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Sonebhadra News: खुद की जमीन ढूंढ रहे उम्मीदवार, जनता से कर रहे जमीन दिलाने का वादा
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रेणुकूट। पिपरी नगर पंचायत चुनाव में इस बार फिर से जमीन का मुद्दा हावी हो रहा है। चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे सभी उम्मीदवार जनता को जमीन का मालिकाना हक दिलाने का वादा कर रहे हैं। यह भरोसा दिला रहे हैं कि वह किसी को भी उसकी काबिज जगह से हटाने नहीं देंगे। जनता भी उनके वादों को परखने में लगी है।
आजादी के बाद जब पिपरी में रिहंद बांध बनना शुरू हुआ, तब 1958 में पिपरी को नगर पंचायत का दर्जा शासन से मिल गया। यहां बसे लोग नगर पंचायत के अधीन आ गए। उस समय नगर पंचायत के पास कोई जमीन नहीं थी और आज भी नहीं है। पिपरी नगर की भूमि पर जंगल विभाग, उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम लिमिटेड और सिंचाई विभाग अपना-अपना दावा करते रहते हैं। बार-बार रहवासियों को बेदखली की नोटिस भी जारी होती रही है। दुद्धी के पूर्व एसडीएम डॉ विश्राम सिंह ने वर्ष 2016 में इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट बनाकर शासन को प्रेषित की थी। बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मामले में संज्ञान लेने पर तत्कालीन जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने भी इसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी। इसके बाद से राजनीतिक पैरवी से मामला कैबिनेट तक पहुंच गया है। अब कैबिनेट की बैठक से फैसला होना है। इस निकाय चुनाव में जमीन के मुद्दे को भुनाने में सभी प्रत्याशी लगे हुए हैं। कोई वर्षों से लंबित इस मामले को शासन स्तर से कैबिनेट तक पहुंचाने का श्रेय लेकर जनता से समर्थन चाह रहा है तो कोई इस मामले को गरमाने से विभागों की सक्रियता बढ़ने का जिम्मेदार बता रहा है। जनता एक तरफ अपनी जमीन जाने को लेकर ऊहापोह में है तो दूसरी ओर प्रत्याशी उन्हें इसका हक दिलाने का भरोसा दिलाकर वोट पाने की कोशिश कर रहे हैं। सभी प्रत्याशियों का यह दावा है कि वह अपने स्तर से लगकर यहां की समस्या को दूर कर देंगे और जो जहां भी रह रहा है उन्हें वहां से कोई नहीं हटा पाएगा। मतदाता खामोशी से सभी की बातें सुन रहे हैं।
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आजादी के बाद जब पिपरी में रिहंद बांध बनना शुरू हुआ, तब 1958 में पिपरी को नगर पंचायत का दर्जा शासन से मिल गया। यहां बसे लोग नगर पंचायत के अधीन आ गए। उस समय नगर पंचायत के पास कोई जमीन नहीं थी और आज भी नहीं है। पिपरी नगर की भूमि पर जंगल विभाग, उत्तर प्रदेश जल विद्युत निगम लिमिटेड और सिंचाई विभाग अपना-अपना दावा करते रहते हैं। बार-बार रहवासियों को बेदखली की नोटिस भी जारी होती रही है। दुद्धी के पूर्व एसडीएम डॉ विश्राम सिंह ने वर्ष 2016 में इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट बनाकर शासन को प्रेषित की थी। बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मामले में संज्ञान लेने पर तत्कालीन जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने भी इसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी। इसके बाद से राजनीतिक पैरवी से मामला कैबिनेट तक पहुंच गया है। अब कैबिनेट की बैठक से फैसला होना है। इस निकाय चुनाव में जमीन के मुद्दे को भुनाने में सभी प्रत्याशी लगे हुए हैं। कोई वर्षों से लंबित इस मामले को शासन स्तर से कैबिनेट तक पहुंचाने का श्रेय लेकर जनता से समर्थन चाह रहा है तो कोई इस मामले को गरमाने से विभागों की सक्रियता बढ़ने का जिम्मेदार बता रहा है। जनता एक तरफ अपनी जमीन जाने को लेकर ऊहापोह में है तो दूसरी ओर प्रत्याशी उन्हें इसका हक दिलाने का भरोसा दिलाकर वोट पाने की कोशिश कर रहे हैं। सभी प्रत्याशियों का यह दावा है कि वह अपने स्तर से लगकर यहां की समस्या को दूर कर देंगे और जो जहां भी रह रहा है उन्हें वहां से कोई नहीं हटा पाएगा। मतदाता खामोशी से सभी की बातें सुन रहे हैं।
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