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खर्च हुए करोड़ों पर खेतों में नहीं आई हरियाली
अमर उजाला ब्यूरो/सोनभद्र
Updated Mon, 16 Jan 2017 12:01 AM IST
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चंदौली और सोनभद्र के दर्जनों गांवों के हजारों हेक्टेयर खेतों की सिंचाई के लिए प्रस्तावित धनकुआरी लिफ्ट सिंचाई योजना अधूरी रह गई। विभाग ने निर्माण के नाम पर लिफ्ट बनाने के साथ ही पाइप लाइन बिछाकर छोड़ दी गई। इससे जिले के सिर्फ एक गांव में सिंचाई होती है। अब तक नहरों का निर्माण नहीं कराया गया। इससे क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी है।
मार्च 2013 में धनकुआरी सिंचाई लिफ्ट परियोजना के निर्माण के लिए सदर विधायक अविनाश कुशवाहा और चंदौली जिले की चकिया विधायक पूनम सोनकर ने संयुक्त रूप से शिलान्यास किया था। इसके बाद करीब 20 करोड़ 14 लाख 20 हजार रुपये की लागत से परियोजना का निर्माण कराया जाना था। नाबार्ड से इस योजना के लिए करीब 17 करोड़ 72 लाख 40 हजार रुपये लोन मिला था। माइनर लिफ्ट कैनाल डिवीजन वाराणसी ने इसका निर्माण कार्य तो शुरू कराया लेकिन कार्य पूरा नहीं हो सका। यह निर्माण कर्मनाशा नदी पर किया जाना था, जिसके तहत लिफ्ट का निर्माण तो करा दिया गया लेकिन नहर नहीं बनी।
भले ही विभाग के लोगों ने अब तक कराए गए कार्य को ही पूर्ण मान लिया हो।
दरअसल इस निर्माण से सोनभद्र के दस गांव केसार, कन्हौरा, नकपुर, शिकारपुर, मझुई, परसियां, वन बहुआर, झड़पी-झड़पा, सिकरवार, साड़सोत, गोटीबांध, दुल्लहपुर, रतहरा, जगदीशपुर की सिंचाई होती। इसी तरह चंदौली के केसार, बैडाड़, गहिला, महदेवां, ओबराडीह आदि गांवों की सिंचाई होती। लेकिन सोनभद्र के केसार गांव को छोड़ अन्य किसी गांव में सिंचाई की सुविधा लोगों को नहीं मिली।
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क्षेत्र के नागेंद्र, पृथ्वीनाथ, रामअशीष, भोला, अशोक, राजेंद्र, चंदलाल, निरंजन, गायत्री का कहना है कि विभाग ने सिंचाई परियोजना का निर्माण कराना शुरू किया लेकिन लिफ्ट बनी, नहरों की खुदाई ही नहीं कराई गई। सरकार की इस योजना से क्षेत्र के किसानों को कोई लाभ नहीं मिला। ग्रामीणों ने नहरों की खोदाई कराकर सिंचाई सुविधा दिलाने की मांग की है।
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मार्च 2013 में धनकुआरी सिंचाई लिफ्ट परियोजना के निर्माण के लिए सदर विधायक अविनाश कुशवाहा और चंदौली जिले की चकिया विधायक पूनम सोनकर ने संयुक्त रूप से शिलान्यास किया था। इसके बाद करीब 20 करोड़ 14 लाख 20 हजार रुपये की लागत से परियोजना का निर्माण कराया जाना था। नाबार्ड से इस योजना के लिए करीब 17 करोड़ 72 लाख 40 हजार रुपये लोन मिला था। माइनर लिफ्ट कैनाल डिवीजन वाराणसी ने इसका निर्माण कार्य तो शुरू कराया लेकिन कार्य पूरा नहीं हो सका। यह निर्माण कर्मनाशा नदी पर किया जाना था, जिसके तहत लिफ्ट का निर्माण तो करा दिया गया लेकिन नहर नहीं बनी।
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भले ही विभाग के लोगों ने अब तक कराए गए कार्य को ही पूर्ण मान लिया हो।
दरअसल इस निर्माण से सोनभद्र के दस गांव केसार, कन्हौरा, नकपुर, शिकारपुर, मझुई, परसियां, वन बहुआर, झड़पी-झड़पा, सिकरवार, साड़सोत, गोटीबांध, दुल्लहपुर, रतहरा, जगदीशपुर की सिंचाई होती। इसी तरह चंदौली के केसार, बैडाड़, गहिला, महदेवां, ओबराडीह आदि गांवों की सिंचाई होती। लेकिन सोनभद्र के केसार गांव को छोड़ अन्य किसी गांव में सिंचाई की सुविधा लोगों को नहीं मिली।
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क्षेत्र के नागेंद्र, पृथ्वीनाथ, रामअशीष, भोला, अशोक, राजेंद्र, चंदलाल, निरंजन, गायत्री का कहना है कि विभाग ने सिंचाई परियोजना का निर्माण कराना शुरू किया लेकिन लिफ्ट बनी, नहरों की खुदाई ही नहीं कराई गई। सरकार की इस योजना से क्षेत्र के किसानों को कोई लाभ नहीं मिला। ग्रामीणों ने नहरों की खोदाई कराकर सिंचाई सुविधा दिलाने की मांग की है।