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सरकार के साथ बदल जाती है एंबुलेंस
ब्यूरो/ अमर उजाला /सोनभद्र
Updated Tue, 19 Apr 2016 10:36 PM IST
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म्योरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खड़ी एंबुलेंस।
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स्वास्थ्य महकमे में सत्ता परिवर्तन के साथ एंबुलेंस बदलने के नाम पर करोड़ों रुपये बहा दिए गए। प्रदेश में मायावती के सरकार में खरीदी गई एंबुलेंस म्योरपुर सहित अन्य केंद्रों में धूल फांक रही है।
मायावती की सरकार में मुख्यमंत्री महामाया सचल अस्पताल योजना शुरू हुई थी। उस पर पार्टी का नारा और तत्कालीन मुख्यमंत्री की फोटो भी लगी थी। तमाम सुविधाओं से लैस इस सचल अस्पताल पर गैर सरकारी संगठन के माध्यम से चिकित्सक समेत एक टीम हमेशा चला करती थी। गांव-गांव में घूमकर प्रोजेक्टर से फिल्म दिखाकर लोगों को जागरूक करने का भी प्रयास किया जाता था। गंभीर रोगियों को इसमें भर्ती कर सही जगह पर ले जाया जाता था, लेकिन सरकार बदलते ही यह एंबुलेंस खड़ी हो गई।
इसके अलावा पूर्व विधायक सीएम प्रसाद ने विधायक निधि से एक एंबुलेंस दिया था। वह भी धूल फांक रही है। विभाग से मिली टाटा सूमो भी इसी कतार की शोभा बढ़ा रही है। इन वाहनों के न चलसे जंग लगकर सड़ रहे हैं। इस मामले में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष भूपेश चौबे कहते हैं कि जनता के धन से सपा-बसपा एंबुलेंस से मात्र प्रचार अभियान चलाती है। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय यादव कहते हैं कि जिले के लिए 102 और 108 एंबुलेंस सेवा वरदान है। गरीब तो मात्र फोन करते ही तमाम सुविधा पा जाता है।
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बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राम विचार गौतम ने कहा कि मायावती सरकार में शुरू की गई एंबुलेंस सेवा भी चलनी चाहिए थी, उसे खड़ा कर देना कहीं से उचित नहीं है। सीएमओ डाक्टर यूके वर्मा ने कहा कि पिछली सरकार में संचालित एंबुुलेंस को चलाने में खर्च ज्यादा आ रहा था। इसलिए संबंधित कंपनी एंबुलेंस वापस ले जा चुकी है। अब म्योरपुर में एंबुलेंस क्यों पड़ी है। इसका पता लगाते हैं।
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मायावती की सरकार में मुख्यमंत्री महामाया सचल अस्पताल योजना शुरू हुई थी। उस पर पार्टी का नारा और तत्कालीन मुख्यमंत्री की फोटो भी लगी थी। तमाम सुविधाओं से लैस इस सचल अस्पताल पर गैर सरकारी संगठन के माध्यम से चिकित्सक समेत एक टीम हमेशा चला करती थी। गांव-गांव में घूमकर प्रोजेक्टर से फिल्म दिखाकर लोगों को जागरूक करने का भी प्रयास किया जाता था। गंभीर रोगियों को इसमें भर्ती कर सही जगह पर ले जाया जाता था, लेकिन सरकार बदलते ही यह एंबुलेंस खड़ी हो गई।
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इसके अलावा पूर्व विधायक सीएम प्रसाद ने विधायक निधि से एक एंबुलेंस दिया था। वह भी धूल फांक रही है। विभाग से मिली टाटा सूमो भी इसी कतार की शोभा बढ़ा रही है। इन वाहनों के न चलसे जंग लगकर सड़ रहे हैं। इस मामले में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष भूपेश चौबे कहते हैं कि जनता के धन से सपा-बसपा एंबुलेंस से मात्र प्रचार अभियान चलाती है। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय यादव कहते हैं कि जिले के लिए 102 और 108 एंबुलेंस सेवा वरदान है। गरीब तो मात्र फोन करते ही तमाम सुविधा पा जाता है।
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बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राम विचार गौतम ने कहा कि मायावती सरकार में शुरू की गई एंबुलेंस सेवा भी चलनी चाहिए थी, उसे खड़ा कर देना कहीं से उचित नहीं है। सीएमओ डाक्टर यूके वर्मा ने कहा कि पिछली सरकार में संचालित एंबुुलेंस को चलाने में खर्च ज्यादा आ रहा था। इसलिए संबंधित कंपनी एंबुलेंस वापस ले जा चुकी है। अब म्योरपुर में एंबुलेंस क्यों पड़ी है। इसका पता लगाते हैं।