ही जच्चा-बच्चा को छूुट्टी दी जाए। एक वर्ष में उपकेंद्रों पर करीब 12 हजार प्रसव होता है। नक्सल एवं पहाड़ी इलाकों के अधिकांश सेंटर पर शाम पांच बजे के बाद ताला लटक जाता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को क्षेत्रीय झोलाछाप की शरण में जाना पड़ता है।
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इस संबंध में सीएमओ डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह ने कहा कि जिन सेंटरों पर बिजली नहीं है वहां रोशनी करने वाली लैंप आदि की व्यवस्था कराई गई है। सीएचसी, पीएचसी और संयुक्त चिकित्सालय में प्रसूता को भोजन देने की व्यवस्था है।
प्रसव के लिए प्राधिकृत सभी सेंटरों पर दवाइयां समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध है। उपकेंद्र से नदारद रहने वाली एएनएम की शिनाख्त कर उनके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।