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कोयले की कमी से जूझ रही लैंको परियोजना
Updated Sun, 05 Aug 2018 11:12 PM IST
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अनपरा। 1200 मेगावाट की लैंको सी परियोजना में कोयले की किल्लत शुरू हो गई है। इसके कारण दोनों यूनिटों को कम लोड पर चलाया जा रहा है । जल्द ही कोयले की किल्लत को दूर नहीं किया गया तो दोनों यूनिटों को बंद भी करना पड़ सकता है।
सूत्रों की मानें तो बरसात व भुगतान न होने के कारण लैकों को पर्याप्त कोयला नहीं मिल रहा है । जिसके कारण यूनिटों को पूरी क्षमता से चलाना संभव नहीं हो रहा। लैंको परियोजना कोयले के स्टाक के मामले में पूर्व से ही सुपर क्रिटिकल जोन में चल रही है । ऐसे में परियोजना का उत्पादन कम करने के अलावा प्रबंधन के पास कोई विकल्प नहीं बचा है। प्रबंधन की मानें तो बरसात के मद्देनजर कोयले की किल्लत को देखते हुए लोड को कम कर दिया गया है। पैसे की दिक्कत के कारण समस्या और भी गहरा गई है। कोयला उत्पादन कंपनियों से कोयला मिलना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में यूनिटों को चलाना चुनौती पूर्ण है।
मानसून से पूर्व निगम के अधिकारियों ने कोयले के स्टाक को लेकर तमाम दावे किए थे लेकिन उनका दावा खोखला साबित हुआ है। प्रदेश की कई सरकारी परियोजनाएं भी कोयले की कमी झेल रहीं है। इससे पहले हरदुआगंज और पारीछा की परियोजनाएं भी कोयले की कमी के कारण बंद कराई जा चुकी हैं। अब अनपरा सी पर कोयले की किल्लत दिख रही है। लैंको को यूपीपीसीएल और एनसीएल की तरफ से कोयला उपलब्ध कराया जाता है। लैंको प्रबंधन के पास एनसीएल को पेमेंट करने के लिए बैंकिंग संबंधी दिक्कत आ रही है। जिससे एनसीएल से कोयला मिलना बंद हो गया है। लैंको प्रबंधन का कहना है कि बैंक संबंधी दिक्कतों के कारण एनसीएल को पेमेंट नहीं हो सका है। जिस कारण पिछले काफी समय से लैंको को कोयला नहीं मिला है। यदि एक या दो दिनों में लैंको को कोयले की सप्लाई नहीं हुई तो इकाईयों से उत्पादन ठप करना पड़ सकता है।
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बोले अधिकारी...
लैंको के यूनिट हेड संदीप गोस्वामी का कहना है कि कोयले की कमी के कारण उत्पादन कम कर दिया गया है। कुछ बैंकिंग दिक्कतों के कारण फंड ट्रांसफर नहीं हो रहा है। कोयले की दिक्कत के बारे में यूपीपीसीएल को जानकारी दे दी गई है।बिजली की मांग को देखते हुए उम्मीद है कि यूपीपीसीएल कोयले का प्रबंध कराएगा। अगर कोयले का प्रबंध नहीं होता है तो परियोजना से उत्पादन बंद करना पड़ेगा।
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सूत्रों की मानें तो बरसात व भुगतान न होने के कारण लैकों को पर्याप्त कोयला नहीं मिल रहा है । जिसके कारण यूनिटों को पूरी क्षमता से चलाना संभव नहीं हो रहा। लैंको परियोजना कोयले के स्टाक के मामले में पूर्व से ही सुपर क्रिटिकल जोन में चल रही है । ऐसे में परियोजना का उत्पादन कम करने के अलावा प्रबंधन के पास कोई विकल्प नहीं बचा है। प्रबंधन की मानें तो बरसात के मद्देनजर कोयले की किल्लत को देखते हुए लोड को कम कर दिया गया है। पैसे की दिक्कत के कारण समस्या और भी गहरा गई है। कोयला उत्पादन कंपनियों से कोयला मिलना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में यूनिटों को चलाना चुनौती पूर्ण है।
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मानसून से पूर्व निगम के अधिकारियों ने कोयले के स्टाक को लेकर तमाम दावे किए थे लेकिन उनका दावा खोखला साबित हुआ है। प्रदेश की कई सरकारी परियोजनाएं भी कोयले की कमी झेल रहीं है। इससे पहले हरदुआगंज और पारीछा की परियोजनाएं भी कोयले की कमी के कारण बंद कराई जा चुकी हैं। अब अनपरा सी पर कोयले की किल्लत दिख रही है। लैंको को यूपीपीसीएल और एनसीएल की तरफ से कोयला उपलब्ध कराया जाता है। लैंको प्रबंधन के पास एनसीएल को पेमेंट करने के लिए बैंकिंग संबंधी दिक्कत आ रही है। जिससे एनसीएल से कोयला मिलना बंद हो गया है। लैंको प्रबंधन का कहना है कि बैंक संबंधी दिक्कतों के कारण एनसीएल को पेमेंट नहीं हो सका है। जिस कारण पिछले काफी समय से लैंको को कोयला नहीं मिला है। यदि एक या दो दिनों में लैंको को कोयले की सप्लाई नहीं हुई तो इकाईयों से उत्पादन ठप करना पड़ सकता है।
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बोले अधिकारी...
लैंको के यूनिट हेड संदीप गोस्वामी का कहना है कि कोयले की कमी के कारण उत्पादन कम कर दिया गया है। कुछ बैंकिंग दिक्कतों के कारण फंड ट्रांसफर नहीं हो रहा है। कोयले की दिक्कत के बारे में यूपीपीसीएल को जानकारी दे दी गई है।बिजली की मांग को देखते हुए उम्मीद है कि यूपीपीसीएल कोयले का प्रबंध कराएगा। अगर कोयले का प्रबंध नहीं होता है तो परियोजना से उत्पादन बंद करना पड़ेगा।