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25 वर्ष बाद हुआ पानी के विवाद का निबटारा
ब्यूरो/अमर उजाला/सोनभद्र
Updated Thu, 23 Jun 2016 11:51 PM IST
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एनसीएल के बूस्टर पंप हाउस निकली पाइप में लगा मीटर।
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एनसीएल और यूपी जल निगम के बीच 25 वर्ष से ज्यादा समय से चल रहे पानी विवाद का निबटारा हो गया है। अनुबंध के बाद जल निगम की संस्तुति पर एनसीएल ने अपने जल संस्थान के बूस्टर पंप हाउस में मीटर लगाने का काम पूरा करा लिया है।
एनसीएल द्वारा शक्तिनगर में स्थापित किए गए जलशोधन संयंत्र (आईडब्ल्यूएसएस) के जरिए 10 कोयला परियोजनाओं व कंपनी मुख्यालय समेत अन्य सहयोगी संस्थानों को पेयजल की आपूर्ति की जाती है। जल संस्थान पानी एनटीपीसी की मदद से रिहंद जलाशय लेता है। अभी तक जल निगम व एनसीएल के बीच कोई अनुबंध नहीं था।
इसी वजह से पानी की मात्रा को लेकर दोनों के बीच भुगतान को लेकर विवाद की स्थिति बनी थी। करार से पूर्व एनसीएल अपने पंप की क्षमता व उसके चलने के घंटे के आधार पर जल निगम को 17 से 18 लाख रुपये प्रतिमाह भुगतान करता था।
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एनसीएल का कहना था कि वह जलाशय से लिए गए पूरे पानी का उपयोग नहीं करता और बचे पानी को पुन: नाले के जरिए जलाशय में छोड़ देता है, लेकिन इस तर्क से जल निगम सहमत नहीं था। जल निगम का कहना था कि जितना पानी लिफ्ट किया गया उसके हिसाब से वह पैसा लेगा। बीते माह दोनों के बीच नए सिरे से करार हुआ इसी के बाद मीटर स्थापित किया गया। माना जा रहा है कि इससे फायदा हो सकता है।
जल संस्थान/ एनसीएल के इंचार्ज असलम खान ने बताया कि अनुबंध के बाद मीटर लगाने का काम पूरा कर लिया गया है। अब दोनों पक्ष दावा प्रतिदावा नहीं ठोक सकते क्योंकि अब सब कुछ मीटर बताएगा। पानी की मांग व आपूर्ति के हिसाब से एनसीएल का बचत व नुकसान दोनों की संभावना है।
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एनसीएल द्वारा शक्तिनगर में स्थापित किए गए जलशोधन संयंत्र (आईडब्ल्यूएसएस) के जरिए 10 कोयला परियोजनाओं व कंपनी मुख्यालय समेत अन्य सहयोगी संस्थानों को पेयजल की आपूर्ति की जाती है। जल संस्थान पानी एनटीपीसी की मदद से रिहंद जलाशय लेता है। अभी तक जल निगम व एनसीएल के बीच कोई अनुबंध नहीं था।
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इसी वजह से पानी की मात्रा को लेकर दोनों के बीच भुगतान को लेकर विवाद की स्थिति बनी थी। करार से पूर्व एनसीएल अपने पंप की क्षमता व उसके चलने के घंटे के आधार पर जल निगम को 17 से 18 लाख रुपये प्रतिमाह भुगतान करता था।
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एनसीएल का कहना था कि वह जलाशय से लिए गए पूरे पानी का उपयोग नहीं करता और बचे पानी को पुन: नाले के जरिए जलाशय में छोड़ देता है, लेकिन इस तर्क से जल निगम सहमत नहीं था। जल निगम का कहना था कि जितना पानी लिफ्ट किया गया उसके हिसाब से वह पैसा लेगा। बीते माह दोनों के बीच नए सिरे से करार हुआ इसी के बाद मीटर स्थापित किया गया। माना जा रहा है कि इससे फायदा हो सकता है।
जल संस्थान/ एनसीएल के इंचार्ज असलम खान ने बताया कि अनुबंध के बाद मीटर लगाने का काम पूरा कर लिया गया है। अब दोनों पक्ष दावा प्रतिदावा नहीं ठोक सकते क्योंकि अब सब कुछ मीटर बताएगा। पानी की मांग व आपूर्ति के हिसाब से एनसीएल का बचत व नुकसान दोनों की संभावना है।