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डायरिया से निपटने को मुकम्मल इंतजाम
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सोनभद्र। मौसम में परिवर्तन के साथ ही डायरिया फैलने की आशंका तेज हो गई है। कई जिलों में इससे लोग परेशान हैं। जिले में डायरिया से निबटने के लिए मुकम्मल इंतज़ाम किए गए हैं। सीएमओ डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि अस्पतालों में ओआरएस घोल समेत पर्याप्त दवाएं हैं। जरूरत पड़ने पर क्षेत्रों में जाने के लिए टीम भी गठित कर दी गई गई है।
मौसम में परिवर्तन होने लगा है। इसी के साथ डायरिया समेत अन्य बीमारियों के फैलने की आशंका शुरू हो गई है। जगह-जगह लोग उल्टी-दस्त, पेट दर्द, बुखार के शिकार हो रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में जहां लोग दूषित पानी पीने के लिए विवश हैं, वहां भी डायरिया के फैलने की आशंका है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। शुक्रवार को मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी सिंह ने दवाओं के स्टोर रूम का निरीक्षण किया। उन्होंने दवाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी ली। सीएमओ ने बताया कि डायरिया से निबटने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इसका प्रभारी डॉ. सुमन जायसवाल को बनाया गया है। इसके अलावा, एक इमरजेंसी टीम भी जिला स्तर पर बनाई गई है। इसमें मलेरिया अधिकारी, तीन मलेरिया निरीक्षक, एक एलटी, एक फार्मासिस्ट, दो वार्ड ब्वाय शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि दवाएं प्रचुर मात्रा में है। सवा लाख से अधिक ओआरएस घोल, जिंक, पैरासीटामॉल आदि है। यदि फौरी तौर पर दवाएं कम पड़ीं तो स्थानीय स्तर पर उसकी खरीदारी की जाएगी।
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मौसम में परिवर्तन होने लगा है। इसी के साथ डायरिया समेत अन्य बीमारियों के फैलने की आशंका शुरू हो गई है। जगह-जगह लोग उल्टी-दस्त, पेट दर्द, बुखार के शिकार हो रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में जहां लोग दूषित पानी पीने के लिए विवश हैं, वहां भी डायरिया के फैलने की आशंका है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। शुक्रवार को मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी सिंह ने दवाओं के स्टोर रूम का निरीक्षण किया। उन्होंने दवाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी ली। सीएमओ ने बताया कि डायरिया से निबटने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इसका प्रभारी डॉ. सुमन जायसवाल को बनाया गया है। इसके अलावा, एक इमरजेंसी टीम भी जिला स्तर पर बनाई गई है। इसमें मलेरिया अधिकारी, तीन मलेरिया निरीक्षक, एक एलटी, एक फार्मासिस्ट, दो वार्ड ब्वाय शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि दवाएं प्रचुर मात्रा में है। सवा लाख से अधिक ओआरएस घोल, जिंक, पैरासीटामॉल आदि है। यदि फौरी तौर पर दवाएं कम पड़ीं तो स्थानीय स्तर पर उसकी खरीदारी की जाएगी।
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