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जिले के छह हजार हैंडपंपों ने दिया जवाब
Updated Wed, 28 Jun 2017 11:59 PM IST
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सोनभद्र। जनपद में मूसलाधार बारिश न होने के कारण तेजी से जलस्तर नीचे खिसक रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों के सर्वाधिक हैंडपंप पानी उगलना बंद कर दिये है। अब तक जिले में स्थापित 33818 इंडिया मार्का हैंडपंपों में से करीब छह हजार हैंडपंप जवाब दे चुके है। दो से तीन हजार हैंडपंप न के बराबर पानी उगल रहे हैं। पानी छोड़ने से लोग पेयजल समस्याओं से जूझ रहे हैं। जल्द बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिनों में पानी के लिए हाहाकार मचना शुरू हो जाएगा।
जिले में तपिश की शुरुआत के साथ ही पानी का संकट अभिशाप बन चुका है। इससे निजात के लिए अब तक करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। हैंडपंपों की स्थापना के साथ ढेरों पेयजल परियोजनाएं भी स्थापित की गई है, लेकिन अधिकांश परियोजनाओं की स्थिति ठीक न होने से अभी भी पेयजल संकट जनपद के हर हिस्से के बाशिंदों को रुलाए हुए है। पहाड़ी क्षेत्रों में हैंडपंपों के खराब होने से लोग चुआड़ का पानी पीने को मजबूर हैं। हर वर्ष गर्मी के आगाज के साथ ही पेयजल संकट मुंह बाएं खड़ा हो जाता है।
स्थिति यह है कि राबर्ट्सगंज के विभिन्न मोहल्लों के अलावा दर्जन भर गांवों में पानी की समस्याएं है। चोपन ब्लॉक के अवई, महुआव कला, बेलकप, कुरूहुल आदि गांवों में पानी के लिए लोगों को काफी दूर जाना पड़ रहा है। घोरावल, चतरा, नगवां इलाके के साथ ही चोपन ब्लॉक के रेणुकापार और कोन अंचल, बभनी, दुद्धी, म्योरपुर परिक्षेत्र के साथ ही ऊर्जांचल के भाठ क्षेत्र में पानी की समस्याएं उत्पन्न हो गई है। जल निगम की मानें तो जिले में स्थापित करीब 33818 इंडिया मार्का हैंडपंपों मेें से करीब छह हजार हैंडपंपों ने पानी देना पूरी तरह से बंद कर दिया है। एडीएम उमाशंकर तिवारी ने कहा कि जल निगम के माध्यम से जिन गांवों में पानी की समस्या है, वहां टैंकरों से पेयजलापूर्ति करवाई जा रही है।
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जिले में तपिश की शुरुआत के साथ ही पानी का संकट अभिशाप बन चुका है। इससे निजात के लिए अब तक करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। हैंडपंपों की स्थापना के साथ ढेरों पेयजल परियोजनाएं भी स्थापित की गई है, लेकिन अधिकांश परियोजनाओं की स्थिति ठीक न होने से अभी भी पेयजल संकट जनपद के हर हिस्से के बाशिंदों को रुलाए हुए है। पहाड़ी क्षेत्रों में हैंडपंपों के खराब होने से लोग चुआड़ का पानी पीने को मजबूर हैं। हर वर्ष गर्मी के आगाज के साथ ही पेयजल संकट मुंह बाएं खड़ा हो जाता है।
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स्थिति यह है कि राबर्ट्सगंज के विभिन्न मोहल्लों के अलावा दर्जन भर गांवों में पानी की समस्याएं है। चोपन ब्लॉक के अवई, महुआव कला, बेलकप, कुरूहुल आदि गांवों में पानी के लिए लोगों को काफी दूर जाना पड़ रहा है। घोरावल, चतरा, नगवां इलाके के साथ ही चोपन ब्लॉक के रेणुकापार और कोन अंचल, बभनी, दुद्धी, म्योरपुर परिक्षेत्र के साथ ही ऊर्जांचल के भाठ क्षेत्र में पानी की समस्याएं उत्पन्न हो गई है। जल निगम की मानें तो जिले में स्थापित करीब 33818 इंडिया मार्का हैंडपंपों मेें से करीब छह हजार हैंडपंपों ने पानी देना पूरी तरह से बंद कर दिया है। एडीएम उमाशंकर तिवारी ने कहा कि जल निगम के माध्यम से जिन गांवों में पानी की समस्या है, वहां टैंकरों से पेयजलापूर्ति करवाई जा रही है।
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