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डग्गामार वाहन बन रहे हादसों की वजह
Updated Tue, 01 May 2018 11:04 PM IST
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अनपरा (सोनभद्र)। जिले में डग्गामार वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सहायक संभागीय परिवहन विभाग के डग्गामार वाहनों को व्यवस्थित करने की कोई ठोस योजना नहीं है। जिसके चलते इनकी अराजकता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यातायात नियमों को ताक में रखकर सैकड़ों डग्गामार वाहन शासकीय राजस्व की लाखों की चपत लगा रहे है। सहायक संभागीय परिवहन विभाग के लाख प्रयासों के बावजूद डग्गामार वाहनों के संचालन में कमी नहीं आ रही है।
राबर्ट्सगंज-खलियारी मार्ग पर नई बाजार के समीप दो माह पूर्व टैक्टर ट्राली के पलटने से एक युवक की मौत हो गई थी जबकि आधा दर्जन लोग घायल हुए थे। दरअसल कृषि कार्य में उपयोग आने वाले ट्रैक्टर ट्राली का न केवल व्यवसायिक इश्तेमाल तो हो ही रहा, शादी व्याह में बरातियों को भी ढोने का काम किया जा रहा है। इसके पीछे रुपये की बचत करना है। हैरत की बात तो यह है कि परिवहन विभाग ही नहीं, पुलिस विभाग के लोगों के सामने ये डग्गामार वाहन यात्रियों को भूसे की तरह भरकर फर्राटा भरते है और कोई कार्रवाई नहीं होती। जिससे डग्गामार वाहन चालकों का हौसला बढ़ता जा रहा है और हादसे हो रहे हैं।
उपसंभागीय परिवहन कार्यालय में तीन सवारी के नाम पर पंजीकृत आटो पर 10-12 सवारी की ढुलाई हो रही है। राबर्ट्सगंज मुख्यालय से घोरावल, करमा, पन्नूगंज, चुर्क व तेलगुड़वा तक आटो दौड़ रहे हैं। इससे न केवल सरकार को राजस्व की क्षति हो रही बल्कि यात्री जान हथेली पर रखकर यात्रा करने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे वाहनों के खिलाफ भी कार्रवाई करने से संबंधित अधिकारी हाथ खींचे हुए हैं।
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300 सड़क हादसों में दो सौ की होती मौत
जिले में प्रतिवर्ष आठ सौ से अधिक सड़क हादसे होते है जिसमें करीब पांच सौ लोगों की मौत होती है। जानकारी की मानें तो 800 सड़क हादसों में तीन सौ सड़क हादसे डग्गामार वाहनों के कारण होते है जिसमें दो सौ लोग जान गंवा देते हैं।
डग्गामार वाहनों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई की जा रही है। यातायात नियमों का उलंघन कर वाहन चलाने वालों पर भी सख्ती हो रही है। -ज्ञान प्रकाश राय, यातायात क्षेत्राधिकारी।
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राबर्ट्सगंज-खलियारी मार्ग पर नई बाजार के समीप दो माह पूर्व टैक्टर ट्राली के पलटने से एक युवक की मौत हो गई थी जबकि आधा दर्जन लोग घायल हुए थे। दरअसल कृषि कार्य में उपयोग आने वाले ट्रैक्टर ट्राली का न केवल व्यवसायिक इश्तेमाल तो हो ही रहा, शादी व्याह में बरातियों को भी ढोने का काम किया जा रहा है। इसके पीछे रुपये की बचत करना है। हैरत की बात तो यह है कि परिवहन विभाग ही नहीं, पुलिस विभाग के लोगों के सामने ये डग्गामार वाहन यात्रियों को भूसे की तरह भरकर फर्राटा भरते है और कोई कार्रवाई नहीं होती। जिससे डग्गामार वाहन चालकों का हौसला बढ़ता जा रहा है और हादसे हो रहे हैं।
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उपसंभागीय परिवहन कार्यालय में तीन सवारी के नाम पर पंजीकृत आटो पर 10-12 सवारी की ढुलाई हो रही है। राबर्ट्सगंज मुख्यालय से घोरावल, करमा, पन्नूगंज, चुर्क व तेलगुड़वा तक आटो दौड़ रहे हैं। इससे न केवल सरकार को राजस्व की क्षति हो रही बल्कि यात्री जान हथेली पर रखकर यात्रा करने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे वाहनों के खिलाफ भी कार्रवाई करने से संबंधित अधिकारी हाथ खींचे हुए हैं।
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300 सड़क हादसों में दो सौ की होती मौत
जिले में प्रतिवर्ष आठ सौ से अधिक सड़क हादसे होते है जिसमें करीब पांच सौ लोगों की मौत होती है। जानकारी की मानें तो 800 सड़क हादसों में तीन सौ सड़क हादसे डग्गामार वाहनों के कारण होते है जिसमें दो सौ लोग जान गंवा देते हैं।
डग्गामार वाहनों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई की जा रही है। यातायात नियमों का उलंघन कर वाहन चलाने वालों पर भी सख्ती हो रही है। -ज्ञान प्रकाश राय, यातायात क्षेत्राधिकारी।