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एनसीआरटी के तुगलकी फरमान से बढ़ा आक्रोश
Updated Fri, 07 Sep 2018 01:25 AM IST
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सोनभद्र। निजी डीएलएड (बीटीसी) कॉलेज संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण अनुसंधान परिषद के निदेशक के उस फरमान को तुगलकी फरमान करार दिया है, जिसमें कॉलेजों के भौतिक सत्यापन का निर्देश दिया गया है। उनका कहना है कि राज्य सरकार महज पठन-पाठन की जांच ही कर सकती है, जो डायट प्राचार्य समय-समय पर करते रहते हैं।
अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह, उपाध्याक्ष डॉ. प्रसन्न पटेल व महामंत्री डॉ. सुधीर कुमार मिश्रा की मौजूदगी में प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को राज्यपाल को संबोंधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। उनका कहना है कि शासन के निर्देश पर निदेशक द्वारा डीएलएड (बीटीसी) संस्थानों के भौतिक सत्यापन का निर्देश जारी किया गया है, जबकि जांच उनके कार्य क्षेत्र के बाहर है। जांच एनसीटीई व शासन के प्रतिनिधि के तौर पर जिलाधिकारी द्वारा गठित तीन सदस्यीय निरीक्षक मंडल, जिसमें उपजिलाधिकारी भी शामिल रहते हैं, द्वारा की जा चुकी है। पुन: जांच करने का कोई औचित्य नहीं है। तुगलकी फरमान जारी किए जाने से भ्रष्टाचार को को बढ़ावा मिलेगा और कॉलेजों का उत्पीड़न किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने एनसीआरटी लखनऊ की अनावश्यक प्रताड़ित करने वाली जांच को स्थगित करने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि इस पर रोक नहीं लगाई गई तो छह सितंबर से संस्थानों के शैक्षणिक कार्य को बंद कर दिया जाएगा।
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अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह, उपाध्याक्ष डॉ. प्रसन्न पटेल व महामंत्री डॉ. सुधीर कुमार मिश्रा की मौजूदगी में प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को राज्यपाल को संबोंधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। उनका कहना है कि शासन के निर्देश पर निदेशक द्वारा डीएलएड (बीटीसी) संस्थानों के भौतिक सत्यापन का निर्देश जारी किया गया है, जबकि जांच उनके कार्य क्षेत्र के बाहर है। जांच एनसीटीई व शासन के प्रतिनिधि के तौर पर जिलाधिकारी द्वारा गठित तीन सदस्यीय निरीक्षक मंडल, जिसमें उपजिलाधिकारी भी शामिल रहते हैं, द्वारा की जा चुकी है। पुन: जांच करने का कोई औचित्य नहीं है। तुगलकी फरमान जारी किए जाने से भ्रष्टाचार को को बढ़ावा मिलेगा और कॉलेजों का उत्पीड़न किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने एनसीआरटी लखनऊ की अनावश्यक प्रताड़ित करने वाली जांच को स्थगित करने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि इस पर रोक नहीं लगाई गई तो छह सितंबर से संस्थानों के शैक्षणिक कार्य को बंद कर दिया जाएगा।
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