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सीएचसी और पीएचसी को बनाया जाएगा मॉडल
Updated Wed, 14 Mar 2018 10:51 PM IST
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जननी सुरक्षा योजना के तहत जिले के छह सीएचसी और तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मॉडल के रूप में बनाया जाएगा। इन अस्पतालों में महिलाओं के प्रसव को लेकर खास इंतजाम किए जाएंगे। जिसका मकसद सुरक्षित प्रसव कराया जाना है। शासन ने सीएमओ को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिया है।
जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोरावल, वैनी, दुद्धी, बभनी, चोपन, म्योरपुर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केकराही, मधुपुर, कोन और 103 उपकेंदों पर प्रति माह करीब दो हजार प्रसव होता है। लेकिन किसी सीएचसी, पीएचसी, उपकेंद्रों पर प्रसव कराने की समुचित व्यवस्था नहीं है। इस नाते स्वास्थ्यकर्मी गंभीर गर्भवती महिलाओं को जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं। यहां से जिला अस्पताल पहुंचते-पहुंचते महिलाओं की हालत और भी बिगड़ जाती है। प्रसव कराने के दौरान कई महिलाएं दम तक तोड़ देती हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार ने सीएमओ को समस्त सीएचसी एवं पीएचसी में सुरक्षित प्रसव कराने की समुचित व्यवस्था कराने का निर्देश दिया है। ताकि महिलाओं को जिला अस्पताल न जाना पड़े। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि समस्त सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केेंद्रों में मॉडल कक्ष बनाया जाएगा। इसमें प्रसव कराने की समुचित व्यवस्था होगी। स्वास्थ्य कर्मियों को गंभीर गर्भवती महिलाओं का भी प्रसव कराने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोरावल, वैनी, दुद्धी, बभनी, चोपन, म्योरपुर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केकराही, मधुपुर, कोन और 103 उपकेंदों पर प्रति माह करीब दो हजार प्रसव होता है। लेकिन किसी सीएचसी, पीएचसी, उपकेंद्रों पर प्रसव कराने की समुचित व्यवस्था नहीं है। इस नाते स्वास्थ्यकर्मी गंभीर गर्भवती महिलाओं को जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं। यहां से जिला अस्पताल पहुंचते-पहुंचते महिलाओं की हालत और भी बिगड़ जाती है। प्रसव कराने के दौरान कई महिलाएं दम तक तोड़ देती हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार ने सीएमओ को समस्त सीएचसी एवं पीएचसी में सुरक्षित प्रसव कराने की समुचित व्यवस्था कराने का निर्देश दिया है। ताकि महिलाओं को जिला अस्पताल न जाना पड़े। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी सिंह ने कहा कि समस्त सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केेंद्रों में मॉडल कक्ष बनाया जाएगा। इसमें प्रसव कराने की समुचित व्यवस्था होगी। स्वास्थ्य कर्मियों को गंभीर गर्भवती महिलाओं का भी प्रसव कराने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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