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स् थापित होगी टेक्सोलॉजिकल लैब, अस्पताल
Updated Mon, 23 Apr 2018 11:12 PM IST
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राबर्ट्सगंज संसदीय क्षेत्र के सांसद छोटेलाल खरवार ने सोमवार को बनवासी सेवा आश्रम में पर्यावरण प्रदूषण के मुद्दे पर विचार-विमर्श किया। आश्रम के अध्यक्ष अजय शेखर और मंत्री शुभा प्रेम से क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं की जानकारी ली।
सांसद ने कहा है कि सिंगरौली परिक्षेत्र में प्रदूषण की समस्या गंभीर हो चुकी है और इस पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। प्रदूषण जनित बीमारियों की जांच के लिए टेक्सोलॉजिकल लैब और इलाज के लिए अलग से अस्पताल की स्थापना हरहाल में होगी, और इस समस्या से मुख्यमंत्री तथा शासन के अधिकारियों को अवगत कराएंगे। सांसद को बताया गया कि वन और पर्यावरण मंत्रालय से जारी हुए आदेशों और नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इससे हवा, पानी दूषित हो गया है और लोग कैंसर, चर्म रोग, बाँझपन,दमा, पागलपन, सांस की बीमारी से जूझ रहे हैं।
दीपक सिंह ने बताया कि प्रदूषण का असर ग्रामीण अंचलों में भी पड़ रहा है और जांच में तालाब, नदी और कुओ में मरकरी आर्सेनिक, फ्लोराईड की मात्रा मानक से चार गुना ज्यादे पाई जा रही है।ओबरा के रेणुका नदी और रिहंद जलाशय के बेलवादह, खड़िया में उद्योगो की राख से नदी और जलाशय पट रहा है। सांसद को सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी ज्ञापन भी सौंपा। इसमें क्षेत्र में स्वतंत्र एजेंसी से कैरिंग कपैसिटी का अध्ययन के बाद ही क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना की मांग रखी गई। अजय शेखर ने कहा कि जो भी समस्या उत्पन्न हुई है वह उद्योगो के अधिकारियों कर्मचारियों के लापरवाही और अनदेखी के कारण हुई है। ऐसे लोगो को चिन्हित कर सरकार को उनके खिलाफ दंडात्मक कार्यवाई सरनी चाहिए।
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इस मौके पर सोनाबच्चा अग्रहरी, दीपक सिंह,सुजीत सिंह, रामनवल मौर्या, अयोध्या प्रसाद, विमल सिंह, देवनाथ सिंह आदि मौजूद रहे।
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सांसद ने कहा है कि सिंगरौली परिक्षेत्र में प्रदूषण की समस्या गंभीर हो चुकी है और इस पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। प्रदूषण जनित बीमारियों की जांच के लिए टेक्सोलॉजिकल लैब और इलाज के लिए अलग से अस्पताल की स्थापना हरहाल में होगी, और इस समस्या से मुख्यमंत्री तथा शासन के अधिकारियों को अवगत कराएंगे। सांसद को बताया गया कि वन और पर्यावरण मंत्रालय से जारी हुए आदेशों और नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इससे हवा, पानी दूषित हो गया है और लोग कैंसर, चर्म रोग, बाँझपन,दमा, पागलपन, सांस की बीमारी से जूझ रहे हैं।
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दीपक सिंह ने बताया कि प्रदूषण का असर ग्रामीण अंचलों में भी पड़ रहा है और जांच में तालाब, नदी और कुओ में मरकरी आर्सेनिक, फ्लोराईड की मात्रा मानक से चार गुना ज्यादे पाई जा रही है।ओबरा के रेणुका नदी और रिहंद जलाशय के बेलवादह, खड़िया में उद्योगो की राख से नदी और जलाशय पट रहा है। सांसद को सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी ज्ञापन भी सौंपा। इसमें क्षेत्र में स्वतंत्र एजेंसी से कैरिंग कपैसिटी का अध्ययन के बाद ही क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना की मांग रखी गई। अजय शेखर ने कहा कि जो भी समस्या उत्पन्न हुई है वह उद्योगो के अधिकारियों कर्मचारियों के लापरवाही और अनदेखी के कारण हुई है। ऐसे लोगो को चिन्हित कर सरकार को उनके खिलाफ दंडात्मक कार्यवाई सरनी चाहिए।
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इस मौके पर सोनाबच्चा अग्रहरी, दीपक सिंह,सुजीत सिंह, रामनवल मौर्या, अयोध्या प्रसाद, विमल सिंह, देवनाथ सिंह आदि मौजूद रहे।