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र्जर तेलगुड़वा मार्ग विकास कार्यों की खोल रहा पोल
Updated Sat, 10 Mar 2018 12:04 AM IST
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सोनभद्र। योगी सरकार के विकास कार्यो की पोल क्षतिग्रस्त कोन-तेलगुड़वा मार्ग खोल रहा है। जगह-जगह गड्ढे में तब्दील सड़क पर गिरकर आएदिन लोग चुटहिल हो रहे हैं। बावजूद इसके सांसद, क्षेत्रीय विधायक समेत आलाधिकारी सड़क मरम्मत कराने को लेकर गंभीर नहीं हैं।
वर्ष 2010-11 में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से तेलगुड़वा-कोन सड़क का निर्माण कार्य कराया गया था। वर्ष 2012 में सूबे मेें सपा की सरकार बनते ही इस मार्ग से ओवरलोड बालू लदे ट्रकों का परिवहन शुरू हो गया। ओवरलोड वाहनों के संचालन से कनहर नदी से तेलगुड़वा तक जगह-जगी सड़क गड्ढे में तब्दील हो गई। कई बार कोटा के ग्रामीणों ने टूटी सड़कों की मरम्मत कराने की मांग को लेकर आंदोलन किया। लेकिन हर बाद अधिकारी अविलंब सड़क की मरम्मत कराने का आश्वासन देकर उन्हें शांत करा दिया। फरवरी 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने दो माह के भीतर सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का ऐलान किया तो तेलगुड़वा-कोन मार्ग के बनने की उम्मीद जगी। लेकिन सीएम के आदेश देने के बावजूद अभी तक तेलग़ुड़वा-कोन मार्ग की मरम्मत नहीं हुई। जबकि प्रतिदिन इस मार्ग पर करीब 50 बसों का संचालन होता है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि भी सड़क की मरम्मत कराने की दिशा में पहल नहीं कर रहे है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है।
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वर्ष 2010-11 में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से तेलगुड़वा-कोन सड़क का निर्माण कार्य कराया गया था। वर्ष 2012 में सूबे मेें सपा की सरकार बनते ही इस मार्ग से ओवरलोड बालू लदे ट्रकों का परिवहन शुरू हो गया। ओवरलोड वाहनों के संचालन से कनहर नदी से तेलगुड़वा तक जगह-जगी सड़क गड्ढे में तब्दील हो गई। कई बार कोटा के ग्रामीणों ने टूटी सड़कों की मरम्मत कराने की मांग को लेकर आंदोलन किया। लेकिन हर बाद अधिकारी अविलंब सड़क की मरम्मत कराने का आश्वासन देकर उन्हें शांत करा दिया। फरवरी 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने दो माह के भीतर सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का ऐलान किया तो तेलगुड़वा-कोन मार्ग के बनने की उम्मीद जगी। लेकिन सीएम के आदेश देने के बावजूद अभी तक तेलग़ुड़वा-कोन मार्ग की मरम्मत नहीं हुई। जबकि प्रतिदिन इस मार्ग पर करीब 50 बसों का संचालन होता है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि भी सड़क की मरम्मत कराने की दिशा में पहल नहीं कर रहे है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है।
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