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लेखपालों ने तहसीलों पर दिया धरना, कामकाज रहा प्रभावित
Updated Tue, 03 Oct 2017 11:43 PM IST
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सोनभद्र/दुद्धी/घोरावल। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के तत्वाधान में जिले की तीनों तहसीलों राबर्ट्सगंज, दुद्धी और घोरावल तहसील क्षेत्र के समस्त लेखपालों ने अपने छह सूत्री मांग को लेकर मंगलवार को तहसील पर धरना दिया। अंत में मुख्यमंत्री को संबोधित अपने मांगों का ज्ञापन संबंधित एसडीएम को सौंपा।
बता दें कि लेखपालों की समस्त छह सूत्री मांगो में लेखपाल पद की शैक्षिक अहर्ता स्नातक करने व पदनाम राजस्व उपनिरीक्षक करने एवं प्रारंभिक वेतनमान ग्रेड पे 2000 से बढ़ाकर 2800 किया जाये, एसीपी विसंगति दूर करना, राजस्व निरीक्षक के पदों पर सीधी भर्ती समाप्त करते हुए संशोधित राजस्व राजस्व निरीक्षक नियमावली 2017 कैबिनेट से पारित कराना ,लेखपालों को पदोन्नति द्वारा राजस्व निरीक्षकों के समस्त रिक्त पदों को भरना , विशिष्ट परिस्थितियों में लेखपाल के निजी अनुरोध पर प्रदेश के किसी भी जनपद में स्थानांतरण संबंधी लेखपाल सेवा नियमावली में संशोधन, लैपटॉप और स्मार्ट फोन उपलब्ध कराना, वर्ष 2001 में चयनित ,वर्ष 2003-04 में प्रशिक्षित किंतु शासन / परिसर स्तर से विलंब के कारण एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त लेखपालों को विज्ञप्ती /चयन /प्रशिक्षण के समय प्रभावी सेवा शर्तों के अनुसार पुरानी पेंशन व्यवस्था का लाभ प्रदान कराना है। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र नाथ मिश्र एवं सदर तहसील लेखपाल संघ अध्यक्ष ज्योति कुमार गुप्ता ने कहा कि छह सूत्री मांगों को लेकर मंगलवार को तीनों तहसीलों पर एक दिवसीय धरना दिया गया। अगर मांगें नहीं मानी जाएंगी तो लेखपाल संघ अब चूप नहीं बैठेगा। इसके लिए प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर अगला आंदोलन चलेगा। सदर एसडीएम विशाल यादव को मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। इस मौके पर गोपाल जी निराला, शिवशंकर यादव, चंद्रकांत दुबे, साजिद खान, रत्नेश शुक्ल, शैलानी प्रसाद, चंदन शर्मा, रामचंद्र दिवाकर, रामविलास, रामराज यादव, रामनाथ आदि लेखपाल मौजूद रहे। उधर दुद्धी लेखपाल संघ अध्यक्ष अरुण कनौजिया ने कहा कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ द्वारा शासन को दिए गए छह सूत्री मांगपत्र पर राजस्व परिषद की संस्तुति व शासन की सहमति के बाद भी कोई शासनादेश /नियमावली निर्गत न होने के कारण एक माह तक आंदोलन किया गया। आंदोलन के दौरान सरकार के द्वारा लेखपाल संवर्ग की मांगों को जायज मानते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के साथ की गयी वार्ता में सभी मांगो को औचित्यपूर्ण मानते हुए शीघ्र पूरा करने के निर्देश वार्ता में शामिल अधिकारियों, मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव को दिए गए थे। इसके बाद भी हमारी मांगो को लागु नहीं किया गया। लेखपालों ने एसडीएम भानु प्रताप सिंह को ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान तहसील सचिव ओमप्रकाश के साथ समस्त लेखपाल मौजूद रहे। इसी प्रकार से घोरावल में भी लेखपालों ने अपनी मांगों का ज्ञापन एसडीएम शादाम आलम को सौंपा।
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बता दें कि लेखपालों की समस्त छह सूत्री मांगो में लेखपाल पद की शैक्षिक अहर्ता स्नातक करने व पदनाम राजस्व उपनिरीक्षक करने एवं प्रारंभिक वेतनमान ग्रेड पे 2000 से बढ़ाकर 2800 किया जाये, एसीपी विसंगति दूर करना, राजस्व निरीक्षक के पदों पर सीधी भर्ती समाप्त करते हुए संशोधित राजस्व राजस्व निरीक्षक नियमावली 2017 कैबिनेट से पारित कराना ,लेखपालों को पदोन्नति द्वारा राजस्व निरीक्षकों के समस्त रिक्त पदों को भरना , विशिष्ट परिस्थितियों में लेखपाल के निजी अनुरोध पर प्रदेश के किसी भी जनपद में स्थानांतरण संबंधी लेखपाल सेवा नियमावली में संशोधन, लैपटॉप और स्मार्ट फोन उपलब्ध कराना, वर्ष 2001 में चयनित ,वर्ष 2003-04 में प्रशिक्षित किंतु शासन / परिसर स्तर से विलंब के कारण एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त लेखपालों को विज्ञप्ती /चयन /प्रशिक्षण के समय प्रभावी सेवा शर्तों के अनुसार पुरानी पेंशन व्यवस्था का लाभ प्रदान कराना है। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र नाथ मिश्र एवं सदर तहसील लेखपाल संघ अध्यक्ष ज्योति कुमार गुप्ता ने कहा कि छह सूत्री मांगों को लेकर मंगलवार को तीनों तहसीलों पर एक दिवसीय धरना दिया गया। अगर मांगें नहीं मानी जाएंगी तो लेखपाल संघ अब चूप नहीं बैठेगा। इसके लिए प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर अगला आंदोलन चलेगा। सदर एसडीएम विशाल यादव को मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। इस मौके पर गोपाल जी निराला, शिवशंकर यादव, चंद्रकांत दुबे, साजिद खान, रत्नेश शुक्ल, शैलानी प्रसाद, चंदन शर्मा, रामचंद्र दिवाकर, रामविलास, रामराज यादव, रामनाथ आदि लेखपाल मौजूद रहे। उधर दुद्धी लेखपाल संघ अध्यक्ष अरुण कनौजिया ने कहा कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ द्वारा शासन को दिए गए छह सूत्री मांगपत्र पर राजस्व परिषद की संस्तुति व शासन की सहमति के बाद भी कोई शासनादेश /नियमावली निर्गत न होने के कारण एक माह तक आंदोलन किया गया। आंदोलन के दौरान सरकार के द्वारा लेखपाल संवर्ग की मांगों को जायज मानते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के साथ की गयी वार्ता में सभी मांगो को औचित्यपूर्ण मानते हुए शीघ्र पूरा करने के निर्देश वार्ता में शामिल अधिकारियों, मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव को दिए गए थे। इसके बाद भी हमारी मांगो को लागु नहीं किया गया। लेखपालों ने एसडीएम भानु प्रताप सिंह को ज्ञापन सौंपा।
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इस दौरान तहसील सचिव ओमप्रकाश के साथ समस्त लेखपाल मौजूद रहे। इसी प्रकार से घोरावल में भी लेखपालों ने अपनी मांगों का ज्ञापन एसडीएम शादाम आलम को सौंपा।