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... कौड़ियों के भाव इंसान बिकता है
ब्यूरो अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Sun, 11 Jan 2015 11:26 PM IST
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तापीय परियोजना के आडिटोरियम में शनिवार की रात काव्य रचनाओं के नाम रही। इस दौरान राजनीतिक, सामाजिक, समसामयिक और हास्य-व्यंग्य से भरपूर रचनाओं ने जमकर वाहवाही बटोरी।
अनपरा परियोजना के हिंदी विकास समिति की ओर से आयोजित अखिल भारतीय कविसम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि संयुक्त शिक्षा निदेशक मिर्जापुर शिवप्रकाश द्विवेदी, दुद्धी विधायक रूबी प्रसाद, म्योरपुर ब्लाक प्रमुख एवं सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय यादव, सीजीएम इं. त्रिभुवन तिवारी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कालिका सिंह ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
वहीं कवियत्री संज्ञा तिवारी ने वीणा वादिनी की स्तुति कर भक्तिभावना जगाई। अध्यक्षता कर रहे प्रख्यात साहित्यकार अजय शेखर ने अब बाजारों में ईमान बिकता है, रुदन की दुकान सजती, जाम बिकता है, कुछ आ गई है इस कदर सस्ती कि कौड़ियों के भाव इंसान बिकता है, की प्रस्तुति से झकझोर कर रख दिया।
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वहीं फैजाबाद से आए पूर्व सांसद प्रो. ओमपाल सिंह निडर ने भारत में रहना है तो भारत से प्यार करो नहीं तो इस भारत से मुख मोड़ जाइए, जिनको नहीं है प्यारी माता भारती ऐसे लोग शीघ्र मेरा देश छोड़ जाइए.. से राष्ट्रविरोधी तत्वों पर निशाना साधा।
रिहंदनगर के डा. दिनेश दिनकर ने भूख पर्वत खा रही है, खा रही है जगंल जमीं, जिंदगी को आस देती सिर्फ सांसे रह गईं.. से यथार्थ का बोध कराया।
रायपुर से आये कवि रमेश विश्वहार, उदयपुर के राव अजात शत्रु की रचनाओं ने जमकर वाहवाही लूटी। शंकर कैमूरी ने एक आदमी थोड़ी कोशिश कर नेता बन सकता है लेकिन नेता लाखा कोशिश के बावजूद आदमी नहीं बन सकता.. के माध्यम से मौकापरस्त नेताओं पर निशाना साधा।
जबलपुर के कमलाकर स्नेही ने पैंसठ वर्ष की आजादी में कुत्ता घुस गया खादी में, बिल्ली घुस गई दिल्ली में, देश का लल्ला लल्ली में.. जैसी रचनाओं से खूब गुदगुदाया। नागपुर के मनीष बाजपेई, उज्जैन के शुधांशु बवंडर, मालवा के अशोक नागर की गीत, गजलें पूरी रात श्रोताओं को बांधे रखीं।
इससे पूर्व परियोजना प्रमुख इं. त्रिभुवन तिवारी ने अतिथियों और कवियों को अंगवस्त्रम् और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। संचालन इं. रविशंकर राजीव और कमलेश राजहंस ने संयुक्त रूप से किया।
इस मौके पर विजय शंकर चतुर्वेदी, जीएम आरके वाही, बालकेश्वर सिंह, पंकज मिश्रा, आदि मौजूद रहे।
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अनपरा परियोजना के हिंदी विकास समिति की ओर से आयोजित अखिल भारतीय कविसम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि संयुक्त शिक्षा निदेशक मिर्जापुर शिवप्रकाश द्विवेदी, दुद्धी विधायक रूबी प्रसाद, म्योरपुर ब्लाक प्रमुख एवं सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय यादव, सीजीएम इं. त्रिभुवन तिवारी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कालिका सिंह ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
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वहीं कवियत्री संज्ञा तिवारी ने वीणा वादिनी की स्तुति कर भक्तिभावना जगाई। अध्यक्षता कर रहे प्रख्यात साहित्यकार अजय शेखर ने अब बाजारों में ईमान बिकता है, रुदन की दुकान सजती, जाम बिकता है, कुछ आ गई है इस कदर सस्ती कि कौड़ियों के भाव इंसान बिकता है, की प्रस्तुति से झकझोर कर रख दिया।
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वहीं फैजाबाद से आए पूर्व सांसद प्रो. ओमपाल सिंह निडर ने भारत में रहना है तो भारत से प्यार करो नहीं तो इस भारत से मुख मोड़ जाइए, जिनको नहीं है प्यारी माता भारती ऐसे लोग शीघ्र मेरा देश छोड़ जाइए.. से राष्ट्रविरोधी तत्वों पर निशाना साधा।
रिहंदनगर के डा. दिनेश दिनकर ने भूख पर्वत खा रही है, खा रही है जगंल जमीं, जिंदगी को आस देती सिर्फ सांसे रह गईं.. से यथार्थ का बोध कराया।
रायपुर से आये कवि रमेश विश्वहार, उदयपुर के राव अजात शत्रु की रचनाओं ने जमकर वाहवाही लूटी। शंकर कैमूरी ने एक आदमी थोड़ी कोशिश कर नेता बन सकता है लेकिन नेता लाखा कोशिश के बावजूद आदमी नहीं बन सकता.. के माध्यम से मौकापरस्त नेताओं पर निशाना साधा।
जबलपुर के कमलाकर स्नेही ने पैंसठ वर्ष की आजादी में कुत्ता घुस गया खादी में, बिल्ली घुस गई दिल्ली में, देश का लल्ला लल्ली में.. जैसी रचनाओं से खूब गुदगुदाया। नागपुर के मनीष बाजपेई, उज्जैन के शुधांशु बवंडर, मालवा के अशोक नागर की गीत, गजलें पूरी रात श्रोताओं को बांधे रखीं।
इससे पूर्व परियोजना प्रमुख इं. त्रिभुवन तिवारी ने अतिथियों और कवियों को अंगवस्त्रम् और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। संचालन इं. रविशंकर राजीव और कमलेश राजहंस ने संयुक्त रूप से किया।
इस मौके पर विजय शंकर चतुर्वेदी, जीएम आरके वाही, बालकेश्वर सिंह, पंकज मिश्रा, आदि मौजूद रहे।