{"_id":"5a4525b94f1c1baa268b6620","slug":"131514481081-sonebhadra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उठहु राम भंजन भव तापा, मेटहु कठिन जनक परितापा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उठहु राम भंजन भव तापा, मेटहु कठिन जनक परितापा
Updated Thu, 28 Dec 2017 10:45 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सोनभद्र। राबर्ट्सगंज के आरटीएस क्लब प्रांगण में बुधवार को रात्रि में श्रीराम कथा में प्रवचनकर्ताओं नेे सीता स्वयंवर का वृतांत सुनाया। वहीं गुरुवार को सुबह से ही यज्ञ मंडप की परिक्रमा को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही।
जौनपुर से पधारे प्रकाश चंद्र विद्यार्थी ने कहा कि गुरु विश्वामित्र ने प्रभु श्रीराम से कहा उठहु राम भंजन भव तापा, मेटहु कठिन जनक परितापा। इसके बाद प्रभु श्रीराम ने गुरु की आज्ञा मिलते ही शिवजी के धनुष का भंजन किया और श्रीराम-सीता का विवाह संपन्न हुआ। वाराणसी से पधारे अच्युतानंद पाठक ने कहा कि सीता स्वयंवर में उपस्थित हजारों वीर राजा सीता जी का वरण करना चाहते थे, किंतु धनुष तोड़ने की बात तो दूर, धनुष को जगह से हिला भी नहीं सके। गोरखपुर से पधारे हेमंत त्रिपाठी ने संगीतमयी कथा में सीता स्वयंवर के बारे में विस्तार से बताया। उधर गुरुवार को प्रात: कालीन पूजा-अर्चना एवं आरती के बाद व्यास पंडित सूर्यलाल मिश्र के आचार्यत्व में 111 भूदेवों के जरिए मानस की चौपाईयां पढ़ी गयी। यज्ञ मंडप की परिक्रमा को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। इस मौके पर आचार्य संतोष धर दुबे, शिवकुमार शास्त्री, अनिल पांडेय, यशवंत पांडेय, यजमान किशोर केडिया, महामंत्री सुशील पाठक, संरक्षक रतन लाल गर्ग, अजय शुक्ला, अयोध्या दुबे, रामसकल चौबे, अजीत भंडारी, घनश्याम, विमलेश सिंह, शिशु तिवारी, संजय जायसवाल, रामविलास सोनी, मृत्युंजय, महेश, मन्नू पांडेय आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
जौनपुर से पधारे प्रकाश चंद्र विद्यार्थी ने कहा कि गुरु विश्वामित्र ने प्रभु श्रीराम से कहा उठहु राम भंजन भव तापा, मेटहु कठिन जनक परितापा। इसके बाद प्रभु श्रीराम ने गुरु की आज्ञा मिलते ही शिवजी के धनुष का भंजन किया और श्रीराम-सीता का विवाह संपन्न हुआ। वाराणसी से पधारे अच्युतानंद पाठक ने कहा कि सीता स्वयंवर में उपस्थित हजारों वीर राजा सीता जी का वरण करना चाहते थे, किंतु धनुष तोड़ने की बात तो दूर, धनुष को जगह से हिला भी नहीं सके। गोरखपुर से पधारे हेमंत त्रिपाठी ने संगीतमयी कथा में सीता स्वयंवर के बारे में विस्तार से बताया। उधर गुरुवार को प्रात: कालीन पूजा-अर्चना एवं आरती के बाद व्यास पंडित सूर्यलाल मिश्र के आचार्यत्व में 111 भूदेवों के जरिए मानस की चौपाईयां पढ़ी गयी। यज्ञ मंडप की परिक्रमा को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। इस मौके पर आचार्य संतोष धर दुबे, शिवकुमार शास्त्री, अनिल पांडेय, यशवंत पांडेय, यजमान किशोर केडिया, महामंत्री सुशील पाठक, संरक्षक रतन लाल गर्ग, अजय शुक्ला, अयोध्या दुबे, रामसकल चौबे, अजीत भंडारी, घनश्याम, विमलेश सिंह, शिशु तिवारी, संजय जायसवाल, रामविलास सोनी, मृत्युंजय, महेश, मन्नू पांडेय आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन