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अब गांव-गांव जल संरक्षण शुरू हुई मुहिम
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सोनभद्र। मानसून में देरी एवं सूखे की संभावना के बीच प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जल संरक्षण को लेकर गंभीर हैं। निर्देशों के अनुक्रम में जल संरक्षण की मुहिम को जनांदोलन का रूप दिया जाएगा। गांवों में बैठक आयोजित कर पीएम के संदेश से अवगत कराया जाने लगा है।। तालाबों के निर्माण एवं सफाई पौधरोपण, रेनवाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर का निर्माण, जागरूकता अभियान, नुक्कड़ नाटक, लोकगीत, वाल पेंटिग के जरिए जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। इसकी मानिटरिंग की जिम्मेदारी सभी एडीओ पंचायतों को सौंपी गई है।
बताते चले कि जिले के अधिकांश क्षेत्रफल जंगलों और पहाड़ों से आच्छादित है। इस नाते यहां मार्च माह में ही पहाड़ी क्षेत्रों में जल का संकट उत्पन्न हो जाता है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने 5521 तालाब, बंधी, बाऊली आदि का कार्य प्रारंभ कराया गया है। इसमें बड़े तालाब 457, खेत/बड़े तालाब 1601, बाउली 1196, बंधी 380 और सोख्ता गड्ढा 1887 शामिल है। इसके अलावा जिले में 5000 टांका का निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें 4त269 टांकों का निर्माण हेतु स्थान का चयन किया गया है। शेष स्थल का चयन सप्ताह भर में कर दिया जाएगा। जल संचयन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ग्राम पंचायतों के माध्यम से नुक्कड़ नाटक, लोकगीत का कार्यक्रम कराया जा रहा है। इसके अलावा सार्वजनिक स्थलों, विकास खंड मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, जिला मुख्यालय पर जल संरक्षण एवं पानी की उचित प्रबंधन से संबंधित वॉल पेंटिंग कराई जा रही है। जिला पंचायत राज अधिकारी आरके भारती ने कहा कि नुक्कड़ नाटक, लोकगीत, नृत्य प्रदर्शन के माध्यम से वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
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बताते चले कि जिले के अधिकांश क्षेत्रफल जंगलों और पहाड़ों से आच्छादित है। इस नाते यहां मार्च माह में ही पहाड़ी क्षेत्रों में जल का संकट उत्पन्न हो जाता है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने 5521 तालाब, बंधी, बाऊली आदि का कार्य प्रारंभ कराया गया है। इसमें बड़े तालाब 457, खेत/बड़े तालाब 1601, बाउली 1196, बंधी 380 और सोख्ता गड्ढा 1887 शामिल है। इसके अलावा जिले में 5000 टांका का निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें 4त269 टांकों का निर्माण हेतु स्थान का चयन किया गया है। शेष स्थल का चयन सप्ताह भर में कर दिया जाएगा। जल संचयन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ग्राम पंचायतों के माध्यम से नुक्कड़ नाटक, लोकगीत का कार्यक्रम कराया जा रहा है। इसके अलावा सार्वजनिक स्थलों, विकास खंड मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, जिला मुख्यालय पर जल संरक्षण एवं पानी की उचित प्रबंधन से संबंधित वॉल पेंटिंग कराई जा रही है। जिला पंचायत राज अधिकारी आरके भारती ने कहा कि नुक्कड़ नाटक, लोकगीत, नृत्य प्रदर्शन के माध्यम से वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
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