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एक हजार में दम नहीं, दस हजार से कम नहीं
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सोनभद्र। मानदेय बढ़ाने समेत अन्य मांगों को लेकर बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में रसोइयों ने धरना दिया। कहा कि प्रत्येक माह मिलने वाले एक हजार मानदेय में दम नहीं, दस हजार से कम नहीं। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांगपत्र भेजा।
वक्ताओं ने कहा कि पिछले करीब 15 वर्षों से परिषदीय प्राथमिक/उच्च प्राथमिक स्कूलों में लगातार रसोइयां कार्य करते चले आ रहे हैं। कभी-कभी गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने पर लकड़ी के चूल्हे पर भी भोजन बनाते हैं। इसके एवज में एक हजार रुपये प्रतिमाह रसोइयों को मानदेय दिया जा रहा है। कार्य के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना होन पर कोई सुरक्षानिधि/दुर्घटना बीमा निर्धारित नहीं है। इससे रसोइयों और उनके आश्रितों का भविष्य असुरक्षित है। कहा कि पिछले कई सालों से रसोइयां प्रधानों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के माध्यम से शासन को मानदेय कम से कम दस हजार रुपये प्रतिमाह करने के लिए मांगपत्र भेज रहे है। लेकिन अभी तक मांगों के अनुसार मानदेय नहीं बढ़ाया गया है। दिलीप कुमार पांडेय, लीला, सेमाइन, फूलमती, ममता, देवंती देवी, सुभावती, किसमतिया, बिमला देवी, लीलावती, सुनीता, मानमती, शकुंतला देवी, सुशीला, दुर्गावती आदि मौजूद रहे।
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वक्ताओं ने कहा कि पिछले करीब 15 वर्षों से परिषदीय प्राथमिक/उच्च प्राथमिक स्कूलों में लगातार रसोइयां कार्य करते चले आ रहे हैं। कभी-कभी गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने पर लकड़ी के चूल्हे पर भी भोजन बनाते हैं। इसके एवज में एक हजार रुपये प्रतिमाह रसोइयों को मानदेय दिया जा रहा है। कार्य के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना होन पर कोई सुरक्षानिधि/दुर्घटना बीमा निर्धारित नहीं है। इससे रसोइयों और उनके आश्रितों का भविष्य असुरक्षित है। कहा कि पिछले कई सालों से रसोइयां प्रधानों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के माध्यम से शासन को मानदेय कम से कम दस हजार रुपये प्रतिमाह करने के लिए मांगपत्र भेज रहे है। लेकिन अभी तक मांगों के अनुसार मानदेय नहीं बढ़ाया गया है। दिलीप कुमार पांडेय, लीला, सेमाइन, फूलमती, ममता, देवंती देवी, सुभावती, किसमतिया, बिमला देवी, लीलावती, सुनीता, मानमती, शकुंतला देवी, सुशीला, दुर्गावती आदि मौजूद रहे।
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