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कागजों पर झाल बना 5.85 लाख डकारे
Sonbhadra
Updated Thu, 06 Feb 2014 05:43 AM IST
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सोनभद्र। मनरेगा से न सिर्फ चेकडैम और तालाबों का निर्माण कागजों पर हुआ बल्कि झाल बनाने में भी लाखों रुपयों का गोलमाल हुआ है। बीआरजीएफ (बैकवर्ड रीजनल ग्रांट फंड) मद से चतरा ब्लाक के कूड़ा राजवाहे में कागज पर ही झालों (सिंचाई के उद्देश्य से पानी का ठहराव करने के लिए बनाई गई ठोकर) का निर्माण करके 5.85 लाख रुपये की रकम डकार ली गई। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) के आदेश पर हुई जांच में इस बात का खुलासा हुआ है। मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर सीजेएम कोर्ट आगे की सुनवाई कर रही है। मामले में अगली तिथि 13 फरवरी मुकर्रर की गई है।
फरवरी, 2011 में जिला पंचायत की ओर से कूड़ा राजवाहे में रइया गांव के पास झाल निर्माण के लिए 5.85 लाख रुपये जारी किए गए थे। इसके कुछ दिनों बाद कागजों पर इस काम को पूरा हुआ दिखा दिया गया। आरटीआई कार्यकर्ता आलोक चतुर्वेदी की ओर से जब दिसंबर, 2012 में राजवाहे से जुड़े मिर्जापुर नहर प्रखंड से जानकारी मांगी गई तो उत्तर दिया गया कि रइया में विभाग की ओर से कोई झाल नहीं बनाई गई है, न ही किसी विभाग को बनाने के लिए अनुमति दी गई है।
जनवरी, 2013 में आलोक चतुर्वेदी यह मामला सीजेएम कोर्ट में ले गए। इस पर कोर्ट ने मिर्जापुर नहर प्रखंड से आख्या तलब की। प्रखंड के सहायक अभियंता की ओर से फरवरी माह में सीजेएम कोर्ट को आख्या उपलब्ध कराते हुए स्पष्ट किया कि बताई जा रही जगह पर कोई झाल निर्मित नहीं है। इसके बाद सीजेएम कोर्ट ने जिला पंचायत से आख्या तलब की। जिला पंचायत के अभियंता नीरज रस्तोगी की रिपोर्ट में भी यही कहा गया कि रइया में कोई नई झाल निर्मित नहीं की गई है।
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इसके बाद आरटीआई कार्यकर्ता इस मामले में दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश देने की अपील के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट गए, जिस पर हाईकोर्ट ने पुन: सीजेएम कोर्ट को मामले का विचारण करने को कहा। इस पर सीजेएम कोर्ट ने मामले की आगे की सुनवाई शुरू कर दी है।
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फरवरी, 2011 में जिला पंचायत की ओर से कूड़ा राजवाहे में रइया गांव के पास झाल निर्माण के लिए 5.85 लाख रुपये जारी किए गए थे। इसके कुछ दिनों बाद कागजों पर इस काम को पूरा हुआ दिखा दिया गया। आरटीआई कार्यकर्ता आलोक चतुर्वेदी की ओर से जब दिसंबर, 2012 में राजवाहे से जुड़े मिर्जापुर नहर प्रखंड से जानकारी मांगी गई तो उत्तर दिया गया कि रइया में विभाग की ओर से कोई झाल नहीं बनाई गई है, न ही किसी विभाग को बनाने के लिए अनुमति दी गई है।
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जनवरी, 2013 में आलोक चतुर्वेदी यह मामला सीजेएम कोर्ट में ले गए। इस पर कोर्ट ने मिर्जापुर नहर प्रखंड से आख्या तलब की। प्रखंड के सहायक अभियंता की ओर से फरवरी माह में सीजेएम कोर्ट को आख्या उपलब्ध कराते हुए स्पष्ट किया कि बताई जा रही जगह पर कोई झाल निर्मित नहीं है। इसके बाद सीजेएम कोर्ट ने जिला पंचायत से आख्या तलब की। जिला पंचायत के अभियंता नीरज रस्तोगी की रिपोर्ट में भी यही कहा गया कि रइया में कोई नई झाल निर्मित नहीं की गई है।
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इसके बाद आरटीआई कार्यकर्ता इस मामले में दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश देने की अपील के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट गए, जिस पर हाईकोर्ट ने पुन: सीजेएम कोर्ट को मामले का विचारण करने को कहा। इस पर सीजेएम कोर्ट ने मामले की आगे की सुनवाई शुरू कर दी है।