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वेतन न मिलने से संकट
Sonbhadra
Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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बैढ़न। पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग, आरटीओ विभाग, वन विभाग सहित तमाम विभागों के सिंगरौली और सीधी जनपद सहित सूबे में कार्यरत 18 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिल सका है। आर्थिक तंगी के शिकार दैनिक वेतन भोगियों ने अधिकारियों से गुहार लगाई लेकिन उन्हें आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। उनका कहना है कि अधिकारी वेतन नहीं दे रहे सरकार आश्वासन के बाद भी स्थायी नहीं कर रही। वह जाएं तो जाएं कहां। अब उनके सामने बड़ा आंदोलन एक मात्र विकल्प बचा है।
पीडब्ल्यूडी विभाग बैढ़न मुख्यालय पर तैनात दैनिक वेतन भोगी कर्मी रामनदंन पांडेय विभाग में 1970 से कार्यरत हैं। आज भी उनका वेतन महज 5625 रुपये है। इसी विभाग में 1978 से कार्यरत सिरसोतन शाह का वेतन 5045 रुपया है। 1983 से दैनिक वेतनभोगी कर्मी के रूप में विभाग में आए अवधेश प्रसाद शर्मा 5045 रुपया ही पाते हैं। 1970 से विभाग में आए राजलाल पेंटर की तनख्वाह भी 5625 रुपया है। 1976 से ड्यूटी कर रहे रमाशंकर भी इतना ही वेतन पाते हैं। लोगों का कहना है कि उनके समेत 18 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मी इसी तनख्वाह पर वर्षों से कार्य कर रहे हैं। बावजूद इसके पिछले तीन महीने से उन्हें वेतन नहीं दिया गया। इस बाबत उन्होंने अधिकारियों से गुहार लगाई। कलेक्ट्रेट पहुंचकर रोष जताया। लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। अब आर्थिक तंगी उनके गुजर-बसर में आड़े आने लगी है। कर्मियों की मानें तो विभाग के पास उनका वेतन देने का फंड नहीं। लेकिन ठेकेदारों का चेक लाखों रुपये में रोजाना कटता है। दैनिक वेतनभोगी कर्मियों का दुखड़ा यहीं खत्म नहीं होता। उनका कहना है कि शिवराज चौहान सरकार से उनका संगठन मिला और स्थायी करने की बात की। उन्होंने कई बार सभी दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को स्थायी करने का दिलासा दिया लेकिन आज तक इस मामले में कोई पहल नहीं की। इस बाबत जिला कलेक्टर एम सेलवेंद्रन का कहना है कि शीघ्र वह दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को वेतन दिलाएंगे।
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पीडब्ल्यूडी विभाग बैढ़न मुख्यालय पर तैनात दैनिक वेतन भोगी कर्मी रामनदंन पांडेय विभाग में 1970 से कार्यरत हैं। आज भी उनका वेतन महज 5625 रुपये है। इसी विभाग में 1978 से कार्यरत सिरसोतन शाह का वेतन 5045 रुपया है। 1983 से दैनिक वेतनभोगी कर्मी के रूप में विभाग में आए अवधेश प्रसाद शर्मा 5045 रुपया ही पाते हैं। 1970 से विभाग में आए राजलाल पेंटर की तनख्वाह भी 5625 रुपया है। 1976 से ड्यूटी कर रहे रमाशंकर भी इतना ही वेतन पाते हैं। लोगों का कहना है कि उनके समेत 18 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मी इसी तनख्वाह पर वर्षों से कार्य कर रहे हैं। बावजूद इसके पिछले तीन महीने से उन्हें वेतन नहीं दिया गया। इस बाबत उन्होंने अधिकारियों से गुहार लगाई। कलेक्ट्रेट पहुंचकर रोष जताया। लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। अब आर्थिक तंगी उनके गुजर-बसर में आड़े आने लगी है। कर्मियों की मानें तो विभाग के पास उनका वेतन देने का फंड नहीं। लेकिन ठेकेदारों का चेक लाखों रुपये में रोजाना कटता है। दैनिक वेतनभोगी कर्मियों का दुखड़ा यहीं खत्म नहीं होता। उनका कहना है कि शिवराज चौहान सरकार से उनका संगठन मिला और स्थायी करने की बात की। उन्होंने कई बार सभी दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को स्थायी करने का दिलासा दिया लेकिन आज तक इस मामले में कोई पहल नहीं की। इस बाबत जिला कलेक्टर एम सेलवेंद्रन का कहना है कि शीघ्र वह दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को वेतन दिलाएंगे।
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