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चुनाव की घड़ी करीब आई तो कार्यकर्ताओं की याद सताई
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सीतापुर। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जिले के आला अधिकारियों व कर्मचारियों को सख्त लहजे में भाजपा कार्यकर्ताओं को अहमियत देने की बात कही। डिप्टी सीएम ने कहा भाजपा में कार्यकर्ता से बड़ा कोई नहीं है। इसलिए जब भी कार्यकर्ता आपके पास आए तो उसकी शिकायत सुनकर प्राथमिकता से निदान करें। समाधान करने के बाद कार्यकर्ता व जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराएं। इस बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कार्यकर्ता खुद ही कह रहे कि साहब अब साढ़े चार साल बाद याद आई। अगर पहले ही यह सोच अपनाई होती तो शायद खुले मंच पर आज यह बात कहने की नौबत न आती। इस बयान के बाद कुछ कार्यकर्ता खुश हैं तो कुछ इसे सिर्फ चुनावी फंडा बता रहे हैं।
भाजपा सरकार में भाजपा कार्यकर्ताओं व विधायकों की अफसरों व कर्मचारियों द्वारा उपेक्षा की लगातार खबरें आती रहती हैं। विधायकों व कार्यकर्ताओं की छोटी-छोटी सिफारिशें अफसर नहीं मानते हैं। यह उपेक्षा का दर्द कई बार विधायक व कार्यकर्ता अपनी पार्टी के पदाधिकारियों के सामने रख चुके हैं। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसकी बानगी के तौर पर अधिक दूर न जाकर कुछ ही पहले की ही बात है जब हरगांव विधायक सुरेश राही अपनी कार्यकर्ता की समस्या को लेकर कोतवाली देहात पहुंच गए हैं। धरना-प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दे डाली थी। मुद्दा यह था भाजपा के एक कार्यकर्ता ने जमीन विवाद को लेकर शिकायत की थी। इस पर विधायक ने इंस्पेक्टर को फोन करके पूरी बात बताई। इसके बावजूद सिपाही ने गांव जाकर कार्यकर्ता की ही धुनाई कर दी थी।
इसी प्रकार लहरपुर में किसानों की धान न तौलने पर विधायक सुरेश राही धरने पर बैठ गए थे। भाजपा सांसद राजेश वर्मा ने तत्कालीन सकरन बीडीओ पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मंडलायुक्त से शिकायत की थी। इसकी जांच डीडीओ को सौंपी गई थी। लेकिन अफसरों ने शिकायती पत्र उल्टे बीडीओ को सौंप दी। इस पर बीडीओ ग्राम प्रधानों पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाते रहे। डीडीओ ने अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं दी है। यह कुछ मामले अफसरों की कारगुजारी जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा करने की कहानी बयां कर रहे हैं।
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इसी वजह से आज खुद डिप्टी सीएम को खुले मंच से कार्यकर्ताओं के मान सम्मान की बात याद आ गई। इसके पीछे राजनीतिक पंडित बताते हैं कार्यकर्ताओं व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का मुद्दा पूरे प्रदेश में उठ चुका है। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है। अब चुनाव करीब है तो बिना कार्यकर्ताओं के वैतरणी पार होती नहीं दिख रही है। इसी वजह से आज डिप्टी सीएम ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए पहले अफसरों को नसीहत दी। उसके बाद कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़ाव करते हुए बोले मैं भी पहले एक कार्यकर्ता था। आज डिप्टी सीएम हूं तो एक कार्यकर्ता बनकर ही रास्ता तय किया है। कार्यकर्ताओं के मान सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा के लिए हर समय तैयार रहता हूं। राजनीतिक पंडितों का मानना है इस बयान के दो मायने निकल रहे हैं। एक तो खुद को कार्यकर्ता बताकर कार्यकर्ताओं में आगे बढ़ने का जोश पैदा कर दिया। वहीं अफसरों को नसीहत देकर उनके मनोबल को बढ़ा दिया। अब यह मनोबल आगे कितना काम आएगा। यह तो आने वाले विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा। फिर भी इस बयान से पार्टी को भले ही कुछ फायदा हो या न हो। लेकिन कार्यकर्ताओं ने साढ़े चार साल बाद आए इस बयान से उनकी कुछ दर्द कम जरूर कर दिया है।
जरा अपने घर में पूछ लेना क्या बिना पैसे कभी मिली थी नौकरी
डिप्टी सीएम ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के साथ ही अपनी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का बखान किया। बोले अपने घर में यह मालूम कर लेना। अगर किसी को सपा व बसपा सरकार में नौकरी मिली थी तो क्या वह बिना पैसे की थी। इसका जवाब नहीं में मिलेगा। क्योंकि सपा व बसपा सरकार में बिना पैसे के किसी को भी नौकरी नहीं मिली है। इस जवाब के बाद इस सरकार की तुलना जरूर कर लेना। क्योंकि भाजपा सरकार में योग्यता के आधार पर नौकरी दी गई है। एक भी पैसा किसी ने नहीं लिया। अगर किसी ने ऐसा करने की हिम्मत की है तो वह आज सलाखों के पीछे है।
ब्राह्मण नहीं, सबका साथ सबका विकास है मुद्दा
विपक्षी पार्टियों द्वारा ब्राह्मण सम्मेलन करके उनको अपने पाले में करने के प्रयास के मामले में जब डिप्टी सीएम से प्रेेस वार्ता में सवाल पूछा गया तो बोले भाजपा जातिवाद की राजनीति नहीं करती है। भाजपा सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ चल रही है। इस नारे के साथ साढ़े चार साल में विकास हुआ है। अगर सीतापुर की बात की जाए तो यहां पर नौ विधानसभा हैं। जिसमें सात भाजपा के विधायक हैं। अगर विकास की बात की जाए तो दो सीटों पर गैर दल के विधायक हैं। लेकिन भाजपा ने जितना अपने विधायक के क्षेत्र में काम किया है। उतना ही काम वहां पर भी किया है। क्योंकि हम जनता की समस्या देखते हैं। किसी पार्टी के विधायक का क्षेत्र नहीं देखते हैं।
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भाजपा सरकार में भाजपा कार्यकर्ताओं व विधायकों की अफसरों व कर्मचारियों द्वारा उपेक्षा की लगातार खबरें आती रहती हैं। विधायकों व कार्यकर्ताओं की छोटी-छोटी सिफारिशें अफसर नहीं मानते हैं। यह उपेक्षा का दर्द कई बार विधायक व कार्यकर्ता अपनी पार्टी के पदाधिकारियों के सामने रख चुके हैं। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसकी बानगी के तौर पर अधिक दूर न जाकर कुछ ही पहले की ही बात है जब हरगांव विधायक सुरेश राही अपनी कार्यकर्ता की समस्या को लेकर कोतवाली देहात पहुंच गए हैं। धरना-प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दे डाली थी। मुद्दा यह था भाजपा के एक कार्यकर्ता ने जमीन विवाद को लेकर शिकायत की थी। इस पर विधायक ने इंस्पेक्टर को फोन करके पूरी बात बताई। इसके बावजूद सिपाही ने गांव जाकर कार्यकर्ता की ही धुनाई कर दी थी।
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इसी प्रकार लहरपुर में किसानों की धान न तौलने पर विधायक सुरेश राही धरने पर बैठ गए थे। भाजपा सांसद राजेश वर्मा ने तत्कालीन सकरन बीडीओ पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मंडलायुक्त से शिकायत की थी। इसकी जांच डीडीओ को सौंपी गई थी। लेकिन अफसरों ने शिकायती पत्र उल्टे बीडीओ को सौंप दी। इस पर बीडीओ ग्राम प्रधानों पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाते रहे। डीडीओ ने अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं दी है। यह कुछ मामले अफसरों की कारगुजारी जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा करने की कहानी बयां कर रहे हैं।
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इसी वजह से आज खुद डिप्टी सीएम को खुले मंच से कार्यकर्ताओं के मान सम्मान की बात याद आ गई। इसके पीछे राजनीतिक पंडित बताते हैं कार्यकर्ताओं व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का मुद्दा पूरे प्रदेश में उठ चुका है। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है। अब चुनाव करीब है तो बिना कार्यकर्ताओं के वैतरणी पार होती नहीं दिख रही है। इसी वजह से आज डिप्टी सीएम ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए पहले अफसरों को नसीहत दी। उसके बाद कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़ाव करते हुए बोले मैं भी पहले एक कार्यकर्ता था। आज डिप्टी सीएम हूं तो एक कार्यकर्ता बनकर ही रास्ता तय किया है। कार्यकर्ताओं के मान सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा के लिए हर समय तैयार रहता हूं। राजनीतिक पंडितों का मानना है इस बयान के दो मायने निकल रहे हैं। एक तो खुद को कार्यकर्ता बताकर कार्यकर्ताओं में आगे बढ़ने का जोश पैदा कर दिया। वहीं अफसरों को नसीहत देकर उनके मनोबल को बढ़ा दिया। अब यह मनोबल आगे कितना काम आएगा। यह तो आने वाले विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा। फिर भी इस बयान से पार्टी को भले ही कुछ फायदा हो या न हो। लेकिन कार्यकर्ताओं ने साढ़े चार साल बाद आए इस बयान से उनकी कुछ दर्द कम जरूर कर दिया है।
जरा अपने घर में पूछ लेना क्या बिना पैसे कभी मिली थी नौकरी
डिप्टी सीएम ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के साथ ही अपनी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का बखान किया। बोले अपने घर में यह मालूम कर लेना। अगर किसी को सपा व बसपा सरकार में नौकरी मिली थी तो क्या वह बिना पैसे की थी। इसका जवाब नहीं में मिलेगा। क्योंकि सपा व बसपा सरकार में बिना पैसे के किसी को भी नौकरी नहीं मिली है। इस जवाब के बाद इस सरकार की तुलना जरूर कर लेना। क्योंकि भाजपा सरकार में योग्यता के आधार पर नौकरी दी गई है। एक भी पैसा किसी ने नहीं लिया। अगर किसी ने ऐसा करने की हिम्मत की है तो वह आज सलाखों के पीछे है।
ब्राह्मण नहीं, सबका साथ सबका विकास है मुद्दा
विपक्षी पार्टियों द्वारा ब्राह्मण सम्मेलन करके उनको अपने पाले में करने के प्रयास के मामले में जब डिप्टी सीएम से प्रेेस वार्ता में सवाल पूछा गया तो बोले भाजपा जातिवाद की राजनीति नहीं करती है। भाजपा सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ चल रही है। इस नारे के साथ साढ़े चार साल में विकास हुआ है। अगर सीतापुर की बात की जाए तो यहां पर नौ विधानसभा हैं। जिसमें सात भाजपा के विधायक हैं। अगर विकास की बात की जाए तो दो सीटों पर गैर दल के विधायक हैं। लेकिन भाजपा ने जितना अपने विधायक के क्षेत्र में काम किया है। उतना ही काम वहां पर भी किया है। क्योंकि हम जनता की समस्या देखते हैं। किसी पार्टी के विधायक का क्षेत्र नहीं देखते हैं।