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Sitapur News: सेना में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगने वाले तीन गिरफ्तार
Fri, 11 Aug 2023 12:34 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 11 Aug 2023 12:34 AM IST
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सीतापुर। सेना व केंद्रीय सुरक्षा बलों में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं को ठगने वाले तीन बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मजे की बात यह है कि इनमें से दो आरोपी पहले खुद ही इस गैंग का शिकार बन चुके हैं। नौकरी न लगने पर सरगना ने कुछ रुपये वापस करने के बाद उन्हें अपने गैंग में शामिल कर लिया था। अब आरोपी बेरोजगार युवाओं को कोचिंग संस्थानों से खोजकर लाते थे। कमलापुर पुलिस, स्वॉट व सर्विलांस टीम ने गिरोह का पर्दाफाश किया है।
स्वाॅट प्रभारी सतेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि कुछ महीने पहले खैराबाद निवासी मयंक यादव को आरपीएफ में भर्ती कराने का झांसा देकर ठगों ने उससे सात लाख रुपये लिए थे। इसकी शिकायत पीड़ित ने कमलापुर थाने में की थी। कमलापुर पुलिस मामले की जांच कर रही थी।
इसी बीच टीम को मुखबिर से सूचना मिली गिरोह के कुछ लोग महोली के पास मौजूद हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने लखीमपुर के थाना गोला गांव चौरठिया निवासी जसविंदर उर्फ जस्सी, थाना रेउसा के गांव पिपरा निवासी रोहित मौर्य और सेवता निवासी ज्ञानेश यादव को महोली पुल से गिरफ्तार कर लिया। स्वॉट प्रभारी ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि उनका गिरोह बेरोजगारों को निशाना बनाता है।
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गिरोह का सरगना रांची निवासी पंकज है। सेना, आरपीएफ, सीआईएसएफ, आरपीएफ समेत अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगते थे। फिर बेरोजगारों को बरेली स्थित सेना अस्पताल या दिल्ली बुलाया जाता था। यहां युवकों को भरोसा जीतने के लिए बकायदा उनके ब्लड सैंपल लिया जाता था।
कुछ देर बाद उन्हें बताया जाता था कि उनका मेडिकल हो गया है। फिर ठग दस्तावेजों का सत्यापन कराने की बात कहते थे। इसके बाद बेरोजगारों को फर्जी जॉइनिंग लेटर दे दिया जाता था। जॉइनिंग लेटर देते समय बदले में मोटी रकम वसूलते थे। ठगों के पास से पुलिस ने 50 हजार रुपये, चार मोबाइल फोन बरामद व कई दस्तावेज बरामद किए हैं।
गिरोह के अन्य बदमाशों की गिरफ्तारी के हो रहे प्रयास
सेना व केंद्रीय सुरक्षा बलों में नौकरी दिलाने वाले गिरोह के तीन बदमाश पकड़े गए हैं। इन बदमाशों ने अब तक कितने लोगों को ठगा है, इसकी जांच चल रही है। गिरोह में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। आरोपियों के खाते में पड़ी हुई रकम को फ्रीज कर दिया गया है। वहीं बदमाशों की अपराध से अर्जित संपत्ति का भी पता लगाया जा रहा है। जल्द ही उसे जब्त किया जाएगा।
एनपी सिंह, एएसपी दक्षिणी
पकड़े गए दो आरोपी इसी गिरोह का बन चुके शिकार
आरोपी रोहित और ज्ञानेश इसी गिरोह के चंगुल में फंसकर कुछ समय पहले ठगी का शिकार हो चुके हैं। गैंग के सरगना ने इनका फर्जी मेडिकल कराते हुए डेढ़ से दो लाख रुपये हड़प लिए थे। स्वाॅट प्रभारी सतेंद्र विक्रम सिंह के मुताबिक जब दोनों को नौकरी नहीं मिली तो सरगना ने उन्हें कुछ रुपये वापस दे दिए। बाद में गैंग में शामिल करते हुए अन्य लोगों को शिकार बनाने की ट्रेनिंग दी। इसके बाद इन लोगों ने बेरोजगारों को फंसाना शुरू किया।
विदेश में पढ़ता है ठग जसविंदर का भाई
एसओ कमलापुर सतीश चंद्र की मानें तो ठग जसविंदर अपने भाई को विदेश में पढ़ा रहा है। हाल ही में ठगी से आए दस लाख रुपये उसने अपने भाई के खाते में डाले हैं। मौजूदा समय में उसके खाते में चार लाख रुपये थे। खाते के संचालन पर रोक लगा दी गई है। पकड़े जाने के बाद आरोपी पुलिस को गुमराह करते हुए खुद को बरेली में सेना की कैंटीन में काम करने वाला बताता रहा। जांच में उसका दावा झूठा निकला।
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स्वाॅट प्रभारी सतेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि कुछ महीने पहले खैराबाद निवासी मयंक यादव को आरपीएफ में भर्ती कराने का झांसा देकर ठगों ने उससे सात लाख रुपये लिए थे। इसकी शिकायत पीड़ित ने कमलापुर थाने में की थी। कमलापुर पुलिस मामले की जांच कर रही थी।
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इसी बीच टीम को मुखबिर से सूचना मिली गिरोह के कुछ लोग महोली के पास मौजूद हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने लखीमपुर के थाना गोला गांव चौरठिया निवासी जसविंदर उर्फ जस्सी, थाना रेउसा के गांव पिपरा निवासी रोहित मौर्य और सेवता निवासी ज्ञानेश यादव को महोली पुल से गिरफ्तार कर लिया। स्वॉट प्रभारी ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि उनका गिरोह बेरोजगारों को निशाना बनाता है।
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गिरोह का सरगना रांची निवासी पंकज है। सेना, आरपीएफ, सीआईएसएफ, आरपीएफ समेत अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगते थे। फिर बेरोजगारों को बरेली स्थित सेना अस्पताल या दिल्ली बुलाया जाता था। यहां युवकों को भरोसा जीतने के लिए बकायदा उनके ब्लड सैंपल लिया जाता था।
कुछ देर बाद उन्हें बताया जाता था कि उनका मेडिकल हो गया है। फिर ठग दस्तावेजों का सत्यापन कराने की बात कहते थे। इसके बाद बेरोजगारों को फर्जी जॉइनिंग लेटर दे दिया जाता था। जॉइनिंग लेटर देते समय बदले में मोटी रकम वसूलते थे। ठगों के पास से पुलिस ने 50 हजार रुपये, चार मोबाइल फोन बरामद व कई दस्तावेज बरामद किए हैं।
गिरोह के अन्य बदमाशों की गिरफ्तारी के हो रहे प्रयास
सेना व केंद्रीय सुरक्षा बलों में नौकरी दिलाने वाले गिरोह के तीन बदमाश पकड़े गए हैं। इन बदमाशों ने अब तक कितने लोगों को ठगा है, इसकी जांच चल रही है। गिरोह में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। आरोपियों के खाते में पड़ी हुई रकम को फ्रीज कर दिया गया है। वहीं बदमाशों की अपराध से अर्जित संपत्ति का भी पता लगाया जा रहा है। जल्द ही उसे जब्त किया जाएगा।
एनपी सिंह, एएसपी दक्षिणी
पकड़े गए दो आरोपी इसी गिरोह का बन चुके शिकार
आरोपी रोहित और ज्ञानेश इसी गिरोह के चंगुल में फंसकर कुछ समय पहले ठगी का शिकार हो चुके हैं। गैंग के सरगना ने इनका फर्जी मेडिकल कराते हुए डेढ़ से दो लाख रुपये हड़प लिए थे। स्वाॅट प्रभारी सतेंद्र विक्रम सिंह के मुताबिक जब दोनों को नौकरी नहीं मिली तो सरगना ने उन्हें कुछ रुपये वापस दे दिए। बाद में गैंग में शामिल करते हुए अन्य लोगों को शिकार बनाने की ट्रेनिंग दी। इसके बाद इन लोगों ने बेरोजगारों को फंसाना शुरू किया।
विदेश में पढ़ता है ठग जसविंदर का भाई
एसओ कमलापुर सतीश चंद्र की मानें तो ठग जसविंदर अपने भाई को विदेश में पढ़ा रहा है। हाल ही में ठगी से आए दस लाख रुपये उसने अपने भाई के खाते में डाले हैं। मौजूदा समय में उसके खाते में चार लाख रुपये थे। खाते के संचालन पर रोक लगा दी गई है। पकड़े जाने के बाद आरोपी पुलिस को गुमराह करते हुए खुद को बरेली में सेना की कैंटीन में काम करने वाला बताता रहा। जांच में उसका दावा झूठा निकला।