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शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन वर्ष के रूप में मनेगा शैक्षिक सत्र
Updated Sun, 28 Jun 2015 11:44 PM IST
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प्राइमरी शिक्षा का चालू शैक्षिक सत्र शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। शिक्षा की गुणवत्ता व विद्यालयों का वातावरण बेहतर बनाने के तमाम प्रयास किए जाएंगे। इसकी मानीटरिंग सीधे शासन स्तर से की जाएगी। नौनिहालों में मानसिक गणित के कौशल को विकसित किया जाएगा।
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बाल साहित्य पर विशेष फोकस होगा। पढने-लिखने की क्षमता का प्रतिमाह आकलन होगा। नौनिहालों का शैक्षिक स्तर न उठने पर शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। विद्यालय प्रबंध समिति के अधिकारों को बढ़ाया जाएगा। उसके सामने आने वाली समस्याओं का जिला स्तरीय अधिकारी निपटारा करेंगे। इस संबंध में मुख्य सचिव आलोक रंजन ने निर्देश जारी किए है।
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शासन का मानना है पिछले वर्ष प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए तमाम प्रयास किए गए। जिसके फलस्वरूप पठन-पाठन का सकारात्मक वातावरण सृजित करने में मदद मिली, लेकिन अभी भी इस दिशा में समुचित विकास नहीं हो सका।
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इसको बढ़ावा देने के लिए शैक्षिक सत्र 2015-16 को शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन वर्ष के रूप में मनाने का संकल्प लिया गया है। जिसके तहत शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के तमाम प्रयास किए जाएंगे। विद्यालयों व शिक्षकों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा। नियमित अंतराल पर परीक्षाएं आयोजित की जाएगी।
विद्यालय की प्रगति के लिए श्रेणीकरण नवीन व्यवस्था लागू होगी। नौनिहालों का पढने-लिखने सहित तार्किक ज्ञान विकसित किया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित भी किया जाएगा। विद्यालय प्रबंध समिति के सक्रिय संचालन को बढ़ावा दिया जाएगा।
समिति के सदस्यों को प्रशिक्षित करके उनको अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। बच्चों की प्रगति के आधार पर शिक्षकों का मूल्यांकन होगा। कमी मिलने पर कार्रवाई भी की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया पर शासन की नजर रहेगी। प्रतिमाह उसकी रिपोर्ट शासन को भेजनी होगी।