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मानसून सिर पर, कोल प्रबंधन की तैयारी अधूरी
Updated Tue, 27 Jun 2017 10:27 PM IST
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शक्तिनगर। मानसून जल्द दस्तक देने वाला है लेकिन इसको लेकर कोल प्रबंधन की तैयारी अभी तक आधी अधूरी है। पिछले साल ओबी (अधिभार) से पटे प्रमुख नालों की सफाई नहीं होने से स्थिति और खराब है। अनुमान के मुताबिक इस बार बारिश हुई तो कोल परियोजनाओं की ओबी पिछले साल के मुकाबले इस साल भी रिहायशी इलाकों में कहर बन कर टूटेगी।
मानसून तैयारी के नाम पर एनसीएल की कोयला परियोजनओं को प्रति वर्ष सैकड़ों करोड़ रूपये जारी किए जाते हैं। इसके बाद भी जमीनी हकीकत नहीं बदल पाती। कायदे से नजर डालें तो इंतजाम के अभाव में ओबी से हुई बदहाली सभी कोल प्रोजेक्टों के आसपास दिखेगी। लेेकिन खडिय़ा व दुद्धीचुआ कोयला परियोजना की स्थिति अपेक्षाकृत सबसे खराब है। बताते चलें कि बीते साल इन्हीं दोनों परयिोजनाओं की ओबी ने रिहायशी इलाकों के साथ कई क्षेत्रों में कहर बरपाया था। बारिश के पानी के बहाव में ओबी अवरोध बनी तो कई सौ मीटर रेलवे ट्रैक बह गया और जल निकासी रास्ते अवरूद्ध होने से रहवासी क्षेत्रों में पानी संग ओबी जमा हो गई। इसके चलते आम लोगों के साथ एनसीएल व रेलवे के साथ कई पावर प्रोजेक्टों को अरबों रूपये का नुकसान झेलना पड़ा था। पिछले साल की घटना से प्रबंधन के अफसर सबक नहीं ले सके। यही वजह है कि मुख्य जल निकासी के रास्तों की अभी तक सफाई पूरी नहीं हो सकी है। जहां काम हुआ भी वहां खानापूर्ति देखी जा सकती है। इसके उलट प्रबंधन के अधिकारियों का दावा है मानसून को लेकर जरूरी कार्य करा दिए गए हैं।
शक्तिनगर। कोयला निकासी के निमित्त हटाई जाने वाली मिट्टी को अधिभार (ओवर बर्डेन) कहा जाता है। यह कोल प्रोजेक्टों में सतत चलने वाली प्रक्रिया है। लेकिन निस्तारण को लेकर बनाए गए मानकों की अनदेखी के चलते कई सालों से ओबी बारिश के पानी संग फिसल कई किलोमीटर क्षेत्र को अपने आगोश में लेती है। इसको लेकर कई बार कानून व्यवस्था भी बेपटरी हो चुकी है। लेकिन वक्त बीतने के बाद पूरी प्रक्रिया सुस्त हो जाती है। जिम्मेदार दोबारा तब जागते हैं जब घटना की पुनरावृत्ति होती है। -अतुलेश राय
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पिछले सालों में ओबी के चलते बनी स्थिति को गंभीरता से लेकर कार्य किया जा रहा है। रिहायशी क्षेत्रों का विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रोजेक्ट के अधिकारी ग्राम प्रधानों व ग्रामीणों के साथ भ्रमण कर वह सभी कार्य कर रहे हैं जो जरूरी हैं।
एएन पांडेय
महाप्रबंधक
एनसीएल खडिय़ा परियोजना
मानसून तैयारी के नाम पर एनसीएल की कोयला परियोजनओं को प्रति वर्ष सैकड़ों करोड़ रूपये जारी किए जाते हैं। इसके बाद भी जमीनी हकीकत नहीं बदल पाती। कायदे से नजर डालें तो इंतजाम के अभाव में ओबी से हुई बदहाली सभी कोल प्रोजेक्टों के आसपास दिखेगी। लेेकिन खडिय़ा व दुद्धीचुआ कोयला परियोजना की स्थिति अपेक्षाकृत सबसे खराब है। बताते चलें कि बीते साल इन्हीं दोनों परयिोजनाओं की ओबी ने रिहायशी इलाकों के साथ कई क्षेत्रों में कहर बरपाया था। बारिश के पानी के बहाव में ओबी अवरोध बनी तो कई सौ मीटर रेलवे ट्रैक बह गया और जल निकासी रास्ते अवरूद्ध होने से रहवासी क्षेत्रों में पानी संग ओबी जमा हो गई। इसके चलते आम लोगों के साथ एनसीएल व रेलवे के साथ कई पावर प्रोजेक्टों को अरबों रूपये का नुकसान झेलना पड़ा था। पिछले साल की घटना से प्रबंधन के अफसर सबक नहीं ले सके। यही वजह है कि मुख्य जल निकासी के रास्तों की अभी तक सफाई पूरी नहीं हो सकी है। जहां काम हुआ भी वहां खानापूर्ति देखी जा सकती है। इसके उलट प्रबंधन के अधिकारियों का दावा है मानसून को लेकर जरूरी कार्य करा दिए गए हैं।
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शक्तिनगर। कोयला निकासी के निमित्त हटाई जाने वाली मिट्टी को अधिभार (ओवर बर्डेन) कहा जाता है। यह कोल प्रोजेक्टों में सतत चलने वाली प्रक्रिया है। लेकिन निस्तारण को लेकर बनाए गए मानकों की अनदेखी के चलते कई सालों से ओबी बारिश के पानी संग फिसल कई किलोमीटर क्षेत्र को अपने आगोश में लेती है। इसको लेकर कई बार कानून व्यवस्था भी बेपटरी हो चुकी है। लेकिन वक्त बीतने के बाद पूरी प्रक्रिया सुस्त हो जाती है। जिम्मेदार दोबारा तब जागते हैं जब घटना की पुनरावृत्ति होती है। -अतुलेश राय
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पिछले सालों में ओबी के चलते बनी स्थिति को गंभीरता से लेकर कार्य किया जा रहा है। रिहायशी क्षेत्रों का विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रोजेक्ट के अधिकारी ग्राम प्रधानों व ग्रामीणों के साथ भ्रमण कर वह सभी कार्य कर रहे हैं जो जरूरी हैं।
एएन पांडेय
महाप्रबंधक
एनसीएल खडिय़ा परियोजना