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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   After hours of waiting, empty hands

घंटों इंतजार के बाद भी हाथ खाली

Wed, 23 Nov 2016 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सोनभद्र
अमर उजाला ब्यूरो/सोनभद्र Updated Wed, 23 Nov 2016 11:06 PM IST
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500-1000 के पुराने नोट बंद होने के बाद से बैंकों में लोगों की भीड़ देखी जा रही है। शुरुआती दौर में पुराने नोट बदलने के लिए लोग परेशान रहे। अब खातों से निकासी के लिए लोग परेशान हैं। नोट बंदी के लगभग डेढ़ हफ्ते बाद भी हालत यह है कि  निकासी को लेकर बनी मारामारी की स्थिति अभी भी बरकरार है। बैंकों में रुपया जमा करने वालों की कतार तो कम हो गई लेकिन निकासी के लिए सुबह से शाम तक लोगों की भीड़ लगी हुई है। बुधवार को भी सभी बैंकों में रुपया निकासी के लिए पहुंचे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। तय लिमिट के बराबर भी धनराशि न मिलने से लोग काफी परेशान रहे। रुपयों के साथ पकड़ाई जाती सिक्कों की थैली भी लोगों को परेशानी में डाले रही। हाल यह है कि घंटों इंतजार के बाद भी लोगों को बैंकों से खाली हाथ लौटना पड़ रहा।

गत आठ अक्तूबर की रात से पांच सौ-एक हजार के नोटों का चलन बंद होने के बाद से बने मारामारी की हालात अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। बैंकों में पर्याप्त रुपये न होने से जहां अधिकांश बैंकों के एटीएम गिरे पड़े हैं। वहीं एसबीआई, एचडीएफसी सहित कुछ बैंकों के एटीएम खुल भी रहे हैं तो उन पर लंबी कतार लग जा रही है। बैंकों में अपने खाते से भुगतान लेने पहुंच रहे लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा है। एसबीआई, बैंक आफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक में तो एक बार में दस हजार का भुगतान कर दिया गया जा रहा है लेकिन इलाहाबाद यू पी ग्रामीण बैंक सहित कई बैंक ऐसे हैं, जहां अभी भी रुपये की किल्लत बताकर एक दिन में दस हजार का भुगतान देने में हाथ खड़े कर लिए जा रहे हैं। इन बैंकों में एक दिन में दो से छह हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। इससे जरूरत के कार्यों की पूर्ति के लिए लोगों को रोजाना बैंक का चक्कर लगाना पड़ रहा है। निकासी के समय दो हजार का नोट या फिर पकड़ाई जाती रुपयों की थैली भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। दो हजार का नोट का जहां फुटकर नहीं मिल रहा है। वहीं हजार-पांच सौ की खरीद पर तमाम दूकानदार दस-दस का सिक्का लेने से इंकार कर दे रहे हैं। इसके चलते शादी-ब्याह वाले परिवारों के साथ मरीजों के इलाज को लेकर लोगों को काफी दिक्कत हो रही है। हालात कब तक नियंत्रित होंगे, इस पर अभी बैँक के लोग भी कुछ कहने से कतरा रहे हैं। कुछ यहीं हाल रामगढ़, शाहगंज, घोरावल,          ओबरा, रेणुकूट, चोपन, डाला, मधुपुर, विंढमगंज सभी जगह देखने को मिला।
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