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बाबा के भक्तों को देनी होगी कठिन परीक्षा
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घोरावल। सावन शुरू होने में अब गिनती के दिन शेष हैं। जिले में सावन के दौरान भव्य कांवड़ यात्रा निकलती है। दूरदराज से श्रद्धालु कंधे पर कांवड़ लेकर यात्रा में शामिल होते हैं। इस बार उन्हें जर्जर मार्ग पर चुभती गिट्टियों पर नंगे पांव चलकर मंदिर तक पहुंचने की परीक्षा से गुजरना होगा। दरअसल, शिवद्वार मंदिर तक जाने वाला मार्ग बदहाली का शिकार है। श्रद्धालुओं में इसे लेकर खासी नाराजगी है।
शिवद्वार स्थित उमामहेश्वर मंदिर में पवित्र श्रावण माह में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई किमी की लंबी दूरी तय कर वह बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। लाखों अन्य श्रद्धालु भी दर्शन पूजन करने यहां आते हैं। कांवड़ यात्रा दो स्थानों से होती है। पहला मिर्जापुर स्थित गंगा नदी के बरियाघाट से और दूसरा सोनभद्र के विजयगढ़ स्थित रामसरोवर से। दोनों ही रूट की सड़कों की हालत खराब है। इसकी हालत देखकर लग रहा है कि इस बार भी कांवड़ यात्रा कष्टकारी होगी। कांवड़ यात्रा के दोनों रूट पर कई जगहों पर सड़कों में गड्ढे बने हैं तो कई जगह सड़कें उखड़ी हुई हैं। मिर्जापुर मार्ग पर जुड़िया व पेढ़ से घोरावल नगर में मुक्खा तिराहे तक सड़कों की स्थिति दयनीय है। राबर्ट्सगंज मार्ग पर मंडी गेट से खुटहां गांव तक बरसात में पानी भर जाता जो कांवड़ यात्रा के दृष्टिकोण से खतरनाक है। यहां बनी सीसी रोड एक साल के अंदर ही उखड़ गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल प्रशासन सड़कों की दुर्दशा का संज्ञान लेता है तब तक काफी देर हो जाती है। इससे कांवड़ यात्रा के संदर्भ में कुछ अस्थायी व्यवस्था की जाती है। कांवड़ यात्रा व श्रावण मेला की गंभीरता को देखते हुए दीर्घकालिक नीति व योजना बनाकर उस पर अमल करने की जरूरत है।
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शिवद्वार स्थित उमामहेश्वर मंदिर में पवित्र श्रावण माह में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई किमी की लंबी दूरी तय कर वह बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। लाखों अन्य श्रद्धालु भी दर्शन पूजन करने यहां आते हैं। कांवड़ यात्रा दो स्थानों से होती है। पहला मिर्जापुर स्थित गंगा नदी के बरियाघाट से और दूसरा सोनभद्र के विजयगढ़ स्थित रामसरोवर से। दोनों ही रूट की सड़कों की हालत खराब है। इसकी हालत देखकर लग रहा है कि इस बार भी कांवड़ यात्रा कष्टकारी होगी। कांवड़ यात्रा के दोनों रूट पर कई जगहों पर सड़कों में गड्ढे बने हैं तो कई जगह सड़कें उखड़ी हुई हैं। मिर्जापुर मार्ग पर जुड़िया व पेढ़ से घोरावल नगर में मुक्खा तिराहे तक सड़कों की स्थिति दयनीय है। राबर्ट्सगंज मार्ग पर मंडी गेट से खुटहां गांव तक बरसात में पानी भर जाता जो कांवड़ यात्रा के दृष्टिकोण से खतरनाक है। यहां बनी सीसी रोड एक साल के अंदर ही उखड़ गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल प्रशासन सड़कों की दुर्दशा का संज्ञान लेता है तब तक काफी देर हो जाती है। इससे कांवड़ यात्रा के संदर्भ में कुछ अस्थायी व्यवस्था की जाती है। कांवड़ यात्रा व श्रावण मेला की गंभीरता को देखते हुए दीर्घकालिक नीति व योजना बनाकर उस पर अमल करने की जरूरत है।
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