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40 गांवों में पेयजल आपूर्ति ठप

Wed, 13 Jul 2016 11:55 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ सोनभद्र
ब्यूरो, अमर उजाला/ सोनभद्र Updated Wed, 13 Jul 2016 11:55 PM IST
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40 villages drinking water supplies drying up
पटियाला के गांव राजगढ़ के पास पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन करतीं नर्सें। - फोटो : अमर उजाला
जल निगम की लापरवाही का खामियाजा बढा़ैली-कुसाही पेयजल परियोजना से जुड़े 40 गांवों के लोग भुगत रहे हैं। जगह- जगह पाइप लाइन के टूटने से पेयजल आपूर्ति ठप हो गई है। जानकारी के बावजूद संबंधित पाइप की मरम्मत नहीं करवा रहे हैं।
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बढा़ैली-कुसाही पेयजल परियोजना से राबर्ट्सगंज ब्लॉक के बढ़ौली, गोरारी, गोरडीहा, कैथी, बरैला, बरकरा, जैत, मानपुर, पवर आदि 115 गांवों में पानी आपूर्ति करने के लिए पाइप लाइन बिछाई गई है। जल निगम के कर्मचारियों की लापरवाही से अधिकांश गांवों में अभी तक टोटी ही नहीं लगी है।
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कई जगहों पर पाइप टूटने से कम्हारी, बभनौली, तियरा, गुरु परासी, बरकरा समेत करीब 40 गांवों में पेयजलापूर्ति ठप है। संजय सिंह, विनित, प्रमोद विश्वकर्मा, गुड्डू समेत अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि जल निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से ग्रामीणों को शुद्ध पानी मुहैया नहीं रहा है। जबकि कई बार पानी की आपूर्ति न होने की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की जा चुकी है।
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वहीं जल निगम के अधिशासी अभियंता राकेश कुमार बंसल का कहना है कि परियोजना से जुड़े सभी गांवों मेें पानी की आपूर्ति करने की हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। अगर कहीं पाइप टूटी होगी तो तत्काल मरम्मत करवा कर पेयजलापूर्ति कराई जाएगी।

भरी बरसात, चुआड़ से बुझ रही प्यास

 मानसून की मेहरबानी के बावजूद लोगों को पेयजल संकट से निजात नहीं मिली है। जिला मुख्यालय से सटे लोढ़ी ग्राम पंचायत में पालीटेक्निक कालेज के आसपास की बस्तियों के लोग अब भी चुआड़ के गंदे पानी से ही प्यास बुझाने को विवश हैं। भीषण गर्मी में जिले के तमाम इलाकों का जलस्तर नीचे चला गया था। कुएं और जलस्रोत सूख गए  थे। इससे लोग बूंद-बूंद पानी के लिए विवश हो गए थे।

समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत ने टैंकर से गांवों में पानी की आपूर्ति करनी शुरू की  थी तब जाकर राहत मिली। बारिश के बाद लोगों को पेयजल संकट से निजात मिलने की उम्मीद जगी लेकिन अभी जलस्तर जरा भी नहीं बढ़ा है। तमाम इलाकों में लोगों के हैंडपंपों में पानी नहीं आया। लोग अब भी टैँकर के पानी के सहारे है। जिला मुख्यालय पर स्थित पालीटेक्निक कालेज के पास खरवार और घसिया बस्ती है।


इन बस्तियों के लोग कालेज के पास ही स्थित चुआड़ के पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं। इसी पानी से कपड़ा धोने से लेकर नहाने का काम भी होता है। यहां की शिवानी, लोली, रीना, शीला, मनीता का कहना था कि गर्मी हो या बरसात का महीना चुआड़ ही उनका सहारा है। यहां से पानी डिब्बों में भरकर वे घर ले जाती हैं। आसपास में जो भी हैंडपंप लगे हैं वे काम नहीं कर रहे हैं। इससे परेशानी हो रही है।
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