{"_id":"5ac3c5544f1c1bcb618b52b2","slug":"161522779476-sonebhadra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आधी भी नहीं खर्च हुई विकास की राशि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आधी भी नहीं खर्च हुई विकास की राशि
Updated Tue, 03 Apr 2018 11:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शक्तिनगर। एनसीएल सीएसआर को क्षेत्रीय विकास के लिए जारी 70 करोड़ रुपये का वित्तीय साल के समाप्ति तक आधा भी नहीं खर्च हुआ है। यह स्थिति तब है जब सोनभद्र और सिंगरौली (मप्र) के सीमांचल इलाकों में पेयजल, शिक्षा, चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।
सरकार की एक योजना के मुताबिक सार्वजनिक उपक्रमों के कुल सालाना कमाई के हिसाब से दो प्रतिशत सीएसआर फंड जनरेट होता है। इस राशि का खर्च सामाजिक दायित्वों को पूरा करने के लिए किया जाता है। साल 2017-18 के लिए एनसीएल ने सीएसआर फंड में 70 करोड़ रुपये दिए। लेकिन वित्तीय वर्ष के समाप्ति तक करीब 35 करोड़ ही खर्च हो सके। प्रदूषण व पेयजल सहित कई जरूरी सुविधाओं से इलाके के लोग दूर हैं। प्रदूषण की वजह से बीमारियों के इलाज के लिए क्षेत्र में कोई चिकित्सा सेवा अभी तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। यह अलग बात है कि कोल प्रबंधन नैगम सामाजिक दायित्व (सीएसआर) मद से छोटे-बड़े कई कार्य करा चुका है। एविडेंस (एनजीओ) के जनरल सेक्रेटरी कुमार अविनाश कहते हैं कि प्रदूषण के मामले में रेड जोन में आ चुके क्षेत्र को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) कोयला क्षेत्र के पर्यावरण संबंधी प्रबंध पर कड़ी आपत्ति जता चुका है। ऐसे में फंड रहते हुए प्रदूषण को रोकने एवं इससे पैदा बीमारियों के इलाज के लिए पहल नहीं किया जाना बेहद चिंता की बात है। कहा कि क्षेत्र में आबाद कोयला एवं थर्मल पावर प्रबंधन समेत अन्य उद्योग सीएसआर मद को सलीके से खर्च कर दे तो क्षेत्र की तस्वीर अलग होगी।
विज्ञापन
सरकार की एक योजना के मुताबिक सार्वजनिक उपक्रमों के कुल सालाना कमाई के हिसाब से दो प्रतिशत सीएसआर फंड जनरेट होता है। इस राशि का खर्च सामाजिक दायित्वों को पूरा करने के लिए किया जाता है। साल 2017-18 के लिए एनसीएल ने सीएसआर फंड में 70 करोड़ रुपये दिए। लेकिन वित्तीय वर्ष के समाप्ति तक करीब 35 करोड़ ही खर्च हो सके। प्रदूषण व पेयजल सहित कई जरूरी सुविधाओं से इलाके के लोग दूर हैं। प्रदूषण की वजह से बीमारियों के इलाज के लिए क्षेत्र में कोई चिकित्सा सेवा अभी तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। यह अलग बात है कि कोल प्रबंधन नैगम सामाजिक दायित्व (सीएसआर) मद से छोटे-बड़े कई कार्य करा चुका है। एविडेंस (एनजीओ) के जनरल सेक्रेटरी कुमार अविनाश कहते हैं कि प्रदूषण के मामले में रेड जोन में आ चुके क्षेत्र को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) कोयला क्षेत्र के पर्यावरण संबंधी प्रबंध पर कड़ी आपत्ति जता चुका है। ऐसे में फंड रहते हुए प्रदूषण को रोकने एवं इससे पैदा बीमारियों के इलाज के लिए पहल नहीं किया जाना बेहद चिंता की बात है। कहा कि क्षेत्र में आबाद कोयला एवं थर्मल पावर प्रबंधन समेत अन्य उद्योग सीएसआर मद को सलीके से खर्च कर दे तो क्षेत्र की तस्वीर अलग होगी।
विज्ञापन