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गिरफ्तारी के बाद लीगल एडवाइजर से मिलने नहीं दिया : प्रियंका
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द्वितीय वाहिनी पीएसी गेस्ट हाउस में प्रियंका गांधी। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। प्रियंका गांधी ने मंगलवार को एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि सीओ सिटी पीयूष कुमार सिंह ने मौखिक रूप से धारा 151 के तहत उनकी गिरफ्तारी की बात कही। जिस समय वे गिरफ्तार की गईं, सीतापुर जिले में यात्रा कर रही थी। लखीमपुर बार्डर से करीब 20 किमी. मीटर दूर थी। गिरफ्तार करने के बाद उन्हें किसी मजिस्ट्रेट या न्यायिक अधिकारी के सामने पेश नहीं किया गया। लीगल एडवाइजर से मिलने के लिए भी अनुमति नहीं दी गई, जो सुबह से गेट पर खड़े थे।
उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार लखीमपुर जिले में धारा 144 लागू थी। सीतापुर जिले में धारा 144 लागू नहीं थी। वे अपने एक वाहन में चार अन्य लोगों के साथ यात्रा कर रही थी। उनके साथ दो लोकल कांग्रेस के कार्यकर्ता थे। राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा और संदीप सिंह भी थे। उनके साथ कोई भी सिक्योरिटी कार नहीं थी और न ही अन्य कोई कांग्रेस का कार्यकर्ता था।
उन्हें पीएसी परिसर में दो महिला व दो पुरुष सिपाही द्वारा ले जाया गया था। पीएसी परिसर में ले जाने के बाद भी कोई जानकारी नहीं दी गई। न ही बताया गया कि किन वजहों व किस धारा के तहत उन्हें पीएसी परिसर में लाया गया। पुलिस और प्रशासन की ओर से शाम साढ़े छह बजे 38 घंटे बाद भी कोई जानकारी नहीं दी गई।
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किसी प्रकार का कोई आर्डर और नोटिस नहीं मिला है और न ही उन्होंने एफआईआर दिखाई। उन्होंने खुद सोशल मीडिया से जानकारी ली, जिसमें उन्होंने 11 लोगों के नाम लिए। इसमें आठ लोग उस वक्त मौजूद नहीं थे, जब मैं गिरफ्तार की गई। वास्तव में उसमें दो व्यक्ति चार अक्तूबर की दोपहर को उनके कपड़े लेकर लखनऊ से आए थे।
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उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार लखीमपुर जिले में धारा 144 लागू थी। सीतापुर जिले में धारा 144 लागू नहीं थी। वे अपने एक वाहन में चार अन्य लोगों के साथ यात्रा कर रही थी। उनके साथ दो लोकल कांग्रेस के कार्यकर्ता थे। राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा और संदीप सिंह भी थे। उनके साथ कोई भी सिक्योरिटी कार नहीं थी और न ही अन्य कोई कांग्रेस का कार्यकर्ता था।
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उन्हें पीएसी परिसर में दो महिला व दो पुरुष सिपाही द्वारा ले जाया गया था। पीएसी परिसर में ले जाने के बाद भी कोई जानकारी नहीं दी गई। न ही बताया गया कि किन वजहों व किस धारा के तहत उन्हें पीएसी परिसर में लाया गया। पुलिस और प्रशासन की ओर से शाम साढ़े छह बजे 38 घंटे बाद भी कोई जानकारी नहीं दी गई।
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किसी प्रकार का कोई आर्डर और नोटिस नहीं मिला है और न ही उन्होंने एफआईआर दिखाई। उन्होंने खुद सोशल मीडिया से जानकारी ली, जिसमें उन्होंने 11 लोगों के नाम लिए। इसमें आठ लोग उस वक्त मौजूद नहीं थे, जब मैं गिरफ्तार की गई। वास्तव में उसमें दो व्यक्ति चार अक्तूबर की दोपहर को उनके कपड़े लेकर लखनऊ से आए थे।