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धान खरीद नहीं होने पर किसानों का फूटा गुस्सा
ब्यूरो अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Wed, 04 Mar 2015 11:42 PM IST
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बासमती धान की खरीद न किए जाने को लेकर अब किसानों का गुस्सा फूटने लगा है। बुधवार को धान खरीद संघर्ष मोर्चा का गठन कर किसानों ने कलेक्ट्रेट में धरना- प्रदर्शन कर मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को संबोधित दो सूत्री मांगपत्र प्रभारी डीएम को सौंपा। वक्ताओं ने कहा कि पिछले वर्ष 4200 रुपये प्रति क्विंटल धान की खरीददारी हुई थी।
लेकिन इस वर्ष 14 सौ रुपये में प्रति क्विंटल बासमती धान का क्रय कर किसानों का उत्पीड़न किया जा रहा है। कहा कि मंसूरी और मोटा धान महज 11 सौ रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीदा जा रहा है।
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मौटा धान और बासमती धान के बीच मात्र तीन सौ रुपये का अंतर रखा गया है। यह किसानों के साथ अन्याय है। लाग से काफी कम कीमत निर्धारित करने के कारण किसानों को लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है।
किसान अपनी पूरी उपज बेचने के बाद भी बैंकों का कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं। जिले में सूखा पड़ने के बाद भी व्यापारी कौड़ियों के भाव धान खरीद रहे हैं। पूर्व में कई बार किसानों ने अपनी समस्या जिलाधिकारी के समक्ष रखा।
इसके बावजूद समस्या जस की जस है। कहा कि विवश होकर किसानों को आंदोलन की राह पकड़नी पड़ रही है।
चेतावनी देते हुए कहा कि शीघ्र बासमती और अन्य धान का उचित दाम देने के साथ ही
बासमती धान की कुटाई की व्यवस्था की जाए। सरकार कृषि के लिए गए कर्ज को माफ करें। कहा कि मांगों को गंभीरता से लेते हुए पूर्ण नहीं कि गया तो किसान वृहद आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। इस मौके पर रवि प्रकाश चौबे, कृष्ण प्रताप सिंह, रमेश कुमार चौबे, रजनीकांत चौबे, कमलेश मिश्रा, श्याम नारायण त्रिपाठी मौजूद रहे।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को संबोधित दो सूत्री मांगपत्र प्रभारी डीएम को सौंपा। वक्ताओं ने कहा कि पिछले वर्ष 4200 रुपये प्रति क्विंटल धान की खरीददारी हुई थी।
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लेकिन इस वर्ष 14 सौ रुपये में प्रति क्विंटल बासमती धान का क्रय कर किसानों का उत्पीड़न किया जा रहा है। कहा कि मंसूरी और मोटा धान महज 11 सौ रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीदा जा रहा है।
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मौटा धान और बासमती धान के बीच मात्र तीन सौ रुपये का अंतर रखा गया है। यह किसानों के साथ अन्याय है। लाग से काफी कम कीमत निर्धारित करने के कारण किसानों को लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है।
किसान अपनी पूरी उपज बेचने के बाद भी बैंकों का कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं। जिले में सूखा पड़ने के बाद भी व्यापारी कौड़ियों के भाव धान खरीद रहे हैं। पूर्व में कई बार किसानों ने अपनी समस्या जिलाधिकारी के समक्ष रखा।
इसके बावजूद समस्या जस की जस है। कहा कि विवश होकर किसानों को आंदोलन की राह पकड़नी पड़ रही है।
चेतावनी देते हुए कहा कि शीघ्र बासमती और अन्य धान का उचित दाम देने के साथ ही
बासमती धान की कुटाई की व्यवस्था की जाए। सरकार कृषि के लिए गए कर्ज को माफ करें। कहा कि मांगों को गंभीरता से लेते हुए पूर्ण नहीं कि गया तो किसान वृहद आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। इस मौके पर रवि प्रकाश चौबे, कृष्ण प्रताप सिंह, रमेश कुमार चौबे, रजनीकांत चौबे, कमलेश मिश्रा, श्याम नारायण त्रिपाठी मौजूद रहे।