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Sonebhadra News: मंडल की 15 फर्में रडार पर, नशीले कफ सिरप की आपूर्ति में आया नाम
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सोनभद्र। नशीले कफ सिरप की तस्करी में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। औषधि नियंत्रण विभाग की जांच के दायरे में सोनभद्र की तीन और फर्में आई हैं। भदोही और मिर्जापुर में भी कई फर्में रडार पर हैं। तीनों जिलों में फिलहाल 15 फर्माें की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। सोनभद्र में एक और भदोही में दो एफआईआर कराई गई है। सोनभद्र सहित तीनों जनपदों में जल्द ही कुछ और प्राथमिकी दर्ज कराई जा सकती हैं।
18 अक्टूबर की रात राॅबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के इको प्वाइंट के पास से नशीले कफ सिरप लदे दो कंटेनर पकड़े जाने के बाद से तस्करी का मामला गरमाया हुआ है। पूर्वांचल में कफ सिरप तस्करी के केंद्र वाराणसी में जहां अब तक 40 फर्मों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। वहीं, विंध्याचल मंडल के भदोही में छह फर्मों के संचालक तस्करी में संलिप्त मिले हैं। एक-दो और फर्मों की भूमिका जांच के दायरे में है।
सोनभद्र में दो फर्माें पर तीन दिन पहले प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। तीन अन्य फर्मों के भूमिका की जांच की जा रही है। मिर्जापुर में भी तीन से चार फर्मों की भूमिका संदिग्ध मानते हुए जांच की जा रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक सोनभद्र, मिर्जापुर और भदोही की फर्मों के नाम पर 15 लाख शीशी कफ सिरप की तस्करी की गई है।
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हर जिले में चार से सात लाख शीशी कफ सिरप की दिखाई गई आपूर्ति
सूत्र बताते हैं कि महज दो साल में 200 करोड़ से ज्यादा का साम्राज्य खड़ा करने वाले कफ सिरप तस्करों के सिंडीकेट ने सबसे ज्यादा फर्जी आपूर्ति पूर्वांचल में दिखाई। ज्यादातर जनपदों में चार से सात लाख शीशी कफ सिरप की फर्जी आपूर्ति दिखाकर करोड़ों का खेल किया गया। किसी भी फुटकर दवा विक्रेता को थोक में सिरप नहीं दिया जा सकता, लेकिन उनके नाम पर भी थोक आपूर्ति के बिल काटे गए हैं।
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कई फर्मों के बैनर-बोर्ड गायब, जांच में हो रही दिक्कत
तस्करी से जुड़ी फर्मों पर कार्रवाई के लिए पुलिस के साथ औषधि नियंत्रण विभाग की टीमें भी सक्रिय हो गई हैं। वहीं, इससे जुड़ी फर्मों के संचालक दर्शाए गए पते से बैनर-बोर्ड हटाकर गायब हो गए हैं। इसके चलते, जिन फर्मों के थोक आपूर्ति के विवरण मिल रहे हैं, उनकी जांच में दिक्कत आ रही है। फर्म के पंजीकरण में जो पता दर्शाया गया है, उस पते पर दुकान और संचालक को ढूंढ़ना मुश्किल साबित हो रहा है।
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वर्जन::
जिन फर्मों की भूमिका संदिग्ध पाई जा रही है, उनकी जांच कराई जा रही है। सोनभद्र-भदोही में प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। मिर्जापुर में जांच आखिरी चरण में है। सोनभद्र में दो-तीन और फर्मों की स्थिति संदिग्ध मिली है। जांच की जा रही है। जल्द ही कार्रवाई होगी। - मुकेश पालीवाल, असिस्टेंट कमिश्नर (ड्रग)
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18 अक्टूबर की रात राॅबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के इको प्वाइंट के पास से नशीले कफ सिरप लदे दो कंटेनर पकड़े जाने के बाद से तस्करी का मामला गरमाया हुआ है। पूर्वांचल में कफ सिरप तस्करी के केंद्र वाराणसी में जहां अब तक 40 फर्मों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। वहीं, विंध्याचल मंडल के भदोही में छह फर्मों के संचालक तस्करी में संलिप्त मिले हैं। एक-दो और फर्मों की भूमिका जांच के दायरे में है।
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सोनभद्र में दो फर्माें पर तीन दिन पहले प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। तीन अन्य फर्मों के भूमिका की जांच की जा रही है। मिर्जापुर में भी तीन से चार फर्मों की भूमिका संदिग्ध मानते हुए जांच की जा रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक सोनभद्र, मिर्जापुर और भदोही की फर्मों के नाम पर 15 लाख शीशी कफ सिरप की तस्करी की गई है।
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हर जिले में चार से सात लाख शीशी कफ सिरप की दिखाई गई आपूर्ति
सूत्र बताते हैं कि महज दो साल में 200 करोड़ से ज्यादा का साम्राज्य खड़ा करने वाले कफ सिरप तस्करों के सिंडीकेट ने सबसे ज्यादा फर्जी आपूर्ति पूर्वांचल में दिखाई। ज्यादातर जनपदों में चार से सात लाख शीशी कफ सिरप की फर्जी आपूर्ति दिखाकर करोड़ों का खेल किया गया। किसी भी फुटकर दवा विक्रेता को थोक में सिरप नहीं दिया जा सकता, लेकिन उनके नाम पर भी थोक आपूर्ति के बिल काटे गए हैं।
कई फर्मों के बैनर-बोर्ड गायब, जांच में हो रही दिक्कत
तस्करी से जुड़ी फर्मों पर कार्रवाई के लिए पुलिस के साथ औषधि नियंत्रण विभाग की टीमें भी सक्रिय हो गई हैं। वहीं, इससे जुड़ी फर्मों के संचालक दर्शाए गए पते से बैनर-बोर्ड हटाकर गायब हो गए हैं। इसके चलते, जिन फर्मों के थोक आपूर्ति के विवरण मिल रहे हैं, उनकी जांच में दिक्कत आ रही है। फर्म के पंजीकरण में जो पता दर्शाया गया है, उस पते पर दुकान और संचालक को ढूंढ़ना मुश्किल साबित हो रहा है।
वर्जन::
जिन फर्मों की भूमिका संदिग्ध पाई जा रही है, उनकी जांच कराई जा रही है। सोनभद्र-भदोही में प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। मिर्जापुर में जांच आखिरी चरण में है। सोनभद्र में दो-तीन और फर्मों की स्थिति संदिग्ध मिली है। जांच की जा रही है। जल्द ही कार्रवाई होगी। - मुकेश पालीवाल, असिस्टेंट कमिश्नर (ड्रग)