{"_id":"593991f74f1c1b04258b4590","slug":"171496945143-sonebhadra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लैंको पर ट्रांजिट शुल्क का 16 करोड़ हुआ बकाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लैंको पर ट्रांजिट शुल्क का 16 करोड़ हुआ बकाया
Updated Thu, 08 Jun 2017 11:35 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अनपरा। आर्थिक संकट के चलते कई दिनों तक कोयले की उपलब्धता से जूझने वाली लैंको परियोजना पर अब ट्रांजिट शुल्क (वन विभाग द्वारा लिया जाने वाला शुल्क) का बोझ बढ़ने लगा है। पांच माह से इस शुल्क की अदायगी न होने से, इसके एवज में बकाए की रकम बढ़कर लगभग 16 करोड़ पहुंच गई है। अब वन विभाग भी इसको लेकर एतराज जताने लगा है।
बारह सौ मेगावाट वाली लैंको को रोजाना 18 हजार मीट्रिक टन कोयले की जरूरत है। यूपी स्थित कोयला खदानों से लिए जाने वाले कोयले पर, कोयले के वास्तविक मूल्य का 15 प्रतिशत ट्रांजिट (अभिवहन) शुल्क के रूप में और मध्यप्रदेश सीमा में स्थित कोयला खदानों से लाए जाने वाले कोयले पर 75 रुपये प्रति घनमीटर ट्रांजिट शुल्क अदा करना पड़ता है। टैरिफ दरों में कमी के कारण जनवरी से ही लैंको को आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है। इसके चलते मार्च माह में जहां कोयला उत्पादन घटाना पड़ा था। वहीं मई में एक इकाई कई दिनों तक बंद रखनी पड़ी थी। भुगतान के मिलने के बाद तीन जून से दोनों इकाइयों से उत्पादन लिया जा रहा है लेकिन अब ट्रांजिट शुल्क का चक्कर मुसीबत बनने लगा है। बता दें कि लैंको की पूरी बिजली प्रदेश को मिलती है। इसके एवज में राज्य सरकार और लैंको के बीच करार है कि कोयला पर होने वाले व्यय को राज्य सरकार वहन करेगी। लेकिन जनवरी के बाद से पावर कारपोरेशन की तरफ से गड़बड़ाई भुगतान की स्थिति ने संकट की स्थिति उत्पन्न कर दी है। परियोजना के पास कोयले का ज्यादा स्टाक भी नहीं है।
वन क्षेत्राधिकारी अनपरा दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि लैंको परियोजना प्रबंधन से बकाए ट्रांजिट शुल्क को जल्द जमा करने के लिए कहा जा चुका है। बकाए की अदायगी न होने पर कोयला आपूर्ति रोकने का निर्णय लिया जा सकता है।
विज्ञापन
उधर लैंको के यूनिट हेड संदीप गोस्वामी कहा कहना है कि कोयला और इससे जुड़े मद के लिए भुगतान राज्य सरकार देती है। भुगतान मिलने में देर हो रही है। जैसे ही भुगतान आता है, ट्रांजिट का भुगतान कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
बारह सौ मेगावाट वाली लैंको को रोजाना 18 हजार मीट्रिक टन कोयले की जरूरत है। यूपी स्थित कोयला खदानों से लिए जाने वाले कोयले पर, कोयले के वास्तविक मूल्य का 15 प्रतिशत ट्रांजिट (अभिवहन) शुल्क के रूप में और मध्यप्रदेश सीमा में स्थित कोयला खदानों से लाए जाने वाले कोयले पर 75 रुपये प्रति घनमीटर ट्रांजिट शुल्क अदा करना पड़ता है। टैरिफ दरों में कमी के कारण जनवरी से ही लैंको को आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है। इसके चलते मार्च माह में जहां कोयला उत्पादन घटाना पड़ा था। वहीं मई में एक इकाई कई दिनों तक बंद रखनी पड़ी थी। भुगतान के मिलने के बाद तीन जून से दोनों इकाइयों से उत्पादन लिया जा रहा है लेकिन अब ट्रांजिट शुल्क का चक्कर मुसीबत बनने लगा है। बता दें कि लैंको की पूरी बिजली प्रदेश को मिलती है। इसके एवज में राज्य सरकार और लैंको के बीच करार है कि कोयला पर होने वाले व्यय को राज्य सरकार वहन करेगी। लेकिन जनवरी के बाद से पावर कारपोरेशन की तरफ से गड़बड़ाई भुगतान की स्थिति ने संकट की स्थिति उत्पन्न कर दी है। परियोजना के पास कोयले का ज्यादा स्टाक भी नहीं है।
विज्ञापन
वन क्षेत्राधिकारी अनपरा दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि लैंको परियोजना प्रबंधन से बकाए ट्रांजिट शुल्क को जल्द जमा करने के लिए कहा जा चुका है। बकाए की अदायगी न होने पर कोयला आपूर्ति रोकने का निर्णय लिया जा सकता है।
विज्ञापन
उधर लैंको के यूनिट हेड संदीप गोस्वामी कहा कहना है कि कोयला और इससे जुड़े मद के लिए भुगतान राज्य सरकार देती है। भुगतान मिलने में देर हो रही है। जैसे ही भुगतान आता है, ट्रांजिट का भुगतान कर दिया जाएगा।