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Sitapur News: 26 साल से अंधेरे में टॉपरपुरवा, खंभे खड़े लेकिन नहीं आई बिजली
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लहरपुर। लहरपुर क्षेत्र का टॉपरपुरवा गांव आज भी बिजली की रोशनी के लिए तरस रहा है। करीब 26 वर्ष पहले गांव में विद्युतीकरण के लिए खंभे लगाए गए और तार भी बिछाए गए, लेकिन एक सप्ताह के भीतर ही चोर पूरी लाइन काट ले गए। जो तार बच गए थे, वे वर्ष 2023 में गांव में लगी आग में जलकर नष्ट हो गए। तब से गांव में दोबारा बिजली नहीं पहुंच सकी है।
करीब 500 की आबादी और 50 से अधिक परिवारों वाले इस गांव के लोग सोलर पैनल और बैटरी के सहारे किसी तरह दैनिक जरूरतें पूरी कर रहे हैं। भीषण गर्मी में बिजली न होने से लोग रात घरों के बाहर बिताने को मजबूर हैं। अधिकांश घरों में पंखा, कूलर, फ्रिज जैसे बिजली से चलने वाले उपकरण नहीं हैं।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2000 में लहरपुर उपकेंद्र से गांव तक बिजली लाइन बिछाई गई थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद चोर तार काट ले गए। इसके बाद कई बार समाधान दिवस और विद्युत विभाग में शिकायतें की गईं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। फरवरी 2023 में गांव में आग लगने से बचे हुए तार भी जलकर नष्ट हो गए।
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ग्रामीण राजीव प्रसाद, उत्तम, दुर्गेश, झाऊं, रामनरेश, जगदीश, इंद्रेश कुमार, खूबचंद, ठाकुर, छोटेलाल, दीपक कुमार, साधू, रामू और सोमपाल ने बताया कि वर्षों से बिजली की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। क्षेत्रीय विधायक अनिल वर्मा ने कहा कि गांव में बिजली पहुंचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
अवर अभियंता अभिनव शुक्ल ने बताया कि गांव के विद्युतीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही बिजली व्यवस्था बहाल कराने की कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों की पढ़ाई से लेकर मोबाइल चार्जिंग तक संकट
ग्रामीण राजू निषाद ने बताया कि बिजली न होने से बच्चों की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित होती है। उत्तम कुमार ने कहा कि मोबाइल चार्ज करने के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता है। रंजीत कुमार के अनुसार शाम होते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है, जबकि प्रदीप कुमार ने बताया कि बिजली के अभाव में लोग बिजली से चलने वाले उपकरण खरीदने से भी बचते हैं।
बिजली आएगी तो गांव से नहीं होता पलायन
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली आने पर गांव में आटा चक्की, वेल्डिंग, सिलाई, डेयरी और अन्य लघु उद्योग शुरू किए जा सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और युवाओं का पलायन भी कम होगा।
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करीब 500 की आबादी और 50 से अधिक परिवारों वाले इस गांव के लोग सोलर पैनल और बैटरी के सहारे किसी तरह दैनिक जरूरतें पूरी कर रहे हैं। भीषण गर्मी में बिजली न होने से लोग रात घरों के बाहर बिताने को मजबूर हैं। अधिकांश घरों में पंखा, कूलर, फ्रिज जैसे बिजली से चलने वाले उपकरण नहीं हैं।
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ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2000 में लहरपुर उपकेंद्र से गांव तक बिजली लाइन बिछाई गई थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद चोर तार काट ले गए। इसके बाद कई बार समाधान दिवस और विद्युत विभाग में शिकायतें की गईं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। फरवरी 2023 में गांव में आग लगने से बचे हुए तार भी जलकर नष्ट हो गए।
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ग्रामीण राजीव प्रसाद, उत्तम, दुर्गेश, झाऊं, रामनरेश, जगदीश, इंद्रेश कुमार, खूबचंद, ठाकुर, छोटेलाल, दीपक कुमार, साधू, रामू और सोमपाल ने बताया कि वर्षों से बिजली की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। क्षेत्रीय विधायक अनिल वर्मा ने कहा कि गांव में बिजली पहुंचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
अवर अभियंता अभिनव शुक्ल ने बताया कि गांव के विद्युतीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही बिजली व्यवस्था बहाल कराने की कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों की पढ़ाई से लेकर मोबाइल चार्जिंग तक संकट
ग्रामीण राजू निषाद ने बताया कि बिजली न होने से बच्चों की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित होती है। उत्तम कुमार ने कहा कि मोबाइल चार्ज करने के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता है। रंजीत कुमार के अनुसार शाम होते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है, जबकि प्रदीप कुमार ने बताया कि बिजली के अभाव में लोग बिजली से चलने वाले उपकरण खरीदने से भी बचते हैं।
बिजली आएगी तो गांव से नहीं होता पलायन
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली आने पर गांव में आटा चक्की, वेल्डिंग, सिलाई, डेयरी और अन्य लघु उद्योग शुरू किए जा सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और युवाओं का पलायन भी कम होगा।