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मन की मुराद पूरी करते हैं अजीरेश्वर महादेव
Updated Mon, 06 Aug 2018 10:56 PM IST
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बीजपुर। रेणुकूट-बीजपुर मुख्य मार्ग से सटे अजीर नदी तट पर स्थित अजीरेश्वर महादेव की महिमा अद्भुत है। यहां शिवलिंग के आकार में निर्मित मंदिर जहां आकर्षण का का केंद्र है। वहीं गर्भगृह में स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान शिवलिंग श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यहां जो भी श्रद्धापूर्वक दर्शन-पूजन, अभिषेक करता है, उसके मन की मुराद जरूर पूरी होती है।
अजीरेश्वर महादेव का शिवलिंग पहले रिहंद डैम तट क्षेत्र में स्थित था। 1965 में रिहंद डैम के निर्माण के समय डूब क्षेत्र से लाकर अजीर नदी तट पर स्थापित किया गया। इलाके के लोगों के पूजन और दर्शन-पूजन से पूरी होती मुराद से यहां के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती ही चली गई। चंद वर्षों में ही यहां जिले के साथ ही मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार सहित अन्य राज्यों से श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचने लगे। लगातार बढ़ती आस्था को देखते हुए 1970 में यहां मेले का भी आयोजन होने लगा। श्रावण सोमवार, शिवरात्रि और बसंत पंचमी पर लगने वाला मेला साल दर साल व्यापक स्वरूप पकड़ता जा रहा है। वहीं यहां भक्तों की भी भीड़ बढ़ती जा रही है। कई वर्षों से यहां कांवरियों का भी हुजुम जलाभिषेक के लिए पहुंच रहा है। भोले के जयकार और भजन का गान करते हुए झूमते हुए भक्त दूसरों को भी भक्ति में डुबोकर रख देते हैं। 2011 में मंदिर समिति के लोगों ने श्रद्धालुओं के आपसी सहयोग से यहां भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। सड़क से सटे शिवलिंग के आकार में निर्मित मंदिर किसी को भी आकर्षित करने के साथ ही श्रद्धा से नत कर देता है। मंदिर समिति के गणेश शर्मा बताते हैं कि दर्शन-पूजन से पूरी होती लोगों की मनोकामना साल दर साल यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ा रही है। यहां वरक्षा, मुंडन जैसे मांगलिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
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अजीरेश्वर महादेव का शिवलिंग पहले रिहंद डैम तट क्षेत्र में स्थित था। 1965 में रिहंद डैम के निर्माण के समय डूब क्षेत्र से लाकर अजीर नदी तट पर स्थापित किया गया। इलाके के लोगों के पूजन और दर्शन-पूजन से पूरी होती मुराद से यहां के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती ही चली गई। चंद वर्षों में ही यहां जिले के साथ ही मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार सहित अन्य राज्यों से श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचने लगे। लगातार बढ़ती आस्था को देखते हुए 1970 में यहां मेले का भी आयोजन होने लगा। श्रावण सोमवार, शिवरात्रि और बसंत पंचमी पर लगने वाला मेला साल दर साल व्यापक स्वरूप पकड़ता जा रहा है। वहीं यहां भक्तों की भी भीड़ बढ़ती जा रही है। कई वर्षों से यहां कांवरियों का भी हुजुम जलाभिषेक के लिए पहुंच रहा है। भोले के जयकार और भजन का गान करते हुए झूमते हुए भक्त दूसरों को भी भक्ति में डुबोकर रख देते हैं। 2011 में मंदिर समिति के लोगों ने श्रद्धालुओं के आपसी सहयोग से यहां भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। सड़क से सटे शिवलिंग के आकार में निर्मित मंदिर किसी को भी आकर्षित करने के साथ ही श्रद्धा से नत कर देता है। मंदिर समिति के गणेश शर्मा बताते हैं कि दर्शन-पूजन से पूरी होती लोगों की मनोकामना साल दर साल यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ा रही है। यहां वरक्षा, मुंडन जैसे मांगलिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
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